बरेली में मोहर्रम के लिए सख्ती, 12 फीट से ऊंचा ताजिया निकालने पर रोक

लखनऊ
मोहर्रम के दौरान इस बार 12 फीट से अधिक ऊंचाई का कोई भी ताजिया नहीं निकलेगा। इसकी निगरानी के लिए यूपी के बरेली में पुलिस फास्ट हो गई है। पुलिसकर्मी गांव-गांव जाकर ताजियों की ऊंचाई नाप रहे हैं और ताजियादारों से संपर्क कर नियमों का पालन करने की अपील कर रहे हैं।

पुलिस के अनुसार मोहर्रम में जिले भर में 1033 ताजिया निकाले जाएंगे। इनमें सबसे अधिक 93 ताजिया नवाबगंज क्षेत्र में निकलेंगे। इसके बाद बहेड़ी में 81, हाफिजगंज में 79, भोजीपुरा व सीबीगंज में 60-60, शाही में 55, फतेहगंज पश्चिमी में 50, शेरगढ़ में 49, देवरनिया में 48, शीशगढ़ में 47, इज्जतनगर में 39, बारादरी में 36, किला व आंवला में 30-30 ताजिया निकाले जाएंगे।

सिरौली में 28, क्योलड़िया, मीरगंज व भमोरा में 26-26, कैंट में 25, बिथरी में 24, अलीगंज में 23, भुता में 20, फतेहगंज पूर्व में 19, फरीदपुर में 17, प्रेमनगर में 10 और कोतवाली में तीन ताजिया निकलेंगे। एसएसपी ने इन सभी ताजियों की जांच और निगरानी के लिए एक-एक सिपाही को नोडल अधिकारी नामित किया है। संबंधित थाना प्रभारी इन पुलिसकर्मियों के साथ क्षेत्र में पहुंचकर ताजियों की ऊंचाई का सत्यापन कर रहे हैं। इसके पीछे कारण केवल इतना है कि कोई हादसा न हो।

माहर्रम से पहले तैयारी पूरी करने के निर्देश
एसएसपी ने त्योहार को सकुशल संपन्न कराने के लिए मोहर्रम से पहले सारी तैयारी पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इनमें पीस कमेटी की मीटिंग, पुराने विवाद की समीक्षा, रूट का निरीक्षण, फोर्स की तैनाती समेत कई बिंदु शामिल हैं। सभी थाना प्रभारियों के साथ ही सीओ को भी रूट का भ्रमण करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही निर्धारित प्रारूप में ताजियादार, गांव समेत अन्य सारी जानकारियां दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

पिछले साल 23 फीट के ताजिया में लगी थी आग
अधिकारियों का कहना है कि ताजियों की अधिक ऊंचाई होने पर बिजली लाइनों और अन्य अवरोधों से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इसी वजह से 12 फीट की अधिकतम सीमा निर्धारित की गई है। पिछले साल फरीदपुर में गौसगंज के पास 23 फीट का ताजिया निकाला गया था, जो हाइटेंशन लाइन से टकरा गया और उसमें आग लग गई। इस मामले में ताजियादारों पर रिपोर्ट हुई थी और पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई थी।

आज नजर आएगा मुहर्रम का चांद
बरेली। मुहर्रम का चांद मंगलवार शाम को देखा जाएगा। चांद के दीदार के साथ से इस्लामी साल की शुरुआत होगी। यौमे आशूरा (10 मुहर्रम) को मनाया जाएगा। दरगाह आला हजरत के मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना है। माहे मुहर्रम का चांद 16 जून की शाम को देखा जाएगा। चांद नजर आने के बाद आगाज होगा। दरगाह आला हजरत के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां ने कहा कि मुहर्रम मुसलमानों को सब्र और इंसानियत की सीख देता है।

एसएसपी अनुराग आर्य के अनुसार मोहर्रम को शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न कराने के लिए सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सभी ताजियों की ऊंचाई निर्धारित मानक के अनुरूप सुनिश्चित कराई जा रही है। जुलूस मार्गों का निरीक्षण किया जा रहा है और आयोजकों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। ताजियादारों से भी लगातार संवाद कर सुरक्षा मानकों का पालन करने के निर्देश दिए हैं।

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