मनरेगा का नया स्वरूप: अब ‘जी-राम-जी’ योजना के नाम से जाना जाएगा ग्रामीण रोजगार मिशन

अररिया
ग्रामीण रोजगार की सबसे बड़ी योजना मनरेगा (MGNREGA) अब पूरी तरह से नए स्वरूप में नजर आने वाली है। वर्ष 2005 में 'नरेगा' के रूप में शुरू हुई और 2010 में 'मनरेगा' बनी इस योजना का नाम अब केंद्र सरकार ने बदल दिया है। वर्ष 2026 से इसे 'जी राम जी' (G-RAM-JI) यानी 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण' के नाम से जाना जाएगा।

तकनीकी दिक्कतों के कारण टली थी योजना, अब 1 जुलाई से होगी लागू
विभागीय जानकारी के अनुसार, इस नई योजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत से ही लागू किया जाना था। हालांकि, पोर्टल और तकनीकी तैयारियां पूरी न होने के कारण इसे कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया था। अब विभाग ने इसे आगामी 1 जुलाई से पूरी तरह लागू करने का सख्त निर्देश जारी किया है।

पुराना मनरेगा कानून होगा समाप्त, नए जॉब कार्ड बनने तक पुराने रहेंगे मान्य
इस संबंध में जानकारी देते हुए मनरेगा पीओ अफरोज अहमद ने बताया कि नई व्यवस्था लागू होते ही पुराना मनरेगा कानून समाप्त हो जाएगा। पुरानी सभी योजनाएं इसमें समाहित कर ली जाएंगी। राहत की बात यह है कि जब तक मजदूरों के नए जॉब कार्ड नहीं बन जाते, तब तक उनके पुराने जॉब कार्ड ही मान्य रहेंगे।

सिर्फ मजदूरी नहीं, अब गांवों का इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करेगी सरकार
अधिकारियों के मुताबिक, 'जी राम जी' योजना सिर्फ मजदूरी आधारित नहीं होगी, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाला एक व्यापक मिशन बनेगी। इसमें मिट्टी भराई जैसे पारंपरिक कार्यों के बजाय जल संरक्षण, खेत, सड़क, पुलिया, स्कूल भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, बाढ़ सुरक्षा और सिंचाई जैसे ढांचागत (Infrastructure) कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।

100 के बदले मिलेंगे 125 दिन काम, 3 दिन के भीतर खाते में आएगा पैसा
इस नई योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब ग्रामीणों को साल में 100 दिन के बदले 125 दिनों के रोजगार की गारंटी मिलेगी। यही नहीं, मजदूरी का भुगतान महज तीन दिनों के भीतर डीबीटी (DBT) के माध्यम से सीधे बैंक खाते में कर दिया जाएगा। भुगतान में देरी होने पर मजदूरों को मुआवजा देने का भी नियम बनाया गया है

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के तहत हर हफ्ते वेतन का प्रविधान
वर्तमान में चल रही मनरेगा योजना में मजदूरों को ₹252 की दिहाड़ी मिलती है। केंद्र सरकार की इस नई योजना का मुख्य उद्देश्य देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को 'विकसित भारत वर्ष 2047' के लक्ष्य के अनुरूप तैयार करना है। इसके तहत मजदूरों का वेतन भुगतान हर सप्ताह करने का भी प्रविधान है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर होगी।

 

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