रावी-ब्यास जल विवाद से पंजाब में गहराया संकट, मान सरकार ने उठाई नए आवंटन की मांग

चंडीगढ़.

पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में रावी व ब्यास नदी के लंबे समय से चले आ रहे जल विवाद को हल करने के लिए जस्टिस विनीत सरन (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता वाला ट्रिब्यूनल ने रविवार को पंजाब का दौरा किया। इस दौरान पंजाब सरकार ने ट्रिब्यूनल के समक्ष राज्य में घटती जल उपलब्धता, सीमावर्ती क्षेत्रों में नहरों के पानी की कमी और पाकिस्तान की ओर से सतलुज में आ रहे प्रदूषित पानी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया।

अधिकारियों ने ट्रिब्यूनल को बताया कि मौजूदा स्थिति में पंजाब के पास पानी की बहुत कमी है। इससे वह अपने राज्य की जरूरतों को भी पूरा नहीं कर पा रहा। ऐसे में नदियों का जल आवंटन नए सिरे से होना चाहिए। जल संसाधन विभाग की ओर से ट्रिब्यूनल को विभिन्न स्थलों का दौरा करवाकर मौजूदा हालात से भी अवगत कराया गया। सीएम भगवंत मान ने अमृतसर में ट्रिब्यूनल के सदस्यों को रात्रिभोज दिया। तीन सदस्यीय ट्रिब्यूनल शनिवार शाम अमृतसर पहुंचा था और रविवार को हरिके हेडवर्क्स, फिरोजपुर के बल्लेवाल हेडवर्क्स तथा हुसैनीवाला क्षेत्र का निरीक्षण किया। पंजाब सरकार के अधिकारियों ने ट्रिब्यूनल को रावी-ब्यास नदियों में मौजूदा जल प्रवाह, नहरों में पानी की उपलब्धता और राज्य के विभिन्न हिस्सों में उसके उपयोग का ब्यौरा दिया। टीम ने पानी की कुल आवक, निकासी और वितरण प्रणाली की समीक्षा की।

पंजाब सरकार ने ट्रिब्यूनल को यह भी बताया कि सीमावर्ती बेल्ट में नहरों में पानी की कमी लगातार बढ़ रही है। कई क्षेत्रों में किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा, जिससे खेती प्रभावित हो रही है। सरकार ने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा जल बंटवारा पुराने आंकड़ों पर आधारित है, जबकि नदियों में पानी की उपलब्धता में पिछले चार दशकों में काफी कमी आई है। अधिकारियों ने ट्रिब्यूनल के समक्ष आंकड़े रखे कि वर्ष 1981 में रावी-ब्यास नदियों में 17.17 एमएएफ पानी उपलब्ध था, जो वर्ष 2021 में घटकर लगभग 13 एमएएफ रह गया। राज्य सरकार ने कहा कि कम होती जल उपलब्धता को देखते हुए पानी के बंटवारे की व्यवस्था की नए सिरे से समीक्षा की जानी चाहिए। दौरे के समापन के बाद ट्रिब्यूनल अब राजस्थान का दौरा करेगा, जहां संबंधित क्षेत्रों का निरीक्षण कर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। पंजाब सरकार को उम्मीद है कि जमीनी निरीक्षण के दौरान रखे गए तथ्यों से राज्य के दावे को मजबूती मिलेगी।

पाकिस्तान से आ रहे प्रदूषित पानी का मुद्दा भी उठाया सरकार ने
दौरे के दौरान ट्रिब्यूनल को फिरोजपुर के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी ले जाया गया, जहां पाकिस्तान के कसूर क्षेत्र से सतलुज नदी में आने वाले प्रदूषित पानी का असर दिखाया। अधिकारियों ने बताया कि कसूर के चमड़ा उद्योगों से निकलने वाला दूषित पानी सीमा पार कर पंजाब के हिस्से में पहुंचता है, जिससे नदी के पानी की गुणवत्ता प्रभावित है। इससे खेती, पशुपालन और स्थानीय आबादी पर भी असर पड़ रहा है। राज्य सरकार ने इसे जल संसाधनों के उपयोग से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए ट्रिब्यूनल के समक्ष रखा।

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