भारत-नेपाल सीमा पर तस्करों की घेराबंदी, संयुक्त गश्त और हाईटेक निगरानी से कड़ी सुरक्षा

किशनगंज.

भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों की सख्ती अब पहले से कहीं अधिक मजबूत और संगठित रूप में दिखाई देने लगी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की फरवरी में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह एक्टिव मोड में डाल दिया गया है।

इसका असर अब जमीन पर साफ नजर आ रहा है, जहां भारत और नेपाल की सुरक्षा एजेंसियां केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संयुक्त अभियान चलाकर सीमा पार होने वाली हर गतिविधि पर कड़ी नजर रख रही हैं।

साप्ताहिक समन्वय बैठक से बढ़ा तालमेल
सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल (SSB), नेपाल एपीएफ और बिहार पुलिस के बीच अब नियमित रूप से हर सप्ताह समन्वय बैठक आयोजित की जा रही है। पहले यह बैठकें अनियमित थीं, लेकिन अब लगातार संवाद और समन्वय ने सुरक्षा तंत्र को अधिक प्रभावी बना दिया है। इस बेहतर तालमेल के चलते इंटेलिजेंस शेयरिंग और संयुक्त पेट्रोलिंग को गति मिली है, जिससे मानव तस्करी, नशीले पदार्थों की तस्करी, फर्जी दस्तावेजों के उपयोग और संदिग्ध आवाजाही पर तेजी से कार्रवाई संभव हो रही है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि पहले जिन गतिविधियों पर कार्रवाई में समय लगता था, अब उन पर रियल टाइम में कदम उठाए जा रहे हैं।

संवेदनशील प्वाइंट्स चिन्हित, बढ़ाई गई निगरानी
सीमावर्ती इलाकों में कई ऐसे संवेदनशील स्थान चिन्हित किए गए हैं, जहां अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती और निगरानी बढ़ाई गई है। इन क्षेत्रों में ड्रोन, डिजिटल सर्विलांस और मोबाइल ट्रैकिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इन तकनीकों के माध्यम से सीमाई गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है, जिससे किसी भी संदिग्ध मूवमेंट की तुरंत पहचान संभव हो रही है।

हाईटेक निगरानी प्रणाली पर जोर
दो दिन पहले बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी सीमाई सुरक्षा को लेकर अधिकारियों को हाईटेक मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने का निर्देश दिया है। इस दिशा में तकनीकी संसाधनों को और मजबूत करने पर काम शुरू हो गया है। वहीं नेपाल में नई सरकार बनने के बाद वहां की सुरक्षा एजेंसियों ने भी सीमावर्ती क्षेत्रों में सख्ती बढ़ा दी है। हाल के दिनों में थाई नागरिक की गिरफ्तारी, मादक पदार्थों की बड़ी खेप की बरामदगी और संदिग्ध गतिविधियों पर हुई कार्रवाई ने दोनों देशों की एजेंसियों को और अधिक सतर्क कर दिया है।

तस्करी नेटवर्क पर बढ़ा दबाव
सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ी सतर्कता का सीधा असर सीमांचल क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। लंबे समय से खुली सीमा का फायदा उठाकर सक्रिय तस्कर गिरोह और अवैध नेटवर्क अब दबाव में आ गए हैं। संयुक्त अभियान और रियल टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग के कारण सीमा पार अपराधियों के लिए गतिविधियां संचालित करना पहले की तुलना में काफी कठिन हो गया है। लगातार कार्रवाई से तस्करी के पुराने नेटवर्क भी कमजोर पड़ रहे हैं।

SSB की 15 किलोमीटर तक बढ़ी सक्रियता
इधर भारतीय सीमा में सशस्त्र सीमा बल (SSB) का दायरा 15 किलोमीटर तक बढ़ाए जाने का भी सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। बिहार पुलिस के साथ मिलकर एसएसबी न केवल निगरानी बढ़ा रही है, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों के बीच जागरूकता अभियान भी चला रही है। ग्रामीणों को सीमा सुरक्षा में सहयोगी भूमिका के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी समय पर सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंच सके।

आधुनिक तकनीक का उपयोग
कुल मिलाकर, भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ी हुई सतर्कता, आधुनिक तकनीक का उपयोग और दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच मजबूत समन्वय ने सीमाई सुरक्षा को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। इससे न केवल तस्करी और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगा है, बल्कि सीमांचल क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था भी पहले से अधिक मजबूत हुई है।

Recent Post

Live Cricket Update

You May Like This

error: Content is protected !!

4th piller को सपोर्ट करने के लिए आप Gpay - 7587428786