…वन विभाग के नदी तट वृक्षारोपण घोटाले का पर्दाफाश: 59.56 लाख रुपये हुए हजम, मामला धमतरी वनमण्डल का।

वन विभाग द्वारा नदियों के तटों पर वृक्षारोपण का उद्देश्य जल संरक्षण, मिट्टी कटाव रोकना, पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना और स्थानीय वनस्पति को संरक्षित करना था। इस योजना के तहत बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण के प्रोजेक्ट स्वीकृत किए गए थे। लेकिन अब यह योजना भ्रष्टाचार का शिकार बन गई है, और सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये निकालकर हजम किए जा रहे हैं।

महत्त्व एवं संभावित लाभ: नदी तट वृक्षारोपण के माध्यम से:

वर्जन :- अगर ऐसा हैं तो जाँच पश्चात् कार्यवाही कि जाएगी।
  • जलस्तर बनाए रखने में मदद मिलती है।
  • भू-क्षरण एवं बाढ़ के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
  • स्थानीय वनस्पति एवं जैव विविधता को संरक्षित किया जा सकता है।
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में योगदान मिलता है।

लेकिन क्या यह सब सच में हो रहा है?

असफलता और भ्रष्टाचार की कहानी: हालांकि, इस योजना की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। धमतरी वन मंडल के उत्तर सिंहपुर परिक्षेत्र में विभिन्न नदी तटों पर वृक्षारोपण हेतु लाखों रुपये स्वीकृत किए गए, लेकिन वर्तमान में इन स्थानों पर कोई वृक्ष नहीं दिखाई देते। ये परियोजनाएँ पूरी तरह से विफल हो चुकी हैं, और अधिकारी इसके बावजूद धनराशि का गबन कर रहे हैं।

असफल वृक्षारोपण का विवरण:

  1. ग्राम भंडारी (खसरा नंबर 721) – 10 हेक्टेयर वृक्षारोपण हेतु 11.24 लाख रुपये स्वीकृत।
  2. ग्राम अमलीडी (पैरी नदी तट) – 30 हेक्टेयर वृक्षारोपण हेतु 33.71 लाख रुपये स्वीकृत।
  3. ग्राम करेली छोटी (महानदी तट) – 10 हेक्टेयर वृक्षारोपण हेतु 11.24 लाख रुपये स्वीकृत।
  4. ग्राम हरदी (महानदी तट) – 3 हेक्टेयर वृक्षारोपण हेतु 3.37 लाख रुपये स्वीकृत।

कुल खर्च: 59.56 लाख रुपये

लेकिन, वृक्षारोपण असफल!

इन परियोजनाओं पर वर्ष 2019-20 में कार्य किया गया, लेकिन आज इन स्थानों पर कहीं भी उचित संख्या में वृक्ष नहीं दिखाई देते।

भ्रष्टाचार का खुलासा: सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस असफल वृक्षारोपण के बावजूद हर वर्ष इसके मेंटेनेंस, चौकीदारी, सुरक्षा, फेंसिंग, मरम्मत, निंदाई-गोड़ाई, खाद आदि के नाम पर लाखों रुपये निकाले जा रहे हैं। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि किस प्रकार अधिकारी इस परियोजना का उपयोग भ्रष्टाचार करने के लिए कर रहे हैं।

अधिकारियों की संलिप्तता: वन मंत्री केदार कश्यप और वन बल प्रमुख व्ही. श्रीनिवास राव इस भ्रष्टाचार से अनजान बने हुए हैं। सवाल यह उठता है कि यदि राजधानी के इतने नजदीक हो रहे इस घोटाले पर उनकी नजर नहीं पड़ रही, तो बीहड़ वन क्षेत्र में होने वाले भ्रष्टाचार पर वे कैसे ध्यान देंगे? क्या यह उनकी मिलीभगत को उजागर नहीं करता?

जनता की माँग: उच्च स्तरीय जांच हो! इस पूरे मामले की निष्पक्ष एवं गहन जांच आवश्यक है ताकि दोषियों को दंडित किया जा सके। संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी अनियमितताएँ न हों। यदि इस मामले की गंभीरता को नजरअंदाज किया गया, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि पूरा विभाग भ्रष्टाचार में लिप्त है।

ऐसे ही धमतरी वन मण्डल के अन्य परिक्षेत्र कि जांच पड़ताल प्रक्रिया जारी …

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