भोपाल
औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग तथा मध्यप्रदेश इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीआईडीसी) द्वारा कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में बिल्डिंग बिजनेस-रेडी डिस्ट्रिक्ट्स : मध्यप्रदेश की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधार यात्रा एवं राज्य तथा जिलों के लिए रोडमैप विषय पर उच्च स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, जिला प्रशासन, उद्योग जगत, औद्योगिक संगठनों और उद्यमियों ने सहभागिता की। कार्यशाला का उद्देश्य राज्य में चल रहे सुधारों को जिला स्तर तक प्रभावी रूप से पहुंचाकर निवेशकों और उद्यमियों को सरल, समयबद्ध, पारदर्शी और बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना रहा।
कार्यशाला में मध्यप्रदेश की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधार यात्रा की समीक्षा के साथ सुधारों के अगले चरण और उनके जमीनी क्रियान्वयन पर विचार-विमर्श हुआ। डिस्ट्रिक्ट बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान (डी-बीआरएपी), बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान (बीआरएपी) तथा मध्यप्रदेश के ईज ऑफ डूइंग बिजनेस ढांचे पर प्रस्तुतियों के बाद दो संवाद सत्र आयोजित किए गए। इनमें शासन और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने सुधारों के व्यावहारिक क्रियान्वयन, सामने आ रही चुनौतियों और उद्योगों की अपेक्षाओं पर चर्चा की।
डी-बीआरएपी सत्र में जिला स्तर पर विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय, समयबद्ध अनुमतियां, डिजिटल सेवा प्रदायगी, उत्तरदायी प्रशासन और प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया। वहीं बीआरएपी सत्र में मध्यप्रदेश की अब तक की सुधार यात्रा और सुधारों के निरंतर क्रियान्वयन, संस्थागत जिम्मेदारी तथा परिणाम आधारित व्यवस्था के महत्व पर चर्चा हुई।
संचालक एमपीआईडीसी श्री आदर्श नायक ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026 की जानकारी देते हुए कहा कि इसका उद्देश्य प्रदेश में अधिक पारदर्शी, सरल, पूर्वानुमेय और निवेशक अनुकूल नियामकीय व्यवस्था विकसित करना है। उन्होंने नियामकीय प्रक्रियाओं के सरलीकरण, समयबद्ध सेवाओं, अनुपालनों का बोझ कम करने और निवेशकों की सुविधा के लिए आधुनिक व्यवस्था विकसित करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।
पहले संवाद सत्र में जिला स्तर पर निवेशक सुविधाओं को मजबूत करने पर हुई चर्चा
पहले संवाद सत्र बिल्डिंग बिजनेस-रेडी डिस्ट्रिक्ट्स : स्ट्रेंथनिंग डिस्ट्रिक्ट-लेवल सर्विस डिलीवरी फॉर इन्वेस्टर्स में जिला प्रशासन की भूमिका और राज्य स्तर के सुधारों को जमीन पर प्रभावी परिणामों में बदलने पर चर्चा हुई। इसमें विभागों के बीच समन्वय, अनुमोदन की समय-सीमा, शिकायत निवारण, डिजिटल सेवाओं और डी-बीआरएपी के प्रभावी क्रियान्वयन पर विचार किया गया।
उद्योग प्रतिनिधियों ने युवा उद्यमियों और उद्यमों की बदलती जरूरतों का उल्लेख करते हुए सुलभ सब्सिडी, पर्याप्त औद्योगिक भूमि और अधोसंरचना, कौशल के अनुरूप मानव संसाधन, समयबद्ध अनुमोदन तथा शासन के साथ सहज डिजिटल संवाद की आवश्यकता बताई। स्थानीय उपकरों में समन्वय, किफायती औद्योगिक भूमि और पार्टनरशिप फर्मों के लिए प्रक्रियाओं के सरलीकरण के सुझाव भी दिए गए।
संवाद सत्र में औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन तथा एमएसएमई सचिव श्री जॉन किंग्सली, भोपाल कलेक्टर श्री प्रियंक मिश्रा, बायोन्यूट्रिएंट्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध संचालक एवं पीएचडीसीसीआई मध्यप्रदेश के सह-अध्यक्ष श्री सुमित अग्रवाल, श्री बालाजी पैकिंग इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष एवं मंडीदीप इंडस्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री विकास मुंदड़ा तथा डीआईसीसीआई मध्यप्रदेश चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. अनिल सिरवैया शामिल हुए। संवाद का संचालन डेलॉइट के पार्टनर श्री निशांत जैन ने किया।
शासन और उद्योग की साझेदारी से सुधारों को मिलेगी गति
दूसरे संवाद सत्र कोलैबोरेटिव गवर्नेंस फॉर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस : गवर्नमेंट, इंडस्ट्री एंड इन्वेस्टर्स एज पार्टनर्स में शासन और उद्योग के बीच साझेदारी को और मजबूत बनाने पर चर्चा हुई। नियामकीय बाधाओं की पहचान, निवेशकों के अनुभव को बेहतर बनाने तथा भविष्य के सुधारों को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर विचार साझा किए गए।
चर्चा में नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास, गुणवत्तापूर्ण औद्योगिक अधोसंरचना, श्रमिकों के लिए भरोसेमंद परिवहन व्यवस्था तथा महिला श्रमिकों के लिए आवश्यक सुविधाओं पर जोर दिया गया। सार्वजनिक-निजी भागीदारी के अधिक उपयोग, स्टार्टअप और एमएसएमई को बेहतर सहयोग, वित्त एवं बाजार तक आसान पहुंच तथा युवा और उभरते उद्यमियों के लिए प्रभावी मार्गदर्शन और सहयोग की आवश्यकता भी सामने आई।
संवाद में एमपीआईडीसी के प्रबंध संचालक श्री चंद्रमौली शुक्ला, दौलतराम-वाईटीसी इंजीनियरिंग सर्विसेज लिमिटेड के प्रबंध संचालक श्री सी.पी. शर्मा, नोबल कॉरुगेटर्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध संचालक श्री मनोज मोदी, खद्योत नेचुरल्स प्राइवेट लिमिटेड की संस्थापक निदेशक एवं पीएचडीसीसीआई मध्यप्रदेश चैप्टर की सदस्य श्रीमती अलका शर्मा तथा फिक्की-सीएमएसएमई के अध्यक्ष श्री प्रदीप करम्बेलकर शामिल हुए। संवाद का संचालन सीआईआई मध्यप्रदेश के अध्यक्ष डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने किया।
जिला उद्योग केन्द्रों की भूमिका को और मजबूत करने पर जोर
औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन तथा एमएसएमई सचिव श्री जॉन किंग्सली ने जिला उद्योग केन्द्रों को शासन के सुधारों और उद्यमियों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए उनकी सुविधा प्रदान करने की भूमिका को और मजबूत करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने निवेशकों और उद्यमियों को प्रभावी मार्गदर्शन देने तथा स्टार्टअप और उभरते उद्यमों के लिए मजबूत सहयोग तंत्र विकसित करने पर जोर दिया।
एमपीआईडीसी के प्रबंध संचालक श्री चंद्रमौली शुक्ला ने कहा कि जन विश्वास, अपराधमुक्तिकरण, विनियमन में कमी और अनुपालनों के सरलीकरण मध्यप्रदेश की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधार यात्रा के महत्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने कहा कि रिफॉर्म महोत्सव नागरिकों और उद्योग जगत से सीधे संवाद का महत्वपूर्ण मंच है। इसके माध्यम से सुझावों और समस्याओं को समझकर उन्हें ठोस सुधारों में बदला जा रहा है। उन्होंने उद्योगों के लिए सेवा प्रदायगी, निवेशक सुविधा और उत्तरदायी प्रशासन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को अग्रणी राज्य बनाने के लक्ष्य को दोहराया।
कार्यशाला में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि सुधार केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं हैं। उनका प्रभावी क्रियान्वयन, संस्थागत जिम्मेदारी और उद्योग तथा नागरिकों से लगातार मिलने वाला फीडबैक ही सुधारों को वास्तविक परिणामों में बदलता है। जिला स्तर की संस्थाओं को मजबूत करने और शासन तथा उद्योग के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से मध्यप्रदेश व्यवसाय अनुकूल जिलों के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इससे निवेशकों और उद्यमियों को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध, सरल और भरोसेमंद सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ प्रदेश के कारोबारी वातावरण को और प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलेगी।







