CM भगवंत मान का पलटवार, बोले- आरोप बेबुनियाद, मुझे बदनाम करने की साजिश हो रही है

चंडीगढ़

पंजाब मुख्यमंत्री भगवंत मान ने श्री अकाल तख्त के फैसले पर अपनी सफाई दी. उन्होंने कहा कि पिछले दिन तख्त श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार की ओर से एक वीडियो के संबंध में मेरे खिलाफ कुछ हुकमनामे जारी किए गए हैं. भगवंत मान ने कथित विवादित वायरल वीडियो को को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। 

सीएम भगवंत मान ने कहा कि वायरल वीडियो में जो शख्स दिखाई दे रहा है वह मैं नहीं हूं. मैं हैरान हूं कि पंथ के इतने बड़े ओहदे पर बैठे लोग सियासी मोहरे की तरह काम कर रहे हैं। 

मुख्यमंत्री मान ने कहा कि वायरल वीडियो में जो शख्स है, न तो उसके चेहरा-मोहरा मिलता है और न ही कद काठी मुझसे मिलती है, उसके शारीरिक बनावट पूरी तरह उनसे बिल्कुल अलग है. ये मेरे खिलाफ एक प्रोपेगंडा है। 

सीएम भगवंत मान ने कहा कि मैं पंजाब में गुरु की बाणी, पानी, किसानी और जवानी के लिए जो सरकारी फैसला ले रहा हूं वह मेरे विरोधियों को बर्दाश्त नहीं हो रहे हैं. इसलिए मुझे बदनाम करने के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं और इसके लिए धर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है. मान ने कहा कि मैं श्री अकाल तख्त को सर्वोच्च संस्था मानता हूं और उसके आगे नतमस्तक होता हूं। 

भगवंत मान ने कहा  श्री अकाल तख्त से मत्था लगाने के बारे में न तो मैं सोच सकता हूं और न ही मेरी आने वाली कई पीढ़ियां ऐसा सोच सकती हैं लेकिन श्री अकाल तख्त पर जो सियासी नियुक्तियां हुई हैं और ये लोग जिस तरह के फैसले ले रहे हैं, वह सारी संगत अच्छी तरह जानती है। 

ऐसे समय में जब अरविंद केजरीवाल ने भगवंत मान हाल ही में 2027 चुनाव के लिए पार्टी का चेहरा घोषित किया, यह विवाद पंजाब की चुनावी राजनीति पर कितना असर डालेगा, यही सबसे बड़ा सवाल बन गया है । 
1. आखिर कौन सा वीडियो बना भगवंत मान के लिए मुसीबत?

पूरा विवाद एक वायरल वीडियो से शुरू हुआ, जिसमें एक व्यक्ति कथित तौर पर हाथ में शराब का गिलास लिए सिख गुरुओं और जनरल सिंह भिंडरांवाले की तस्वीरों पर शराब के छींटे मारता दिखाई देता है. वीडियो सामने आने के बाद इसे सिख धार्मिक भावनाओं और मर्यादा के अपमान से जोड़कर देखा गया. विपक्षी दलों और कई धार्मिक संगठनों ने दावा किया कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति मुख्यमंत्री भगवंत मान हैं. हालांकि, शुरुआत से ही आम आदमी पार्टी और भगवंत मान इस दावे को खारिज करते रहे. सीएम भगवंत मान से जुड़ा यह वीडियो दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में खूब वायरल हुआ था। 

2. भगवंत मान ने क्या कहा था?

वीडियो वायरल होने के बाद भगवंत मान ने आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया. उनका कहना था कि वीडियो नकली है और आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक की मदद से तैयार किया गया है. उन्होंने दावा किया कि राजनीतिक विरोधी उनकी छवि खराब करने और पंजाब सरकार को बदनाम करने के लिए इस तरह की सामग्री फैला रहे हैं. मान ने यह भी कहा कि किसी वीडियो की मौजूदगी मात्र से उसमें दिख रहे व्यक्ति की पहचान सिद्ध नहीं हो जाती। 

5 जनवरी 2026 को अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने भगवंत मान को तलब किया और वीडियो की सत्यता की जांच कराने की घोषणा की. 15 जनवरी को मान अकाल तख्त के समक्ष पेश भी हुए। 
3. अकाल तख्त की रिपोर्ट में क्या निकला?

वायरल वीडियो को बेअदबी का गंभीर मामला मानते हुए इसे गंभीरता को देखते हुए अकाल तख्त ने जनवरी 2026 में भगवंत मान को तलब किया. मुख्यमंत्री ने पेश होकर अपना पक्ष रखा और कुछ दस्तावेज भी जमा कराए. इसके बाद वीडियो को फॉरेंसिक जांच के लिए विशेषज्ञ संस्थानों के पास भेजा गया। 

जून 2026 में सामने आई रिपोर्ट में कहा गया कि वीडियो में किसी प्रकार की एडिटिंग या एआई जनरेशन के संकेत नहीं मिले. रिपोर्ट के आधार पर अकाल तख्त ने माना कि वीडियो तकनीकी रूप से प्रामाणिक है. हालांकि रिपोर्ट में यह प्रश्न अलग बना रहा कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति निश्चित रूप से भगवंत मान हैं या नहीं। 
4. अकाल तख्त ने भगवंत मान को पंथ विरोधी क्यों घोषित किया?

जून 2026 में सामने आए फॉरेंसिक रिपोर्ट पर विचार करने के बाद अकाल तख्त ने भगवंत मान को "गुरु द्रोही" और "पंथ विरोधी" घोषित किया. धार्मिक नेतृत्व का तर्क था कि वीडियो में दिखाई गई गतिविधि सिख परंपराओं और गुरुओं के सम्मान के खिलाफ है. मान ने जांच के दौरान वीडियो को AI बताकर गुमराह करने की कोशिश की। 

आकल तख्त ने सिख समुदाय से अपील की गई कि वे इस मामले को गंभीरता से लें. यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अकाल तख्त सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था मानी जाती है और उसके निर्णयों का पंजाब की सामाजिक और राजनीतिक चर्चा पर प्रभाव पड़ता है। 

15 से 16 जून 2026 को पांच सिंह साहिबानों की बैठक के बाद अकाल तख्त ने भगवंत मान को "गुरु-दोखी" और "खालसा पंथ विरोधी" घोषित किया. अकाल तख्त का कहना है कि वायरल वीडियो और उससे जुड़े घटनाक्रम ने सिख धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई तथा मान ने जांच के दौरान वीडियो को AI बताकर गुमराह करने की कोशिश की। 
5. विपक्षी दलों ने इस विवाद को कैसे भुनाया?

अकाल तख्त के फैसले के बाद कांग्रेस, बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल तीनों ने मुख्यमंत्री पर दबाव बढ़ा दिया. बीजेपी ने सवाल उठाया कि यदि मुख्यमंत्री खुद ऐसे विवाद में घिरे हैं तो राज्य में नशा मुक्ति और नैतिक शासन की बात कैसे कर सकते हैं. कांग्रेस ने इसे नैतिकता का मुद्दा बताते हुए इस्तीफे की मांग की. वहीं अकाली दल ने इसे सिख मर्यादा और धार्मिक सम्मान का प्रश्न बताते हुए अकाल तख्त के फैसले का खुलकर समर्थन किया. इससे विपक्ष को लंबे समय बाद एक ऐसा मुद्दा मिला है जिस पर लगभग सभी दल एक सुर में दिखाई दे रहे हैं। 
6. आम आदमी पार्टी का बचाव क्या है?

आम आदमी पार्टी का कहना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट केवल यह बताती है कि वीडियो तकनीकी रूप से असली है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि उसमें दिखने वाला व्यक्ति भगवंत मान ही हैं. पार्टी का आरोप है कि राजनीतिक विरोधी और कुछ धार्मिक-राजनीतिक समूह इस मामले का इस्तेमाल चुनावी लाभ के लिए कर रहे हैं. AAP का मानना है कि पहचान का प्रश्न अभी भी अनुत्तरित है और केवल आरोपों के आधार पर किसी मुख्यमंत्री को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। 
7. क्या 2027 चुनाव में यह AAP के लिए बड़ा खतरा बनेगा?

यह विवाद आम आदमी पार्टी के लिए निश्चित रूप से एक इमेज संकट पैदा करता है क्योंकि भगवंत मान पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा हैं. यदि यह मुद्दा लगातार चर्चा में बना रहता है और धार्मिक संगठनों का दबाव बढ़ता है तो मालवा सहित कई क्षेत्रों में पार्टी को नुकसान हो सकता है। 

दूसरी ओर चुनाव अभी दूर हैं और पंजाब की राजनीति में रोजगार, किसानों के मुद्दे, बिजली, कानून-व्यवस्था और विकास जैसे विषय भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. यदि AAP सरकार इन मुद्दों पर अपनी पकड़ मजबूत रखती है और विवाद को राजनीतिक साजिश के रूप में स्थापित करने में सफल रहती है तो नुकसान सीमित रह सकता है। 

अगर विपक्ष इसे धार्मिक सम्मान बनाम सरकार की लड़ाई में बदलने में सफल हो गया तो 2027 के चुनाव में इसका असर सीटों और वोट शेयर दोनों पर दिखाई दे सकता है। 
किसने क्या कहा?
आम आदमी पार्टी का क्या स्टैंड है?

AAP ने पूरे मामले को राजनीतिक साजिश बताया है. पार्टी का कहना है कि वीडियो में व्यक्ति की पहचान स्थापित नहीं हुई है. अकाल तख्त के सामने रखी गई फॉरेंसिक रिपोर्ट केवल वीडियो के एडिट या AI न होने की बात कहती है. शिरोमणि अकाली दल और बादल परिवार धार्मिक संस्थाओं का राजनीतिक इस्तेमाल कर रहे हैं। 
इस्तीफा दें सीएम: केवल सिंह ढिल्लों

पंजाब बीजेपी अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने अकाल तख्त के फैसले के बाद भगवंत मान के इस्तीफे की मांग की. बीजेपी का कहना है कि सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था द्वारा "गुरु-दोखी" घोषित किए जाने के बाद नैतिक आधार पर मुख्यमंत्री पद पर बने रहना मुश्किल है. इससे पहले बीजेपी नेता सुनील जाखड़ भी वीडियो की फॉरेंसिक जांच की मांग कर चुके थे। 
मान ने सिखों का सिर झुका दिया: राजा वारिंग

कांग्रेस लंबे समय से इस मुद्दे पर भगवंत मान और AAP को घेरती रही है. विपक्षी दल के रूप में कांग्रेस ने वीडियो विवाद और धार्मिक भावनाओं के मुद्दे पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया तथा मामले में जवाबदेही की मांग की। 

पंजाब कांग्रेस के चीफ अमरिंदर सिंह राजा वारिंग के मुताबिक, "यह बहुत बड़ी बात है. अकाल तख्त के जत्थेदार साहब ने कहा है कि उन्होंने भगवंत मान के वीडियो वेरिफाई किए हैं, उन्होंने स्टेटमेंट जारी किया है कि वीडियो असली हैं, AI वीडियो नहीं हैं. हम सब अकाल तख्त को फॉलो करते हैं. यह बहुत बड़ा आरोप है, नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए CM को इस्तीफा दे देना चाहिए, क्योंकि दुनिया भर के सिखों का सिर झुक गया है। 

चरणजीत सिंह चन्नी: आप भगवंत मान को सिख मानते हैं?

कांग्रेस नेता और पंजाब के पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने पूछा है, “क्या आप भगवंत मान को सिख मानते हैं? वे शराब के नशे में गुरुद्वारा साहिब गए थे.” उन्होंने ऐसा क्यों किया?
शिरोमणि अकाली दल ने क्या कहा?

SAD ने अकाल तख्त के फैसले का समर्थन किया और कहा कि फॉरेंसिक रिपोर्ट ने सच सामने ला दिया है. अकाली दल लगातार दावा करता रहा है कि वीडियो की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि वीडियो असली साबित होता है तो मुख्यमंत्री को जवाब देना होगा। 

SAD के प्रेसिडेंट सुखबीर सिंह बादल ने कहा, "कुछ महीने पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो आया था, जिसमें पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान इस तरह का बर्ताव कर रहे थे, गुरु साहिब की बेइज्जती कर रहे थे, जिसके लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं, जिनका मैं जिक्र कर सकूं. जब यह वीडियो आया तो प्रदेश के लोगों को बहुत गुस्सा आया. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह वीडियो मेरा नहीं है, उन्होंने ही बनाया है. उन्होंने कल तक साहिब से झूठ बोला…"
2027 चुनाव से पहले भगवंत मान के लिए बड़ा झटका है?

राजनीतिक रूप से यह AAP और भगवंत मान के लिए गंभीर चुनौती मानी जा रही है क्योंकि यह मामला सीधे सिख धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है. अकाल तख्त की टिप्पणी का पंजाब की राजनीति में प्रतीकात्मक महत्व बहुत बड़ा होता है. हाल ही में अरविंद केजरीवाल ने संकेत दिया था कि 2027 चुनाव में भी भगवंत मान ही AAP का प्रमुख चेहरा रहेंगे. बीजेपी, कांग्रेस और अकाली दल तीनों को स रकार पर हमला करने का साझा मुद्दा मिल गया है। 

हालांकि, अंतिम राजनीतिक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि जनता अकाल तख्त की रिपोर्ट, AAP की सफाई और आने वाले महीनों में सामने आने वाले सबूतों को किस तरह देखती है. फिलहाल यह, विवाद 2027 के चुनावी नैरेटिव का बड़ा मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है। 
अकाल तख्त ने क्या कहा?

पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़े भावनात्मक और धार्मिक मुद्दे ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है. श्री अकाल तख्त साहिब ने सोमवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को "गुरु-द्रोही" और "खालसा पंथ विरोधी" घोषित कर दिया. अकाल तख्त का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने एक विवादित वायरल वीडियो के मामले में सिख धर्मगुरुओं के समक्ष गलत जानकारी पेश की और वीडियो को फर्जी बताकर गुमराह करने की कोशिश की। 

सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज्ज ने अमृतसर में 15 जून को पांच सिंह साहिबानों की बैठक के बाद यह फैसला सुनाया. उन्होंने दावा किया कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो, जिसमें कथित तौर पर भगवंत मान जैसा दिखने वाला व्यक्ति नजर आता है, दो स्वतंत्र फॉरेंसिक लैब की जांच में प्रामाणिक पाया गया है. जांच रिपोर्ट के अनुसार वीडियो के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की गई और न ही यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया है। 

ज्ञानी गर्गज्ज ने बताया कि जनवरी 2026 में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्वयं वीडियो की फॉरेंसिक जांच करवाने की बात कही थी. इसके बाद अकाल तख्त सचिवालय ने उन्हें पत्र लिखकर जांच प्रक्रिया में सहयोग करने को कहा, लेकिन सचिवालय को उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला. बाद में अकाल तख्त ने अपने स्तर पर दो फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं से वीडियो की जांच करवाई। 

जत्थेदार ने कहा कि मुख्यमंत्री का पद अत्यंत सम्मानजनक होता है, लेकिन भगवंत मान ने अकाल तख्त के समक्ष वीडियो को लेकर झूठा दावा किया. उनके अनुसार जांच रिपोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वीडियो न तो एडिट किया गया था और न ही AI से तैयार किया गया था

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