SIR पर EC की सफाई, कहा- सभी फैसले सर्वसम्मति से; विपक्ष के सवालों का दिया जवाब

 नई दिल्ली
विपक्षी दलों द्वारा एसआईआर (SIR) प्रक्रिया पर उठाए जा रहे सवालों के बीच चुनाव आयोग के सूत्रों ने अपना पक्ष साफ किया है. चुनाव आयोग के सूत्रों ने प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहना है कि एसआईआर मतदाता सूची के पुनरीक्षण की एक वैधानिक और स्थापित प्रक्रिया है, जिसे सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक समीक्षा का भी समर्थन प्राप्त है और किसी भी चुनाव आयुक्त ने किसी फैसले पर असहमति दर्ज नहीं की है। 

फर्जी और मृत वोटर हटाना मकसद
सूत्रों के मुताबिक, एसआईआर का प्राथमिक उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह साफ-सुथरा और पारदर्शी बनाना है. इसके तहत मृत, डुप्लीकेट, फर्जी और शिफ्ट हो चुके मतदाताओं की पहचान की जाती है. साथ ही ये सुनिश्चित किया जाता है कि सभी पात्र नागरिक लिस्ट में बने रहें। 

सूत्रों ने साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट ने कभी-भी एसआईआर प्रक्रिया को निलंबित नहीं किया, बल्कि मतदाता घोषणा और मैपिंग प्रक्रिया समेत इसे आगे बढ़ाने की अनुमति दी और मतदाताओं के लिए सुरक्षा उपाय तय किए। 

आयोग ने 11 करोड़ मतदाताओं को दोबारा लिस्ट में शामिल करने की राजनीतिक मांग पर स्पष्टीकरण करते हुए कहा कि इसका सीधा अर्थ उन नामों को फिर से शामिल करना होगा, जिन्हें गहन सत्यापन के दौरान हटाया गया था. लेकिन उनका दोबारा सत्यापन अभी पूरा नहीं हुआ है. नए मतदाताओं और नाम जुड़वाने के इच्छुक लोगों के लिए फॉर्म 6 पूरी तरह उपलब्ध है. सूत्रों के अनुसार फॉर्म 6 में किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है। 

बीएलओ को तीन बार जाने की ट्रेनिंग
सूत्रों ने बताया कि बीएलओ को प्रशिक्षित किया गया है कि वह मतदाताओं के वेरिफिकेशन के लिए कम से कम तीन बार घर-घर जाएं. इसमें घर पर न मिलने वाले या शिफ्ट मतदाताओं का वेरिफिकेशन भी शामिल है. ये प्रक्रिया सालों से चली आ रही है और केवल 1987 के बाद जन्मे लोगों से ही दस्तावेज मांगे गए हैं. सॉफ्टवेयर के जरिए मैपिंग की गलतियों को चिन्हित कर फर्जी और डुप्लीकेट नाम हटाए जा रहे हैं. अगर किसी ने भी एसआईआर फॉर्म पर हस्ताक्षर कर बीएलओ को दिया है तो उसका नाम ड्राफ्ट सूची में जरूर शामिल होगा। 

ERO-AERO ने नहीं की शिकायत
आयोग का कहना है कि मतदाता सूची में नाम
जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया विकेंद्रीकृत है. ये काम EROs और AEROs के स्तर पर होता है, न कि व्यक्तिगत रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा। 

सूत्रों के मुताबिक, देश भर में करीब 25,000 EROs और AEROs में से किसी ने भी इस प्रक्रिया को लेकर शिकायत नहीं की है। 

गोवा में तकनीकी गड़बड़ी के कारण करीब 97 मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए थे. इनमें से 88 के नाम अब जोड़े जा चुके हैं. तीन लोग पुर्तगाली नागरिक हैं, 6 उस वक्त विदेश में थे और बाकी मामलों का सत्यापन किया जा रहा है। 

बेला एस्टेट विवाद पर EC का जवाब
आयोग ने राहुल गांधी द्वारा बेला एस्टेट में 727 मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने के मामले पर सफाई देते हुए सूत्रों ने कहा, बीएलओ अभी-भी नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया में लगे हुए हैं, क्योंकि दिल्ली में SIR की प्रक्रिया अभी जारी है. चुनाव आयोग का तर्क है कि बेला एस्टेट मेजब बीएलओ गए थे तो वहां कोई था नहीं तो फिर किससे पूछते या हस्ताक्षर करवाते?

चुनाव आयोगके सूत्रों के मुताबिक, अगर किसी ने भी SIR का फार्म हस्ताक्षर करके बीएलओ को दिया है तो उसका नाम ड्राफ्ट सूची में पक्का होगा। 

You May Like This

error: Content is protected !!

4th piller को सपोर्ट करने के लिए आप Gpay - 7587428786