हरियाणा बनेगा बड़ा पर्यटन केंद्र, ‘घूमण आओ, हरियाणा देखो’ से बदलेगी टूरिज्म की तस्वीर

चंडीगढ़
 हरियाणा अब केवल देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक जाने का मार्ग नहीं, बल्कि अपने आप में एक आकर्षक पर्यटन गंतव्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

कुरुक्षेत्र में महाभारत और गीता की विरासत, पिंजौर के ऐतिहासिक उद्यान, सूरजकुंड की समृद्ध शिल्प परंपरा, मोरनी की पहाड़ियां, नारनौल-महेंद्रगढ़ की ऐतिहासिक धरोहर और गांवों की हरियाणवी संस्कृति को एक साथ जोड़कर प्रदेश के पर्यटन को नई पहचान देने की तैयारी है।

प्रदेश सरकार का प्रयास है कि हरियाणा से पर्यटक केवल गुजरें नहीं, बल्कि यहां रुकें, घूमें, संस्कृति और विरासत को करीब से जानें तथा ऐसे अनुभव लेकर लौटें कि वे दोबारा यहां आने के लिए लालायित रहें। इसी सोच के साथ प्रदेश सरकार का नया संदेश है ‘घूमण आओ, हरियाणा देखो।’

पर्यटन को होटल और पर्यटन परिसरों तक सीमित रखने के बजाय स्थानीय लोगों, किसानों, शिल्पकारों, गाइड, टैक्सी संचालकों, रेस्तरां और छोटे कारोबारियों से जोड़ने पर जोर है।

पारंपरिक हाईवे टूरिज्म से आगे बढ़कर विरासत, आध्यात्मिक एवं तीर्थ, इको, एडवेंचर, ग्रामीण एवं फार्म टूरिज्म, होमस्टे, गोल्फ और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 20 पर्यटन हब एवं गंतव्य क्षेत्रों की पहचान की गई है।

विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा ने बताया कि हरियाणा पर्यटन निगम के पास 42 पर्यटन परिसरों का नेटवर्क है। 42 रेस्टोरेंट, पांच फास्ट फूड सेंटर और 15 पेट्रोल पंप संचालित किए जा रहे हैं।

पर्यटकों तक सीधी पहुंच बनाने के लिए शहीद भगत सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा मोहाली के आगमन टर्मिनल पर पर्यटक सूचना एवं सुविधा केंद्र शुरू किया गया है। यहां पर्यटकों को हरियाणा के पर्यटन एवं विरासत स्थलों, आध्यात्मिक केंद्रों, पर्यटन सर्किट, होटल-रिसॉर्ट, मेलों और उत्सवों तथा बुकिंग से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

एआई आधारित ‘सरस्वती’ डिजिटल गाइड से पर्यटन को तकनीक का साथ
पर्यटन क्षेत्र में आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए एआई आधारित ‘सरस्वती’ डिजिटल गाइड को पर्यटन से जोड़ा गया है। कुरुक्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए ज्योतिसर में महाभारत अनुभव केंद्र और विराट स्वरूप लाइट एंड साउंड शो तैयार किया गया है।

सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला को वर्षभर सक्रिय सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। मेला परिसर में विवाह एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने तथा सितंबर से दिसंबर के बीच अतिरिक्त मेले के आयोजन का प्रस्ताव है।

गांव और खेत बनेंगे पर्यटन के नए केंद्र
ग्रामीण और फार्म टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए 38 फार्म टूरिज्म डेस्टिनेशन और 11 होमस्टे पंजीकृत हैं। इनके माध्यम से पर्यटकों को गांव का जीवन, खेती-किसानी, स्थानीय खान-पान, लोक संस्कृति और हरियाणवी मेहमान नवाजी का अनुभव उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।

हथिनीकुंड बैराज, टिक्कर ताल और रोहतक की तिल्यार झील को एडवेंचर स्पोर्ट्स हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां वाटर स्पोर्ट्स, बोटिंग, बनाना बोट, जेट स्कीइंग और कैंपिंग जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। ढोसी की पहाड़ियों पर रोपवे का निर्माण भी प्रगति पर है।

मेले और उत्सव बनाएंगे वर्षभर पर्यटन का माहौल
पर्यटन को किसी एक मौसम या आयोजन तक सीमित न रखकर पूरे वर्ष सक्रिय रखने के लिए विभिन्न मेलों और उत्सवों को पर्यटन कैलेंडर से जोड़ा जा रहा है। इनमें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला, बैसाखी उत्सव, पिंजौर आम मेला, तीज उत्सव, सूरजकुंड दीपावली मेला, भक्ति-सूफी उत्सव, अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव, हरियाणवी संस्कृति उत्सव और खाद्य उत्सव शामिल हैं।

 

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