₹1.81 करोड़ गबन मामले में पंजाब हाई कोर्ट सख्त, विजिलेंस से मांगी स्टेटस रिपोर्ट

चंडीगढ़.

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग के अधिकारियों के खिलाफ दिसंबर 2024 में फिरोजपुर में दर्ज एफआईआर की जांच को लेकर पंजाब विजिलेंस ब्यूरो से स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने पारित किया।

खंडपीठ गांव मंडौली, जिला पटियाला के पूर्व सरपंच इकबाल सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में एफआईआर की आगे की जांच पंजाब विजिलेंस ब्यूरो से केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने के निर्देश देने की मांग की गई है।याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया कि मामले के मुख्य आरोपित अरुण शर्मा का नाम एफआईआर दर्ज होने के लगभग 18 महीने तक शामिल नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद ही अब उन्हें आरोपित बनाया गया है। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि उस समय फिरोजपुर में अतिरिक्त उपायुक्त (विकास) के पद पर तैनात रहे अरुण शर्मा अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर जांच को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं।

अदालत में गलत बयान देने का आरोप
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अरुण शर्मा ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, फिरोजपुर की अदालत से अंतरिम राहत प्राप्त करने के लिए यह गलत बयान दिया कि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत कोई स्वीकृति नहीं दी गई है। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि जब तक एफआईआर की आगे की जांच सीबीआई को नहीं सौंपी जाती, तब तक वास्तविक दोषियों को कानून के कठघरे तक नहीं लाया जा सकेगा।

वर्तमान स्थिति जानने के लिए मांगी रिपोर्ट
याचिका के अनुसार इस मामले में अरुण शर्मा ने अपनी अधीनस्थ डाटा एंट्री ऑपरेटर जसप्रीत कौर के साथ कथित मिलीभगत कर 1.81 करोड़ रुपये के सरकारी धन का गबन किया। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पंजाब विजिलेंस ब्यूरो को मामले की जांच की वर्तमान स्थिति से अवगत कराने के लिए विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई पर अदालत इस रिपोर्ट और याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए आरोपों पर विचार करेगी।

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