JPSC-JSSC विवाद: झारखंड हाईकोर्ट ने परीक्षा-नियुक्ति रद्द करने के फैसले पर लगाई अंतरिम रोक

 रांची
झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं व नियुक्तियों को लेकर चल रहे विवाद के बीच हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद सियासी और छात्र आंदोलन से जुड़ी हलचल तेज हो गई है। अदालत ने राज्य सरकार की ओर से परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद करने के फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है। इससे नियुक्ति रद होने की आशंका से परेशान अभ्यर्थियों को राहत मिली है।

मामले की जांच CID कर रही है। जांच एजेंसी ने अब तक 37 संदिग्धों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए तलब किया है। ऐसे में जांच को लेकर भी आने वाले दिनों में कार्रवाई तेज होने की संभावना है।

सरकार ने CID जांच का दिया हवाला
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि पूरे मामले की जांच CID कर रही है और जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही है। सरकार ने अदालत से कहा कि जांच एजेंसी लगातार कार्रवाई कर रही है, इसलिए फिलहाल सरकार के परीक्षा रद करने संबंधी फैसले में हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए।

सरकार की ओर से यह भी दलील दी गई कि जांच पूरी होने तक अदालत को कोई ऐसा आदेश नहीं देना चाहिए, जिससे जांच की प्रक्रिया प्रभावित हो।

सरकार और याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले का विस्तार से परीक्षण किया। इसके बाद अदालत ने परीक्षा और नियुक्तियों को रद्द करने संबंधी सरकार के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी।

अदालत के इस आदेश के बाद फिलहाल स्थिति यथावत बनी रहेगी। इससे उन अभ्यर्थियों को राहत मिली है, जिनके भविष्य पर परीक्षा और नियुक्ति रद्द होने के फैसले के बाद अनिश्चितता बनी हुई थी।

हाई कोर्ट के फैसले के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने उठाए सवाल
हाईकोर्ट के आदेश के बाद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि वह अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं और उन्हें भरोसा है कि हाईकोर्ट छात्रों के हित में न्याय करेगा।

उन्होंने सरकार की ओर से अदालत में पैरवी को लेकर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब हाईकोर्ट ने सरकार को अपना पक्ष रखने का मौका दिया था, तो एडवोकेट जनरल कोर्ट क्यों नहीं पहुंचे? उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सरकार की ओर से पेश वकील ने CID जांच से जुड़ी रिपोर्ट को अदालत के सामने ठीक तरीके से क्यों नहीं रखा।

देवेंद्र महतो ने आरोप लगाया कि इससे ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार मामले को दबाना चाहती है। उन्होंने कहा कि अगर मामले को दबाने या छात्रों के साथ धोखा करने की कोशिश की गई तो छात्रों का शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेपर लीक और परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों की लड़ाई जारी रहेगी और किसी भी तरह का धोखा स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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