FCRA बिल पर NDA क्यों दिखा रहा नरमी? लोकसभा-राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत से कितनी दूर है सरकार

नई दिल्ली

संसद का मॉनसून सत्र अब महज चार दिनों में खत्म होने वाला है। हालांकि महिला आरक्षण, परिसीमन और FCRA जैसे अहम बिलों को लेकर अब भी अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। इनमें से कोई भी विधेयक सोमवार को लोकसभा की कार्यसूची में शामिल नहीं है। अब खबर है कि सरकार इन महत्वपूर्ण विधेयकों को लेकर फूंक -फूंक कर कदम रख रही है। समझते हैं कि इस वक्त संसद में सीटों का गणित क्या कहता है।

बता दें कि कांग्रेस और उसके ज्यादातर सहयोगियों ने भले ही परिसीमन और FCRA संशोधन बिल का विरोध करने की बात कही है, लेकिन बीते कुछ दिनों में सरकार की ओर से संपर्क साधे जाने के बाद कुछ विपक्षी दलों ने इन विधेयकों को लेकर अपने रुख में नरमी के भी संकेत दिए हैं। अब माना जा रहा है कि केंद्र सरकार परिसीमन बिल और महिला आरक्षण को लागू करने के लिए DMK और NCP (शरदचंद्र पवार) का समर्थन जुटाने के उद्देश्य से FCRA विधेयक पर अपने कदम धीमे कर रही है।

FCRA बिल फिलहाल होल्ड पर?
जानकारी के मुताबिक संसद की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक में मॉनसून सत्र के बचे हुए चार दिनों के एजेंडे को अंतिम रूप दिया जाना है। हालांकि सोमवार के शुरुआती एजेंडे में चार नए विधेयक पेश करने की बात तो कही गई है, लेकिन FCRA संशोधन विधेयक का कहीं जिक्र नहीं है। ऐसे में यह संकेत हैं कि FCRA में संशोधन को लेकर जारी हंगामे के बीच सरकार फिलहाल इसे होल्ड पर रख सकती है।

द्रमुक ने किया है विरोध
इससे पहले विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम यानी FCRA को लेकर द्रमुक अपनी स्थिति साफ कर चुकी है। DMK नेता उदयनिधि स्टालिन ने पिछले सप्ताह एक इंटरव्यू कहा था कि उनकी पार्टी ने न तो अतीत में परिसीमन विधेयक का समर्थन किया है और न ही भविष्य में करेगी। दूसरी तरफ डीएमके प्रमुख एम के स्टालिन ने भी अलग अलग चर्च के प्रतिनिधिमंडलों की उस मांग का खुलकर समर्थन किया है, जिसमें गृह मंत्री अमित शाह से विधेयक को वापस लेने या समीक्षा के लिए संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने की अपील की गई थी।

कई धीमी पड़ी सरकार?
भाजपा के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ NDA के लिए स्थिति फिलहाल पेचीदा है। सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण कानून को लागू कराने के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश में जिसके लिए DMK और NCP(SP) का साथ जरूरी है। हालांकि DMK और सुप्रिया सुले की अगुवाई वाली एनसीपी (एसपी) दोनों ही FCRA बिल के सख्त प्रावधानों के खिलाफ रही हैं। ऐसे में परिसीमन के मुद्दे पर इन पार्टियों को साथ लाने के लिए सरकार FCRA बिल को लेकर नरमी बरत रही है।

सीटों का क्या गणित?
अगर लोकसभा के सभी 540 मौजूदा सांसद वोट डालते हैं तो परिसीमन विधेयक को पास कराने के लिए 360 वोट चाहिए होंगे। फिलहाल एनडीए के पास 319 सांसदों का समर्थन है। इसमें तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसद और शिवसेना (यूबीटी) से शिवसेना में आए 6 सांसद भी शामिल हैं। इसके अलावा एनडीए को YSR कांग्रेस के सांसदों समेत पांच और सांसदों के समर्थन का भी भरोसा है। YSR कांग्रेस ने अप्रैल में भी विधेयक के पक्ष में मतदान किया था।

अब अगर डीएमके सरकार के साथ आकर परिसीमन विधेयक के पक्ष में वोट करती है, तो एनडीए का आंकड़ा 346 तक पहुंच जाएगा। ऐसे में बहुमत के लिए उसे सिर्फ 14 और वोट चाहिए होंगे। वहीं, अगर डीएमके मतदान से वॉकआउट करती है, तो कुल मतदान करने वाले सांसदों की संख्या 518 रह जाएगी। ऐसे में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 345 होगा। ऐसी स्थिति में एनडीए को 21 और सांसदों का समर्थन जुटाना पड़ेगा।

वहीं राज्यसभा की बात करें तो एनडीए के पास फिलहाल 154 सांसद हैं। एनडीए को YSR कांग्रेस के चार सांसदों का समर्थन मिलने की उम्मीद है। इस तरह राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए एनडीए को सिर्फ छह और वोटों की जरूरत होगी।

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