अंबाला.
लालकुर्ती में सोमवार सुबह बेसहारा सांड ने स्कूल जा रही 10वीं कक्षा की छात्रा खुशी पर सोमवार सुबह करीब 7:15 बजे हमला कर दिया। जानकारी के अनुसार छावनी के खालसा स्कूल-टू में 10वीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा रोज की तरह स्कूल जा रही थी। वह बैग लेकर सड़क से गुजर रही थी, तभी सड़क किनारे खड़े सांड ने उस पर हमला कर दिया।
पहली बार छात्रा किसी तरह बच गई। इससे पहले छात्रा कुछ समझ पाती सांड ने दोबारा पीछे से हमला कर उसे सींगों से करीब छह से सात फीट तक उठाकर सड़क पर पटक दिया। छात्रा माथे के बल वहां बने डिवाइडर पर गिरते ही बेसुध हो गई। उसे राहगीरों ने उठाया और छावनी नागरिक अस्पताल में भर्ती करवाया। छात्रा को पटकने के बाद सांड वहां से भाग गया। उपचार के दौरान उसके माथे पर आठ टांके लगाए गए। स्वजन के अनुसार चोट के कारण उसकी एक आंख पूरी तरह बंद हो गई थी और आंखों के आसपास काफी सूजन थी। हाथ-पैरों पर भी घसीट के निशान आए हैं। माथे पर सबसे ज्यादा चोट लगी है। उपचार के बाद दोपहर करीब एक बजे छात्रा को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। पूरी घटना पास लगे सीसीटीवी में कैद हो गई।
इकलौती संतान, घटना के बाद परिवार सहमा
घायल छात्रा पिता धर्मेंद्र यादव की इकलौती संतान है। परिवार दूध बेचकर गुजर-बसर करता है। मां ऊषा गृहिणी हैं। इस हमले के बाद पूरा परिवार सहमा हुआ है। स्थानीय लोगों ने बताया कि कैंटोनमेंट बोर्ड क्षेत्र में घूमने वाला यह सांड पहले भी लोगों पर हमला कर चुका है। लोगों के अनुसार कुछ समय पहले एक बुजुर्ग को भी सांड ने टक्कर मारी थी। क्षेत्र में बेसहारा पशुओं के झुंड घूमते रहते हैं।
पूरे दिन प्रशासन के लिए चुनौती बना रहा सांड
10वीं कक्षा की छात्रा को सींगों पर उठाकर सड़क पर पटकने वाला सांड सोमवार को पूरे दिन प्रशासन के लिए चुनौती बना रहा। सुबह करीब 7:15 बजे लालकुर्ती में हमला करने के बाद भी सांड रात नौ बजे तक पकड़ा नहीं जा सका। समाचार लिखे जाने तक वह एक स्कूल के पास ही बैठा था। यानी जिस सांड ने सुबह एक बच्ची को अस्पताल पहुंचा दिया, उसके घंटों बाद भी उसके अगले हमले का खतरा लोगों के सिर पर मंडराता रहा।
सांड को रखा कहां जाए… यक्ष सवाल, नहीं कोई बाड़ा
हैरानी की बात यह है कि इस सांड को पकड़ने के बाद रखने के लिए कहीं कोई व्यवस्था नहीं है। यदि इसे कोई पकड़ भी ले तो इसे ऐसे ही कहीं छोड़ा भी नहीं जा सकता क्योंकि यदि छोड़ा गया तो यह वहां भी ऐसा ही आतंक मचाएगा। हैरानी यह कि सांड को पकड़ने के लिए जिम्मेदारी तय करने से लेकर उसे सुरक्षित रखने तक की व्यवस्था स्पष्ट नहीं हो सकी। कैंटोनमेंट बोर्ड के सीईओ ने शहर की वंदेमातरम् दल को सांड पकड़ने का अनुरोध किया। टीम ने सहयोग की हामी भरने से पहले सुरक्षा व्यवस्था स्पष्ट करने को कहा। इसके लिए उस समय यातायात रोकने, सांड पकड़े जाने के बाद उसे रखने की जगह और उसके उपचार की व्यवस्था तय करने की बात उठाई गई। उधर नगर परिषद के किसी अधिकारी ने कहीं पत्राचार तक नहीं किया।
पशुपालन विभाग से लेकर स्थानीय निकायों तक सवाल
बेसहारा पशुओं की समस्या केवल कैंटोनमेंट बोर्ड या नपा तक सीमित नहीं है। जिले के नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिकाओं के स्तर पर भी बेसहारा पशुओं को पकड़ने की व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए टेंडर दिया जाना चाहिए लेकिन अफसरों की सुस्ती के कारण ऐसा नहीं हो पा रहा। सवाल यह है कि सड़क पर घूम रहे बेसहारा पशुओं, खासकर लोगों पर हमला कर चुके आक्रामक सांडों को पकड़ने के लिए प्रशासन के पास तत्काल कार्रवाई की स्थायी व्यवस्था आखिर है कहां।
इस तरह कई मामले पहले आए सामने
- -बराड़ा में लगभग 2019 में आवारा पशुओं के हमलों से कई लोग घायल हो गये थे। एक युवक को आवारा बैल ने टक्कर मारकर घायल किया था।
- -24 जुलाई 2025: अंबाला में सड़क पर आए बेसहारा गोवंश के कारण कार हादसे में चार लोग घायल हुए थे।
- -दिसंबर 2025: अंबाला में बेसहारा गोवंश ने एक महिला पर सीधे हमला किया, महिला ने भागकर जान बचाई।









