‘अदालत बुलाती रही, एजी ऑफिस में बैठे रहे’, HSSC सचिव पर हाई कोर्ट सख्त; अवमानना नोटिस जारी

चंडीगढ़.

हरियाणा की सरकारी भर्ती प्रक्रिया से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा स्टाफ सलेक्शन कमीशन के सचिव चिन्मय गर्ग के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए अवमानना कार्रवाई शुरू करने के संकेत दिए हैं। अदालत ने सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करने पर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए।

हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि मामलों में अदालत के आदेशों को हल्के में लेने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती। मामला हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। सुनवाई के समय हरियाणा सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक बाल्यान अदालत में पेश हुए। उन्होंने न्यायालय को बताया कि आयोग के सचिव की ओर से जो हलफनामा दाखिल किया गया है, वह अदालत द्वारा उठाए गए सवालों और निर्देशों का संतोषजनक उत्तर नहीं देता। राज्य पक्ष ने कहा कि कुछ तथ्यों को और स्पष्ट करने की आवश्यकता है तथा विस्तृत जवाब तैयार करने के लिए एक सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया जाए। इस पर जस्टिस संदीप मौदगिल ने राज्य सरकार को राहत देते हुए नया हलफनामा दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय तो दे दिया, लेकिन साथ ही सख्त टिप्पणी भी की। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यह “अंतिम अवसर” होगा और इसके बाद किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।

कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 29 मई 2026 तय कर दी। सुनवाई के दौरान सबसे गंभीर पहलू तब सामने आया जब अदालत ने पाया कि एचएसएससी सचिव चिन्मय गर्ग स्वयं अदालत में उपस्थित नहीं हुए हैं। न्यायालय ने इस पर तुरंत राज्य के वकील से स्पष्टीकरण मांगा। अदालत को बताया गया कि सचिव उस समय एडवोकेट जनरल, हरियाणा के कार्यालय में मौजूद थे। यह जानकारी मिलते ही हाई कोर्ट ने तीखी नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि पिछली सुनवाई में सचिव को व्यक्तिगत उपस्थिति से कोई छूट नहीं दी गई थी। इसके बावजूद उनका अदालत में उपस्थित न होना न्यायिक आदेशों की अनदेखी माना जाएगा। न्यायालय ने यह भी कहा कि जब कोई अधिकारी अदालत के समक्ष जवाबदेह होता है, तब उसका यह दायित्व बनता है कि वह स्वयं उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करे। केवल हलफनामा दाखिल कर देने से जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती।

हाई कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि सचिव ने न्यायालय के आदेशों की “जानबूझकर और इरादतन अवहेलना” की है। अदालत ने माना कि न केवल समय पर स्पष्ट जवाब दाखिल नहीं किया गया बल्कि न्यायालय में अनुपस्थित रहकर सुनवाई प्रक्रिया को भी प्रभावित किया गया। इसी आधार पर सचिव के खिलाफ अवमानना कार्यवाही प्रारंभ करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।अदालत ने यह भी निर्देश दिए कि मामले को अत्यावश्यक श्रेणी में सूचीबद्ध किया जाए ।

Recent Post

Live Cricket Update

You May Like This

error: Content is protected !!

4th piller को सपोर्ट करने के लिए आप Gpay - 7587428786