इंदौर-उज्जैन का सफर 40 मिनट में होगा पूरा, डबलडेकर फ्लाईओवर से सिंहस्थ में मिलेगी बड़ी राहत

 इंदौर 
इंदौर में बने डबलडेकर से सिंहस्थ में रोजाना लाखों वाहन गुजरेंगे। सिंहस्थ के समय इंदौर से उज्जैन और उज्जैन से इंदौर आने वाले वाहनों की संख्या करीब 4 लाख हो सकती है। ऐसे में इस ब्रिज से इंदौर से उज्जैन की दूरी सिर्फ 40 मिनट में पूरी हो जाएगी। डबलडेकर बनने से वाहनों की आवाजाही सरपट हो गई है। जल्द ही दूसरी भुजा पर भी ट्रैफिक होगा, जिससे इंदौर से उज्जैन जाने वालों को राहत मिलेगी। सिंहस्थ के समय इंदौर से उज्जैन और उज्जैन से इंदौर आने वाले वाहनों की संख्या करीब 4 लाख हो सकती है। ऐसे में इस ब्रिज से इंदौर से उज्जैन की दूरी सिर्फ 40 मिनट में पूरी हो जाएगी।

डबलडेकर बनने से वाहनों की आवाजाही सरपट हो गई है। जल्द ही दूसरी भुजा पर भी ट्रैफिक होगा, जिससे इंदौर से उज्जैन जाने वालों को राहत मिलेगी। इंदौर के सबसे व्यस्त चौराहों में शामिल लवकुश चौराहा सबसे आधुनिक ट्रैफिक इंटरचेंज के रूप में विकसित हो रहा है। यहां करीब 175 करोड़ रुपए की लागत से बने डबलडेकर की एक भुजा पर तो ट्रैफिक चल रहा है।

कम होगा ट्रैफिक का दबाव
देखा जाए तो एमपी का पहला ऐसा डबलडेकर ब्रिज है, जहां रोड, ब्रिज, मेट्रो एक ही कॉरिडोर (एमआर-10) पर अलग-अलग स्तर पर संचालित हो रहे हैं। नीचे रोड पर ट्रैफिक और मेट्रो ट्रैक। सीमित जगह में दोहरी परिवहन व्यवस्था डेवलप होने से आने वाले दिनों में ट्रैफिक का दबाव भी कम होने का अनुमान है।

इतनी गाड़ियों का दबाव संभालने की तैयारी
आम दिनों में इंदौर-उज्जैन मार्ग से रोजाना 35 से 40 हजार वाहन गुजरते हैं, जबकि सावन में यह संख्या 70 से 80 हजार से अधिक हो जाती है। सिंहस्थ के दौरान वाहनों की संख्या करीब 4 लाख तक पहुंचने का अनुमान है।

2016 के सिंहस्थ के आखिरी शाही स्नान पर इंदौर-सांवेर रोड से हरिफाटक तक लंबा जाम लगा था। वाहन चालक घंटों फंसे रहे थे। इस बार डबलडेकर ब्रिज से लवकुश चौराहे पर ट्रैफिक का दबाव कम करने और इंदौर-उज्जैन मार्ग पर आवाजाही सुगम बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

मेट्रोपॉलिटन रीजन के विकास को मिलेगी गति
राज्य सरकार इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन रीजन (UIMR) विकसित कर रही है। इसका उद्देश्य दोनों शहरों को आर्थिक, औद्योगिक, आवासीय और परिवहन नेटवर्क के रूप में जोड़ना है। लवकुश डबलडेकर ब्रिज इस कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाली अहम कड़ी बन सकता है। बेहतर सड़क नेटवर्क और मेट्रो कनेक्टिविटी से भविष्य में औद्योगिक निवेश, लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय विकास को गति मिलने की उम्मीद है।

2023 में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट
IDA ने साल 2023 में इस प्रोजेक्ट का निर्माण शुरू कराया था। मेट्रो कॉरिडोर के साथ समन्वय, तकनीकी जटिलताओं और स्टील बो-स्ट्रिंग स्ट्रक्चर के निर्माण के कारण काम कई चरणों में पूरा किया गया। पहली लेन 23 जुलाई को शुरू हुई वहीं दूसरी लेन भी जल्द शुरू जाएगी।

इतनी गाड़ियों का दबाव संभालने की तैयारी

आम दिनों में इंदौर-उज्जैन मार्ग से रोजाना 35 से 40 हजार वाहन गुजरते हैं, जबकि सावन में यह संख्या 70 से 80 हजार से अधिक हो जाती है। सिंहस्थ के दौरान वाहनों की संख्या करीब 4 लाख तक पहुंचने का अनुमान है।

2016 के सिंहस्थ के आखिरी शाही स्नान पर इंदौर-सांवेर रोड से हरिफाटक तक लंबा जाम लगा था। वाहन चालक घंटों फंसे रहे थे। इस बार डबलडेकर ब्रिज से लवकुश चौराहे पर ट्रैफिक का दबाव कम करने और इंदौर-उज्जैन मार्ग पर आवाजाही सुगम बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

Recent Post

Live Cricket Update

You May Like This

error: Content is protected !!

4th piller को सपोर्ट करने के लिए आप Gpay - 7587428786