झारखंड के मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की कमी दूर करने की कवायद, 65 सह प्राध्यापक पदों पर इंटरव्यू

रांची
राज्य के मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सकों की कमी दूर करने के लिए शुक्रवार को रिम्स में दो स्तरों पर नियुक्ति प्रक्रिया चली। एक ओर राज्य के पांच सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सह प्राध्यापक के 65 पदों पर नियुक्ति के लिए वाक इन इंटरव्यू आयोजित किया गया, वहीं रिम्स में सीनियर रेजिडेंट (एसआर) पदों के लिए भी साक्षात्कार हुआ।

हालांकि, एसआर के साक्षात्कार में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के नहीं पहुंचने से रिक्त पदों को भरने की चुनौती बनी हुई है। इसके पीछे एक प्रमुख वजह पीजी के दौरान भरे जाने वाले बांड को बताया जा रहा है। बांड की शर्तों के कारण कई चिकित्सक दूसरे राज्यों में चले जाते हैं, जिससे राज्य में उपलब्ध विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या प्रभावित होती है।

रिम्स में एसआर के लिए आयोजित साक्षात्कार में अभ्यर्थियों की कम उपस्थिति ने चिकित्सा शिक्षा संस्थानों में डॉक्टरों की उपलब्धता और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, शुक्रवार को एसआर के लिए निर्धारित कुल पदों और साक्षात्कार में पहुंचे अभ्यर्थियों की आधिकारिक संख्या की पुष्टि नहीं हो सकी है।

सह प्राध्यापक के 65 पदों पर नियुक्ति
स्वास्थ्य विभाग की ओर से पांच सरकारी मेडिकल कालेजों में सह प्राध्यापक के 65 पदों पर नियुक्ति के लिए शुक्रवार को वाक इन इंटरव्यू आयोजित किया गया। इनमें नियमित श्रेणी के 53 और बैकलॉग के 12 पद शामिल हैं। इससे पहले 21 सितंबर को आयोजित साक्षात्कार में 65 पदों के विरुद्ध केवल 13 अभ्यर्थी पहुंचे थे।

इनमें भी अधिकांश अभ्यर्थी निर्धारित योग्यता पूरी नहीं करते थे। कई अभ्यर्थी सह प्राध्यापक के पद को सहायक प्राध्यापक समझकर पहुंच गए थे। इसके बाद विभाग ने पहले की प्रक्रिया रद कर नए सिरे से साक्षात्कार आयोजित करने का निर्णय लिया था।

पांच मेडिकल कॉलेजों में होगी नियुक्ति
नियुक्ति प्रक्रिया के तहत जमशेदपुर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज, धनबाद के शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज, दुमका के फूलो झानो मेडिकल कॉलेज, हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज और पलामू के मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज में सह प्राध्यापकों की नियुक्ति की जाएगी। विभिन्न विभागों में रिक्तियों को भरने से मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई, मरीजों के उपचार और विशेषज्ञ सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

विभाग की ओर से नियमित पदों में मेडिसिन, रेडियोलॉजी, रेडियोथेरेपी, एनाटोमी, पैथोलॉजी, निश्चेतना, नेत्र रोग और अन्य विभाग शामिल किए गए हैं। बैकलॉग के पद माइक्रोबायोलॉजी, फार्माकोलॉजी, नेत्र रोग, पीएसएम, मनोरोग, दंत और निश्चेतना विभागों में हैं।

बॉन्ड की शर्तों से प्रभावित हो रही उपलब्धता
चिकित्सा शिक्षा से जुड़े लोगों के अनुसार, पीजी की पढ़ाई के दौरान बांड भरने वाले कई चिकित्सक बॉन्ड की शर्तों के कारण दूसरे राज्यों में चले जाते हैं। इससे झारखंड के मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजिडेंट और विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। एसआर स्तर पर पर्याप्त डॉक्टर नहीं रहने से विभागों में काम का दबाव बढ़ता है।

मरीजों के उपचार, शैक्षणिक गतिविधियों और अस्पताल की नियमित सेवाओं पर भी इसका असर पड़ सकता है। ऐसे में नियुक्ति प्रक्रिया के साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि योग्य चिकित्सक राज्य में काम करने के लिए उपलब्ध रहें। मेडिकल कॉलेजों में रिक्त पदों को भरने के लिए समयबद्ध प्रक्रिया और बांड संबंधी नियमों को लेकर स्पष्टता महत्वपूर्ण होगी।

Recent Post

Live Cricket Update

You May Like This

error: Content is protected !!

4th piller को सपोर्ट करने के लिए आप Gpay - 7587428786