मनुस्मृति पर सुप्रिया श्रीनेत का तीखा हमला: महिलाओं की स्वतंत्रता, शिक्षा और अधिकारों को लेकर उठाए सवाल

नई दिल्ली। मनुस्मृति को लेकर देश में एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज होती नजर आ रही है। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में मनुस्मृति में महिलाओं से संबंधित कथित प्रावधानों का हवाला देते हुए तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने आरोप लगाया कि मनुस्मृति में महिलाओं को स्वतंत्र निर्णय लेने के अधिकार से वंचित रखने, उन्हें पुरुषों पर निर्भर बनाए रखने और उनके प्रति आपत्तिजनक दृष्टिकोण प्रस्तुत करने वाली कई बातें कही गई हैं।

वीडियो में श्रीनेत ने कहा कि मनुस्मृति में महिलाओं को केवल दोयम दर्जे का नागरिक नहीं माना गया, बल्कि उनके जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों के लिए उन्हें पुरुषों के संरक्षण में रहने की व्यवस्था बताई गई है। उन्होंने मनुस्मृति के पांचवें अध्याय के श्लोक 148 का उल्लेख करते हुए दावा किया कि इसमें महिला के पिता, पति और बाद में पुत्रों के संरक्षण में रहने की बात कही गई है। श्रीनेत ने इसी आधार पर सवाल उठाया कि यदि महिला को हर अवस्था में किसी पुरुष के संरक्षण में रहना है तो उसके स्वतंत्र निर्णय के अधिकार का क्या होगा?

शिक्षा के अधिकार को लेकर भी सवाल

सुप्रिया श्रीनेत ने अपने वीडियो में महिलाओं की शिक्षा को लेकर भी मनुस्मृति पर गंभीर सवाल उठाए। उनका दावा है कि मनुस्मृति में महिलाओं के वेद अध्ययन और शिक्षा को लेकर प्रतिबंधात्मक व्यवस्था दिखाई देती है तथा कुछ विशेष परिस्थितियों अथवा वर्गों की महिलाओं को छोड़कर सामान्य महिलाओं के लिए शिक्षा का अधिकार सीमित किया गया था।

उन्होंने सवाल उठाया कि जिस व्यवस्था में महिलाओं की शिक्षा और स्वतंत्रता पर पाबंदियां हों, उसे आधुनिक लोकतांत्रिक भारत के मूल्यों के साथ किस तरह देखा जाना चाहिए?

महिलाओं के चरित्र को लेकर कथित टिप्पणियों पर नाराजगी

वीडियो में श्रीनेत ने मनुस्मृति के कुछ अन्य कथित श्लोकों और प्रावधानों का हवाला देते हुए महिलाओं के चरित्र को लेकर की गई टिप्पणियों पर भी कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि मनुस्मृति में महिलाओं को चंचल स्वभाव का बताते हुए पुरुषों से उन्हें दूर रखने और उन पर निगरानी रखने जैसी बातें कही गई हैं।

उन्होंने यह भी दावा किया कि मनुस्मृति के दूसरे अध्याय में पुरुषों को महिलाओं के संबंध में सावधान रहने की सलाह दी गई है और महिलाओं को पुरुषों को आकर्षित अथवा विचलित करने वाली प्रवृत्ति से जोड़कर देखा गया है।

श्रीनेत ने इन कथित प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी बातें आज की महिला समानता और स्वतंत्रता की अवधारणा के बिल्कुल विपरीत नजर आती हैं।

संपत्ति के अधिकार को लेकर भी उठाया मुद्दा

कांग्रेस नेता ने महिलाओं के संपत्ति संबंधी अधिकारों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि मनुस्मृति में महिलाओं को माता-पिता अथवा पति की संपत्ति में समान अधिकार देने की व्यवस्था नहीं दिखाई देती और महिला द्वारा अर्जित संपत्ति पर भी उसके पति या पुत्रों के अधिकार की बात कही गई है।

उन्होंने इसी संदर्भ में महिलाओं को संपत्ति के समान अधिकार से वंचित रखने वाली कथित व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि आधुनिक भारत में संविधान महिलाओं को समानता और समान अधिकार की गारंटी देता है।

विवाह और महिलाओं की सामाजिक स्थिति पर भी टिप्पणी

वीडियो में श्रीनेत ने मनुस्मृति में विवाह से संबंधित कथित प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ महिलाओं की शारीरिक विशेषताओं, पारिवारिक पृष्ठभूमि और सामाजिक स्थिति के आधार पर विवाह को लेकर भी नियम बताए गए हैं।

उन्होंने विशेष रूप से ऐसे कथित प्रावधानों पर आपत्ति जताई जिनमें महिला की पारिवारिक पृष्ठभूमि अथवा सामाजिक स्थिति को विवाह के निर्णय का आधार बनाया गया है।

महिलाओं की तुलना को लेकर भी जताई आपत्ति

श्रीनेत ने मनुस्मृति के तीसरे अध्याय के कुछ कथित श्लोकों का हवाला देते हुए महिलाओं के संबंध में इस्तेमाल किए गए शब्दों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि कुछ स्थानों पर महिलाओं को ऐसे संदर्भों में रखा गया है, जिन्हें आधुनिक नजरिए से बेहद आपत्तिजनक और महिलाओं के सम्मान के विरुद्ध माना जा सकता है।

हालांकि, इन सभी श्लोकों और उनके संदर्भों की मूल संस्कृत पाठ, प्रमाणित अनुवाद तथा विभिन्न विद्वानों की व्याख्याओं से स्वतंत्र पुष्टि किया जाना आवश्यक है, क्योंकि मनुस्मृति के श्लोकों के अनुवाद और उनके अर्थ को लेकर अलग-अलग संस्करणों एवं व्याख्याओं में अंतर मिलता है।

RSS और BJP को लेकर भी उठाए सवाल

सुप्रिया श्रीनेत ने अपने वीडियो में मनुस्मृति के समर्थन को लेकर RSS और भाजपा पर भी राजनीतिक सवाल खड़े किए। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पुराने प्रकाशन ऑर्गनाइजर में संविधान निर्माण के दौर में प्रकाशित एक कथित टिप्पणी का संदर्भ देते हुए दावा किया कि उस समय मनुस्मृति को संविधान के विकल्प के रूप में प्रस्तुत करने की बात कही गई थी।

इस दावे के आधार पर उन्होंने भाजपा और RSS से सवाल किया कि यदि भारत का संविधान सभी नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता और समान अधिकार देता है, तो मनुस्मृति जैसे प्राचीन ग्रंथ को लेकर उनकी वैचारिक स्थिति क्या है?

संविधान बनाम मनुस्मृति की बहस

भारत में मनुस्मृति को लेकर बहस नई नहीं है। डॉ. भीमराव आंबेडकर ने भी जाति व्यवस्था और सामाजिक असमानता के संदर्भ में मनुस्मृति की आलोचना की थी। दूसरी ओर, हिंदू धर्म और भारतीय परंपरा के विभिन्न विद्वानों ने मनुस्मृति की अलग-अलग व्याख्याएं प्रस्तुत की हैं और इसे केवल एक ही दृष्टिकोण से देखने पर आपत्ति भी जताई है।

यही कारण है कि मनुस्मृति से जुड़े किसी भी श्लोक अथवा कथन पर चर्चा करते समय मूल पाठ, अध्याय-श्लोक संख्या, प्रामाणिक अनुवाद और ऐतिहासिक संदर्भ को सामने रखना महत्वपूर्ण हो जाता है।

श्रीनेत के बयान से फिर गरमाई सियासत

सुप्रिया श्रीनेत का यह वीडियो ऐसे समय सामने आया है जब भारतीय राजनीति में संविधान, सामाजिक समानता, जाति व्यवस्था, महिला अधिकार और धार्मिक-सामाजिक ग्रंथों की भूमिका जैसे मुद्दों पर लगातार बहस होती रही है।

श्रीनेत ने अपने वीडियो के जरिए मनुस्मृति में महिलाओं से संबंधित कथित प्रावधानों को सामने रखकर भाजपा और RSS की विचारधारा पर सवाल उठाए हैं। अब इस बयान पर भाजपा और RSS की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

कांग्रेसनेत्री सुप्रिया श्रीनेत के सोसल मिडिया में वायरल वीडियो देखने यहाँ क्लिक कीजिए..

https://youtube.com/shorts/ZxJKI-207hQ?si=mBWeoGJuV6Ocqgj1

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