बेरूत
यमन के उत्तरी हिस्से पर शासन करने वाले 'अंसार अल्लाह' आंदोलन ने सऊदी अरब पर आरोप लगाया है कि उसने पिछले 24 घंटों में उनके इलाके में 106 हवाई हमले किए हैं। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने रविवार को टेलीग्राम पर लिखा, "पिछले 24 घंटों में, सऊदी लड़ाकू विमानों ने राजधानी सना और अल-जौफ़, ताइज़, अमरान, हज्जा और सादा प्रांतों में आम नागरिकों के ठिकानों पर 106 हवाई और मिसाइल हमले किए हैं।"
सरी ने आगे कहा कि एफ -15 और टाइफून लड़ाकू विमानों ने यमन के उन इलाकों पर हमले किए जो हूतियों के नियंत्रण में हैं। इससे पहले रविवार को यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की सेनाओं ने उन इलाकों को वापस पाने के लिए एक सैन्य अभियान की घोषणा की जो अभी सरकार के नियंत्रण से बाहर हैं।
यमनी सेना ने इस अभियान को ‘डॉन ऑफ यमन’ नाम दिया है और उसका सबसे बड़ा लक्ष्य रणनीतिक बाब अल-मंदेब स्ट्रेट पर नियंत्रण हासिल करना बताया जा रहा है. सेना के मुताबिक इसके लिए जमीन और हवा, दोनों तरफ से कार्रवाई तेज की गई है. सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन यमनी सेना को जमीन पर एयर कवर दे रहा है और बाब अल-मंदेब के लिए हवाई सुरक्षा भी उपलब्ध करा रहा है।
ताइज को घेरने की तैयारी, तुर्बाह पर कब्जा
तुर्बाह पर हूतियों का कब्जा रविवार को हुआ। इसके कुछ ही समय बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार ने हूतियों के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान की घोषणा कर दी। तुर्बाह एक अहम सड़क पर स्थित है, जो प्रांतीय राजधानी ताइज को बंदरगाह शहर अदन से जोड़ती है। अदन फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार का अंतरिम केंद्र है।
ताजा हिंसा में भी हजारों लोग प्रभावित
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, हालिया हिंसा में 800 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है और 3,600 से अधिक लोग घायल हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी के अनुसार, इस नए संघर्ष के कारण यमन के भीतर 1.45 लाख से ज्यादा लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। संघर्ष के चलते 3,000 से ज्यादा लोग समुद्र पार कर जिबूती भी पहुंच चुके हैं। ऐसे में ताइज़ की ओर हूतियों की नई बढ़त और सऊदी समर्थित सरकार के जवाबी सैन्य अभियान ने यमन में लंबे समय से चले आ रहे संकट को एक बार फिर गंभीर मोड़ पर ला खड़ा किया है।
सरकारी सेना के लिए तुर्बाह क्यों है अहम?
पिछले कई वर्षों से तुर्बाह में सरकारी सैनिकों की अहम तैनाती रही है। यहां से वे हूतियों के खिलाफ ताइज की रक्षा करते रहे हैं। ऐसे में शहर का हाथ से निकलना सरकारी बलों के लिए रणनीतिक और सैन्य, दोनों लिहाज से बड़ा नुकसान है। इससे पहले हूतियों ने ताइज के बाहरी इलाकों में कई गांवों और क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया था। इन लगातार बढ़तों ने विद्रोहियों के लिए ताइज को चारों तरफ से घेरने का रास्ता खोल दिया है। ताइज यमन का तीसरा सबसे बड़ा शहर है और देश में इसका रणनीतिक महत्व काफी ज्यादा है।
लाल सागर के तट पर भी हूतियों की बड़ी बढ़त
सितंबर की शुरुआत में ईरान समर्थित हूतियों ने लाल सागर के पश्चिमी तट पर तेजी से आगे बढ़ना शुरू किया था। इस अभियान के दौरान उन्होंने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मोखा शहर और लाल सागर के कई द्वीपों पर कब्जा कर लिया। इन इलाकों पर नियंत्रण मिलने के बाद हूतियों का यमन की तरफ से बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य पर नियंत्रण हो गया है।
बाब अल-मंदब पर कब्जा क्यों है इतना अहम?
बाब अल-मंदब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में शामिल है। इस संकरे जलमार्ग से दुनिया के करीब 12 फीसदी वैश्विक व्यापार का आवागमन होता है। इसलिए इस इलाके पर किसी भी सशस्त्र समूह का नियंत्रण क्षेत्रीय संघर्ष के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बन सकता है।
यमन सरकार ने शुरू किया बड़ा सैन्य अभियान
रविवार को जारी बयान में सऊदी समर्थित यमन सरकार ने कहा कि वह सरकार के नियंत्रण वाले इलाकों में सैनिकों की तैनाती और लामबंदी कर रही है। सत्तारूढ़ प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के प्रमुख राशद अल-अलीमी ने टेलीविजन पर दिए भाषण में कहा कि सैन्य अभियान का लक्ष्य हूतियों के कब्जे में बचे इलाकों को वापस लेना है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपनी सरकार को समर्थन देने की अपील भी की।
सऊदी अरब ने दिया हूतियों को सीधा संदेश
अल-अलीमी के एलान के कुछ ही घंटे बाद सऊदी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने यमन सरकार की सेनाओं को पूरा सैन्य सहयोग देने का वादा किया। उन्होंने कहा कि हूतियों के खत्म होने तक सऊदी अरब यमन सरकार की सेनाओं को 'पूरी ऑपरेशनल मदद' देता रहेगा।
मिसाइल और ड्रोन हमलों से भी बढ़ा तनाव
अल-मलिकी ने यह भी कहा कि सऊदी अरब को हूतियों को रोकने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने का अधिकार है। हूती पिछले करीब तीन महीने से सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहे हैं। इन हमलों ने दोनों पक्षों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है।
जुलाई में कैसे फिर भड़की लड़ाई?
ताजा तनाव की शुरुआत जुलाई के मध्य में हुई। उस समय हूतियों ने सऊदी अरब पर यमन की राजधानी सना के हवाई अड्डे पर बमबारी करने का आरोप लगाया था। हूतियों का दावा था कि सऊदी अरब ने एक अनधिकृत ईरानी विमान को उतरने से रोकने के लिए एयरपोर्ट को निशाना बनाया।
जवाब में हूतियों ने सऊदी अरब को बनाया निशाना
इसके बाद हूतियों ने सऊदी अरब और यमन में सरकारी बलों के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए। उन्होंने लाल सागर में सऊदी शिपिंग की नाकेबंदी का भी ऐलान किया और सऊदी अरब से जुड़े कई जहाजों को निशाना बनाया। इसके बाद सितंबर में हूतियों ने अपने अभियान को और तेज कर दिया। उन्होंने लाल सागर के तट से तेजी से आगे बढ़ते हुए कई इलाकों पर कब्जा किया। इसे पिछले कई वर्षों में हूतियों की सबसे बड़ी क्षेत्रीय बढ़त में से एक माना जा रहा है।
तुर्बाह के हाथ से निकलने का ताइज पर असर
वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर के मुताबिक, तुर्बाह पर हूतियों का कब्जा ताइज प्रांत और ताइज शहर में मोर्चे पर तैनात यमन सरकार समर्थक बलों के लिए सैनिकों और हथियारों समेत जरूरी सामान पहुंचाना बेहद मुश्किल कर सकता है। थिंक टैंक ने रविवार को जारी अपने विश्लेषण में कहा कि सप्लाई रोकना सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका असर इससे भी बड़ा है। तुर्बाह के उत्तर में आने-जाने वाली सभी सड़कों पर नियंत्रण होने का मतलब है कि सरकारी बलों के लिए शहर से पीछे हटने का रास्ता भी बंद हो सकता है।
2014 से चल रही है यमन की जंग
यमन का गृहयुद्ध 2014 में शुरू हुआ था, जब हूती विद्रोही अपने उत्तरी गढ़ से आगे बढ़ते हुए राजधानी सना में दाखिल हो गए थे। उन्होंने शहर पर कब्जा कर लिया और यमन की सरकार को देश छोड़कर सऊदी अरब में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। वर्षों से जारी इस युद्ध ने यमन को दुनिया की सबसे गंभीर मानवीय त्रासदियों में से एक के केंद्र में ला दिया है। संघर्ष में अब तक 1.5 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।









