दीन की तालीम से मेडिकल की पढ़ाई और फिर UPSC तक का सफर, युवाओं के लिए बने मिसाल
नई दिल्ली/हैदराबाद।
आमतौर पर एक व्यक्ति अपने जीवन में एक या दो बड़े मुकाम हासिल करने के बाद ही संतुष्ट हो जाता है, लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपनी मेहनत, लगन और अनुशासन से एक के बाद एक अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाते हैं। डॉ. सैयद मुस्तफ़ा हाशमी की कहानी भी ऐसी ही प्रेरणादायक यात्रा के रूप में सामने आती है।
उनके बारे में उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने क़ुरआन-ए-पाक को हिफ़्ज़ कर हाफ़िज़-ए-क़ुरआन का मुकाम हासिल करने के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में कदम रखा और MBBS तथा MS (जनरल सर्जरी) की पढ़ाई पूरी की।
लेकिन उनकी मंजिल यहीं नहीं रुकी। डॉक्टर के रूप में करियर बनाने के बावजूद उनके भीतर देश की सेवा करने की इच्छा बनी रही। उन्होंने UPSC Civil Services Examination की तैयारी की और सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में स्थान प्राप्त किया।
स्कूल से ही मेधावी छात्र होने का दावा
डॉ. मुस्तफ़ा हाशमी के बारे में साझा की गई जानकारी में उन्हें बचपन से ही मेधावी छात्र बताया गया है। दावा है कि उन्होंने इंटरनेशनल बायोलॉजी ओलंपियाड में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। इसके अलावा उनका नाम लोकप्रिय टीवी क्विज शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) की हॉट सीट तक पहुंचने वालों में भी बताया जाता है।
यदि इन उपलब्धियों की आधिकारिक/विश्वसनीय स्रोतों से पुष्टि होती है, तो यह उनके बहुआयामी प्रतिभा और प्रतियोगी मानसिकता को दर्शाने वाला महत्वपूर्ण पहलू होगा।
उस्मानिया मेडिकल कॉलेज से मेडिकल शिक्षा
उपलब्ध विवरण के अनुसार डॉ. हाशमी ने हैदराबाद के प्रतिष्ठित उस्मानिया मेडिकल कॉलेज से MBBS की पढ़ाई की और इसके बाद MS (General Surgery) की डिग्री हासिल की।
एक ओर धार्मिक शिक्षा और दूसरी ओर चिकित्सा जैसे कठिन एवं प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में उच्च शिक्षा हासिल करना अपने आप में उल्लेखनीय उपलब्धि है।
डॉक्टर से IPS बनने का फैसला
मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टर के रूप में करियर बनाने के बावजूद डॉ. हाशमी ने सिविल सेवा की ओर कदम बढ़ाया। उन्होंने UPSC Civil Services Examination में सफलता प्राप्त की और साझा किए गए विवरण के मुताबिक ऑल इंडिया रैंक (AIR) 162 हासिल की।
इसके बाद उनका चयन IPS के लिए हुआ।
यानी उनका सफर हाफ़िज़-ए-क़ुरआन → डॉक्टर → UPSC सफल अभ्यर्थी → IPS अधिकारी तक पहुंचा।
दीन और दुनियावी तालीम का खूबसूरत संगम
डॉ. मुस्तफ़ा हाशमी की कहानी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि उन्होंने धार्मिक शिक्षा और आधुनिक शिक्षा को एक-दूसरे का विरोधी मानने के बजाय दोनों को अपने जीवन में साथ लेकर आगे बढ़ाया।
उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि शिक्षा का कोई एक रास्ता नहीं होता। व्यक्ति धार्मिक शिक्षा हासिल करते हुए डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, प्रशासनिक अधिकारी या पुलिस अधिकारी भी बन सकता है—बशर्ते उसके भीतर सीखने की लगन और मेहनत करने का जज़्बा हो।
युवाओं के लिए प्रेरणा
आज के युवाओं के सामने अक्सर यह सवाल रहता है कि एक साथ अलग-अलग क्षेत्रों में आगे कैसे बढ़ा जाए। डॉ. हाशमी की कहानी इसी सवाल का एक प्रेरणादायक जवाब प्रस्तुत करती है।
उनका सफर बताता है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, समय का सही प्रबंधन किया जाए और लगातार मेहनत की जाए तो व्यक्ति अपनी परिस्थितियों से आगे निकलकर अपनी अलग पहचान बना सकता है।
हाफ़िज़-ए-क़ुरआन बनने से लेकर डॉक्टर और फिर IPS अधिकारी बनने तक का सफर निश्चित रूप से युवाओं के लिए प्रेरणा का विषय है।
“मंज़िलें उन्हीं को मिलती हैं,
जिनके सपनों में जान होती है।
पंखों से कुछ नहीं होता,
हौसलों से उड़ान होती है।”








