लखनऊ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार विद्यालयी शिक्षा में गुणवत्ता आधारित परिवर्तन की दिशा में मानव संसाधनों का सबसे व्यापक अकादमिक ढांचा तैयार कर रही है। प्रदेश सरकार का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में स्थायी बदलाव केवल विद्यालय भवनों, स्मार्ट क्लास या आधारभूत सुविधाओं से नहीं, बल्कि प्रशिक्षित, सक्षम और जवाबदेह शैक्षणिक नेतृत्व से संभव है। इसी नीति के अनुरूप एआरपी (अकादमिक रिसोर्स पर्सन), जिला समन्वयक (निपुण), स्टेट रिसोर्स ग्रुप (एसआरजी), ईसीसीई एजुकेटर तथा विशेष शिक्षकों की नियुक्तियों को मिशन मोड में आगे बढ़ाया गया है। अधिकांश जनपदों में चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, जबकि कई श्रेणियों में नियुक्तियां पूरी कर विद्यालयों तक अकादमिक सहयोग तंत्र को मजबूत बनाया जा चुका है। इससे राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, निपुण भारत मिशन और प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा के लक्ष्यों को धरातल पर उतारने की दिशा में प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है।
एआरपी बन रहे शिक्षा सुधार की नई ताकत
विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने एआरपी व्यवस्था को शिक्षा सुधार का प्रमुख आधार बनाया है। एआरपी अब केवल निरीक्षण तक सीमित नहीं रहेंगे। वे शिक्षकों को शैक्षणिक सहयोग, कक्षा शिक्षण में सुधार, सीखने के स्तर का विश्लेषण और विद्यालयों का सतत अकादमिक मार्गदर्शन भी करेंगे। वर्तमान प्रगति के अनुसार वाराणसी ने 100 प्रतिशत एआरपी उपलब्धता हासिल कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। देवरिया और हाथरस 98 प्रतिशत, बस्ती एवं कौशाम्बी 95 प्रतिशत, अलीगढ़ तथा सिद्धार्थनगर 94 प्रतिशत और कुशीनगर 93 प्रतिशत उपलब्धता के साथ अग्रणी जिलों में शामिल हैं। वहीं अधिकांश जिलों में रिक्तियां तेजी से भरी जा रही हैं, जिससे विद्यालयों का अकादमिक सपोर्ट सिस्टम लगातार मजबूत हो रहा है।
निपुण भारत मिशन को मिलेगा मजबूत संस्थागत आधार
बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक दक्षता सुनिश्चित करने के लिए सरकार जिला समन्वयक (निपुण) की नियुक्तियों को तेजी से पूरा कर रही है। 39 जनपदों में चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि शेष जिलों में इंटरव्यू, दस्तावेज सत्यापन, वित्तीय मूल्यांकन तथा अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं अंतिम चरण में हैं। इन अधिकारियों के माध्यम से निपुण भारत मिशन के क्रियान्वयन, शिक्षक प्रशिक्षण, डाटा आधारित अनुश्रवण, सीखने के परिणामों के मूल्यांकन तथा शैक्षणिक योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग को नई गति मिलेगी।
एसआरजी और विशेष शिक्षक देंगे गुणवत्ता सुधार को नई धार
राज्य स्तर पर शिक्षक प्रशिक्षण, शैक्षणिक नवाचार और अकादमिक नेतृत्व को मजबूत बनाने के लिए एसआरजी व्यवस्था का भी तेजी से विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान में एसआरजी के रिक्त पदों को शीघ्रता से भरने की प्रक्रिया जारी है। इसके साथ ही विशेष शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित कर समावेशी शिक्षा को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि दिव्यांग बच्चों सहित प्रत्येक विद्यार्थी तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा समान रूप से पहुंच सके।
ईसीसीई एजुकेटर नियुक्तियों से मजबूत होगी बुनियादी शिक्षा
नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप बुनियादी शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए ईसीसीई एजुकेटर की नियुक्तियां भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं। पहले चरण में अनेक जनपदों में बड़ी संख्या में एजुकेटर कार्यभार ग्रहण कर चुके हैं, जबकि दूसरे चरण में कई जिलों में नियुक्तियां पूरी हो चुकी हैं। अन्य जनपदों में तकनीकी मूल्यांकन, कार्यादेश, दस्तावेज सत्यापन, मेरिट सूची, विज्ञापन और निविदा प्रक्रियाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। इससे आंगनबाड़ी केंद्रों और विद्यालयों के बीच शैक्षणिक समन्वय मजबूत होगा तथा बच्चों को प्रारंभिक अवस्था से ही गुणवत्तापूर्ण सीखने का वातावरण उपलब्ध कराया जा सकेगा।
मानव संसाधनों के जरिए शिक्षा व्यवस्था में संस्थागत परिवर्तन
योगी सरकार शिक्षा सुधार को अल्पकालिक कार्यक्रम न मानते हुए दीर्घकालिक संस्थागत परिवर्तन के रूप में आगे बढ़ा रही है। एआरपी, निपुण जिला समन्वयक, एसआरजी, ईसीसीई एजुकेटर और विशेष शिक्षकों की व्यापक तैनाती से विद्यालयों में अकादमिक नेतृत्व मजबूत होगा, शिक्षकों की क्षमता संवर्धित होगी, सीखने के परिणामों की नियमित निगरानी होगी और प्रत्येक स्तर पर जवाबदेह शैक्षणिक व्यवस्था विकसित होगी। मजबूत मानव संसाधन, डाटा आधारित अनुश्रवण, सतत प्रशिक्षण और परिणाम आधारित कार्यसंस्कृति के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता में व्यापक सुधार की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।








