जयपुर
राजस्थान की भजनलाल सरकार ने वित्तीय संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन और खर्चों में कटौती को लेकर बड़ा फैसला लिया है. शनिवार को इस संबंध में वित्त विभाग ने एक विस्तृत आदेश जारी किया गया है. सरकार ने सरकारी खर्चे पर विदेश यात्रा, पेट्रोल-डीजल से चलने वाली सभी सरकारी गाड़ियों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने का फैसला लिया है. इसके अलावा मुख्यमंत्री, मंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को अनावश्यक वाहनों के उपयोग कम करने की सलाह दी गई है.
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने काफिले में वाहनों की संख्या सीमित करने का निर्णय लिया है
राजस्थान सरकार के अन्य मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों को भी अनावश्यक वाहन उपयोग कम करने और सीमित संख्या में वाहन रखने की सलाह दी गई है.
सरकार ने पेट्रोल और डीजल चालित वाहनों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने का भी निर्णय लिया है और संविदा पर लिए जाने वाले वाहनों में भी इलेक्ट्रिक व्हीकल को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं.
इसके अलावा, एक ही गंतव्य पर जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को कार पूलिंग अपनाने की सलाह दी गई है ताकि ईंधन की बचत हो सके और खर्चों में कमी आए.
सरकारी खर्चों में नियंत्रण के तहत सरकारी अधिकारियों की विदेश यात्राओं पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाने का भी फैसला किया गया है.
ऊर्जा संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार ने कई पहल की हैं. वित्त विभाग के आदेश के अनुसार प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के तहत घरेलू सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना को प्राथमिकता दी जाएगी.
साथ ही राजकीय कार्यालयों में भी सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिससे बिजली खर्च में कमी लाई जा सके.
कृषि क्षेत्र में भी सुधार के लिए कदम उठाए गए हैं, जहां उर्वरकों के संतुलित और आवश्यकता अनुसार उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा. इसके तहत सस्टेनेबल, प्राकृतिक और ऑर्गेनिक खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों की लागत भी कम हो सके.
इससे पहले शुक्रवार को कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कई बड़े प्रस्तावों पर मंजूरी दी, जिसमें पेंशन नियमों में बदलाव से लेकर नई इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट पॉलिसी 2026 पर मुहर लगाना शामिल है. राजस्थान सरकार ने पेंशन नियमों (1996) में तीन बड़े बदलाव किए हैं. पेंशन को लेकर नए नियम के तहत दिव्यांग बच्चों को हर 3 साल में विकलांगता प्रमाण पत्र देने की बाध्यता खत्म कर दी गई है. अब केवल एक बार ही यह सर्टिफिकेट देना होगा. पेंशनर्स को अब मोबाइल ऐप के जरिए फेस ऑथेंटिकेशन टेक्नोलॉजी से सालाना जीवित प्रमाण पत्र (Life Certificate) देने की छूट होगी.









