चंडीगढ़
तीन महीने पहले चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड में 116 करोड़ में चीफ फाइनेंस ऑफिसर (सीएफओ) ने 50 लाख रुपये रिश्वत ली थी। यह राज एक क्यूआर कोड से खुला है, जिसका सीबीआई ने चार्जशीट में जिक्र किया है।
सीबीआई इस मामले में स्मार्ट सिटी की सीएफओ नलिनी मलिक समेत सात आरोपितों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। चार्जशीट के मुताबिक नलिनी ने आईडीएफसी बैंक के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर सरकारी फंड में गबन किया।
बैंक अधिकारियों का इस गबन में साथ देने के लिए मोटी रिश्वत ली थी। बैंक के पूर्व मैनेजर रिभव ऋषि ने तो 50 लाख रुपये नकद नलिनी मलिक के घर भी भिजवाए थे। हालांकि रिश्वत की यही रकम नलिनी के लिए अब बड़ी मुसीबत बन चुकी है।
सीबीआई ने एक छोटे से क्यूआर कोड की मदद से नलिनी की इस घोटाले में भूमिका का पर्दाफाश कर दिया है। दरअसल, सीबीआई ने दो युवकों राहुल और अमृतपाल सिंह के बयान दर्ज किए हैं, जो पूर्व बैंक मैनेजर रिभव के लिए कैश ईधर से उधर सप्लाई करने का काम करते थे।
अमृतपाल सिंह ने रिभव के कहने पर आठ दिसंबर 2025 को नलिनी के सेक्टर-104 मोहाली स्थित एक सोसायटी के फ्लैट पर 50 लाख रुपये पहुंचाए थे। इस सोसायटी में एंट्री के लिए अमृतपाल ने जो गेट पास इस्तेमाल किया था, उसका क्यूआर कोड खुद नलिनी ने ही भेजा था। सीबीआइ को दोनों के बीच हुई फोन काल और चैट का रिकाॅर्ड भी मिल गया है।
सावन ज्वेलर से उठाए 50 लाख भेजे नलिनी के घर
चार्जशीट के मुताबिक पूर्व बैंक मैनेजर रिभव ऋषि ने अपने कर्मचारी अमृतपाल सिंह के जरिए सेक्टर-35 स्थित सावन ज्वेलर्स से 50 लाख रुपये कैश लिया। रिभव ने अमृतपाल को यह रकम नलिनी मलिक के फ्लैट पर देने के लिए भेजा।
नलिनी ने सोसायटी में एंट्री के लिए पहले राहुल को क्यूआर कोड भेजा क्योंकि वह पहले उसके फ्लैट पर आ चुका था। राहुल ने यही क्यूआर कोड अमृतपाल के नंबर पर वाट्सएप कर दिया।
आठ दिसंबर 2025 को शाम 4.41 बजे उसी क्यूआर कोड से अमृतपाल ने नलिनी के फ्लैट में एंट्री की। अमृतपाल ने भी सीबीआई को बयान दिया है कि वही इस रकम को नलिनी के घर देकर आया था। उसने उसके सामने ही रकम गिनी भी थी।
नलिनी और रिभव के बीच हुई 55 फोन काॅल
31 मई 2024 से 8 दिसंबर 2025 के बीच नलिनी और रिभव के बीच 55 बार फोन पर बात हुई। सीबीआई के पास इन दोनों की काॅल डिटेल का रिकाॅर्ड है। सीबीआई के मुताबिक नलिनी को पता था कि फर्जी एफडी के जरिए सरकारी फंड में करोड़ों का गबन चल रहा था।
नलिनी के मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी स्मार्ट सिटी के बैंक खातों से जुड़े थे और सरकारी फंड से जो भी पैसा निकल रहा था उसके अलर्ट नलिनी के फोन पर आ रहे थे। फिर भी वह चुप रही, बाद में पता चला कि वह खुद इस घोटाले का हिस्सा थीं जिसके बदले उसने माेटी रकम वसूल की।
यह है मामला
केस के मुताबिक स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के करोड़ों रुपये आईडीएफसी बैंक की सेक्टर-32 स्थित ब्रांच में एफडी के रूप में जमा थे। आरोप है कि स्मार्ट सिटी लिमिटेड के कुछ अधिकारियों और बैंक कर्मियों ने मिलकर एफडी में पड़े 116 करोड़ रुपये जाली दस्तावेजों के जरिए निकालकर फर्जी कंपनियों में ट्रांसफर कर दिए।
फिर इस रकम को रियल एस्टेट कंपनियों और शहर के कुछ ज्वैलर्स के पास निवेश कर दिया। बाद में आरोपितों ने इस रकम को आपस में बांट लिया। यह घोटाला किसी की नजर में न आए इसके लिए स्मार्ट सिटी लिमिटेड के नाम पर फर्जी बैंक खाता और एफडी के जाली कागजात तैयार किए गए।









