ग्वालियर के डंपिंग यार्ड में उगेगा जंगल, 5 हजार पेड़ों से तैयार होगा सिटी फॉरेस्ट

ग्वालियर 

ग्वालियर: ग्वालियर के पास बसे बरा गांव की सूरत अब बदल रही है. जो इलाका शहर भर के कचरे का डंपिंग यार्ड बन चुका था अब उसकी सूरत बदलने के साथ ही इसके जरिए लोगों को प्रकृति के साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. ग्वालियर के बरा गांव में सिटी फॉरेस्ट बन रहा है, जहां हज़ारों पौधे अब पेड़ का रूप ले रहे हैं. जो कुछ समय बाद एक कृत्रिम जंगल के रूप में विकसित हो जाएगा। 

डंपिंग यार्ड की जगह पर बन रहा सिटी फॉरेस्ट
असल में ग्वालियर के नजदीक बसा बरा गांव के पास बड़े क्षेत्र में नगर निगम का पुराना डंपिंग यार्ड है. लेकिन अब नगर निगम इस क्षेत्र को विकसित करने में जुटा है. जिसके तहत डंपिंग यार्ड को खत्म कर यहां एक सिटी फॉरेस्ट डेवलप किया जा रहा है. जो शहर में एक जंगल का अनुभव देगा. लगातार प्रदूषित होती ग्वालियर की आबोहवा को बचाने के लिए की जा रही पहल लोगों को भी प्रकृति के नजदीक लाएगी। 

आखिरी फरवरी में आमजन के लिए खुलने की उम्मीद
ग्वालियर नगर निगम इसके लिए बरा गांव के पास करीब 94 हज़ार वर्गफीट एरिया में प्राकृतिक क्षेत्र विकसित कर रहा है. जिसमें हज़ारों पौधे लगाये जा रहे हैं. जल्द ही यह पौधे बड़े होंगे तो आम जानता के लिए फरवरी या मार्च 2027 तक इस सिटी फॉरेस्ट को खोल दिया जाएगा. इसके निर्माण का काम तेज़ी से चल रहा है। 

अब तक 5000 से ज़्यादा पौधे लगाये, कई पेड़ बनने की ओर
नगर निगम के अपर आयुक्त मुनीश सिंह सिकरवार के मुताबिक, ''यह सिटी फॉरेस्ट भले ही कृत्रिम होगा लेकिन इसे बनाने में प्राकृतिक संसाधनों का ही उपयोग किया जा रहा है. शुरुआत में यहां 1200 के लगभग पौधे लगाए जाने थे लेकिन अब तक यहां 5000 से ज़्यादा पौधे लगाए जा चुके हैं. जो तेज़ी से बड़े हो रहे हैं. शहरी पार्कों की तरह यहां कंक्रीट या पेबर ब्लॉक से पाथवे नहीं बनेंगे बल्कि यहां आने वाले लोगों के लिए कच्चा रास्ता रखा जा रहा है, जिसे उन्हें जंगल जैसा ही अनुभव हो. कच्ची मिट्टी पर गिट्टी डाली जाएगी जिससे ये चलने लायक बन सकें। 

करीब दो करोड़ की लागत से तैयार हो रहा जंगल
इस परिसर को करीब 1 करोड़ 92 लाख रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है. जिसे नेशनल ग्रीन एयर प्रोग्राम के तहत अनुदान मिला है. यहां बाउंड्रीवाल और पानी की बोरिंग भी कराई गई है, जिससे जानवर इस व्यवस्था को खराब ना करें. साथ ही जिस संस्था को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है वह अगले पांच वर्षों तक इसकी देखरेख भी करेगी. खास बात यह भी है कि इस कृत्रिम जंगल में सजावटी या मौसमी पौधों की बजाय ऐसे पेड़ों पर फोकस किया गया है जो लंबे समय तक जीवित रहें. यहां नीम, पीपल, बरगद जैसे पौधे लगाए गए हैं जो धीरे-धीरे पेड़ का स्वरूप ले रहे हैं। 

सैर सपाटा नहीं प्रकृति में सुधार पर फोकस
निगम के अधिकारियों का मानना है कि, इस सिटी फॉरेस्ट से आसपास हरियाली रहेगी और प्रदूषित हवा भी शुद्ध होगी. इस परियोजना को सैर सपाटे तक सीमित नहीं रखा जा रहा है, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण की दृष्टि से बुई महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 

Recent Post

Live Cricket Update

You May Like This

error: Content is protected !!

4th piller को सपोर्ट करने के लिए आप Gpay - 7587428786