मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान बना जीवन रक्षक संजीवनी

रायपुर 

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व एवं कलेक्टर  अमित कुमार के मार्गदर्शन में सुकमा जिले में मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत स्वास्थ्य जांच और उपचार कार्य तेजी से संचालित किया जा रहा है। अभियान का मुख्य उद्देश्य दूरस्थ एवं अंदरूनी क्षेत्रों के जरूरतमंद नागरिकों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। इसी क्रम में कोंटा विकासखंड के दूरस्थ नियद नेल्लानार क्षेत्र के अरलमपल्ली, पोलमपल्ली, दोरनापाल, बगड़ेगुड़ा, रंगाईगुड़ा, कोलईगुड़ा एवं पेंटापाड़ जैसे गांवों से कुल 39 मरीजों को जिला चिकित्सालय सुकमा लाकर जांच एवं उपचार कराया गया।

जिला चिकित्सालय में इन मरीजों का समुचित परीक्षण कर उपचार सुनिश्चित किया गया, जिसमें 16 लोगों को प्रेसबायोपिक चश्मा प्रदान किया गया तथा 8 मरीजों का मोतियाबिंद ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया। वहीं नियद नेल्लानार के गोगुंडा पहाड़ी क्षेत्र से 5 उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित लाकर जांच कराई गई और आवश्यक स्वास्थ्य परामर्श के साथ वापस भेजा गया। इसके अतिरिक्त कोसागुड़ा से 6 मरीजों को अल्ट्रासाउंड एवं रक्त चढ़ाने हेतु भेजा गया था, जबकि 4 मरीज हाथ-पैर सूजन की समस्या से पीड़ित थे, जिनका भी उपचार कर राहत प्रदान की गई।

जिला चिकित्सालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत सुकमा जिले में कुल स्वास्थ्य जांच का लक्ष्य 2,93,386 निर्धारित किया गया है, जिसमें से अब तक 1,54,157 लोगों की स्वास्थ्य जांच पूरी की जा चुकी है। जांच के दौरान कुल 4990 मरीजों को मोतियाबिंद, मलेरिया, कुष्ठ, टीबी, खून की कमी, उच्च जोखिम गर्भवती महिला, कुपोषित बच्चे, बीपी और शुगर जैसी बीमारियों से चिन्हांकित कर प्राथमिक, सामुदायिक एवं जिला अस्पतालों में उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। 

कलेक्टर  अमित कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के माध्यम से जिले के दूरस्थ एवं अंदरूनी क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का कार्य प्राथमिकता के साथ किया जा रहा है। हमारा लक्ष्य है कि कोई भी जरूरतमंद नागरिक इलाज से वंचित न रहे। अभियान के अंतर्गत चिन्हांकित मरीजों को समय पर जिला चिकित्सालय लाकर जांच, उपचार, ऑपरेशन एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।  

मानवीय संवेदनशीलता और प्रशासनिक तत्परता का परिचय देते हुए सभी मरीजों का इलाज पूर्ण कराने के बाद उन्हें सुरक्षित घर वापस भेजने की व्यवस्था भी की गई। सुबह 6 बजे जिला अस्पताल में 4 एम्बुलेंस लगाकर मरीजों को नाश्ता कराया गया और फिर उन्हें उनके गांवों तक पहुंचाया गया। यह व्यवस्था इस बात का प्रमाण है कि शासन-प्रशासन दूरस्थ अंचलों के लोगों की स्वास्थ्य जरूरतों को गंभीरता से लेते हुए उन्हें सम्मान और सुरक्षा के साथ इलाज उपलब्ध करा रहा है।

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