लाहौर के कॉलेज में हरचरण सिंह बराड़ के नाम पर क्लासरूम, भारत-पाक दोस्ती की बनी मिसाल

श्री मुक्तसर साहिब.

लाहौर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान एचिसन काॅलेज में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री हरचरण सिंह बराड़ के नाम पर एक क्लासरूम का नाम रखा गया है। इस फैसले ने भारत-पाक सीमा के दोनों ओर लोगों का ध्यान खींचा है। बराड़ ने 1936 से 1943 तक इसी कालेज में पढ़ाई की थी।

पढ़ाई के दौरान वे स्कूल प्रिफेक्ट रहे और उन्हें प्रतिष्ठित 'रिवाज गोल्ड मेडल' से भी सम्मानित किया गया था। इस पहल की पुष्टि करते हुए बराड़ की बहू और मुक्तसर से पूर्व विधायक करण कौर बराड़ ने बताया कि यह सम्मान उनके ससुर के बचपन के दोस्त और पाकिस्तान के नामी उद्योगपति सैय्यद बाबर अली दे रहे हैं। दशकों पहले हरचरण जी ने इस कालेज की लाइब्रेरी का उद्घाटन भी किया था‌। बाबर अली का 100वां जन्मदिन 30 जून को है, लेकिन मुहर्रम के कारण इसका जश्न सात जून को मना रहे हैं। इसी मौके पर क्लासरूम समर्पित हुआ है। करण कौर ने कहा कि हरचरण जी और बाबर साहब का रिश्ता भाइयों जैसा था।उन्होंने बताया कि हरचरण जी को लाहौर के उक्त कालेज से बहुत लगाव था।

बेटी बबली बराड़ पाकिस्तान पहुंची
इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बराड़ की बेटी बबली बराड़ पहले ही पाकिस्तान पहुंच चुकी हैं। यह कदम खास इसलिए भी है क्योंकि किसी पाकिस्तानी संस्थान में भारतीय राजनेता को सम्मान मिलना दुर्लभ है। यह उन निजी रिश्तों की मिसाल है जो विभाजन की त्रासदी झेलकर भी दशकों तक कायम रहे। हरचरण सिंह बराड़ का निधन सितंबर 2009 में हुआ था। उल्लेखनीय है कि मुक्तसर जिले के सरायनागा गांव के रहने वाले हरचरण सिंह बराड़ अगस्त 1995 से नवंबर 1996 तक पंजाब के मुख्यमंत्री रहे। इससे पहले 1977 में वे उड़ीसा और हरियाणा के राज्यपाल का पद भी संभाल चुके थे। यही नहीं सात नवंबर 1995 को मुक्तसर और 24 नवंबर 1995 को मोगा को जिला बनाने का श्रेय भी बराड़ को जाता है।

बाबर अली ने सुनाए दोस्ती के किस्से
बाबर अली ने पाक में एक वीडियो इंटरव्यू में दोस्ती के किस्से साझा किए। उन्होंने बताया कि तीसरी कक्षा में वे अलग सेक्शन में थे, लेकिन चौथी में साथ आने पर बराड़ से उसकी पक्की दोस्ती हो गई। हरचरण पढ़ाई में अच्छे थे, मैं भी कम नहीं था। हमारी सोच मिलती थी। वह गुरुद्वारे जाते, मैं मस्जिद, पर धर्म कभी बीच में नहीं आया। बाबर अली ने कहा कि दोनों साथ पढ़ते, पंजाबी में बात करते और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा रखते थे।

फिरोजपुर के बॉर्डर पर हुई थी मुलाकात
उन्होंने यह भी याद किया कि बराड़ को उर्दू से खास लगाव था और वे अपनी मां को उर्दू में ही चिट्ठियां लिखते थे। उन्होंने बताया कि विभाजन के बाद जब मैं अमेरिका से लौटा तो बराड़ को मैं फिरोजपुर बार्डर पर मिला था। वह मेरे लिए केले लेकर आया था और मैं डाइट। लेकिन सुरक्षा के लिहाज से हम दोनों एक दूसरे को कुछ नहीं दे सके। विभाजन से पहले एचिसन कालेज पाकिस्तान का सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान माना जाता था, जिसने कई बड़े राजनेता और अफसर दिए।

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