भिवानी.
जन स्वास्थ्य विभाग प्रदेश में पहली बार पंचायतों के जीरो बैलेंस बैंक खाते खाेलेगा। पंचायतों के खातों में बजट डाला जाएगा। गांव की पेयजल आपूर्ति सुचारू बनाने के लिए पंचायतों को ही आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। देखरेख से लेकर लाइनों की मरम्मत आदि का कार्य खुद पंचायत ही अपने स्तर पर करवाएंगी।
गांव से पानी के बिल के रूप में जितनी राशि एकत्रित की जाएगी, उतनी राशि विभाग पंचायत के खाते में डालेगा। गांवों में पानी के बिल करोड़ों में बकाया है। ऐसे में बिलों की उगाही करने की जिम्मेदारी भी पंचायतों को दी जा रही है ताकि व्यवस्था में सुधार हो सके।
गांव की आधी आबादी बनेगी सहयोगी
गांव की आधी आबादी को इस व्यवस्था को सुधारने में भागीदार बनाया जा रहा है। इतना ही नहीं यह कार्य आधी आबादी को आत्मनिर्भर बनाने को लेकर भी इसे सार्थक कदम माना जा रहा है। गांव में 500 की आबादी पर एसएसजी की एक महिला होगी तैनात। ये महिला प्रतिदिन पानी के तीन सेंपल एकत्रित करेगी। प्रति सेंपल 10 रुपये उसे मिलेंगे। इसी प्रकार जो राशि बिल की एकत्रित की जाएगी उस पर उसे 10 प्रतिशत राशि मिलेगी। इस तरह से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की भी यह सार्थक पहल मानी जा रही है।
योजना की खास बातें
- प्रदेश की 6237 ग्राम पंचायतों में लागू होगी व्यवस्था
- पंचायतों के इंडियन बैंक में जीरो बैलेंस खाते खुलेंगे
- गांव की महिलाएं करेंगी पानी बिल वसूली
- वसूली राशि का 10 प्रतिशत महिलाओं को प्रोत्साहन
- रोज कम से कम तीन पानी के सैंपल लेने होंगे
- प्रति सैंपल 10 रुपये मिलेगा
- 500 की आबादी पर एक महिला की तैनाती होगी।
- स्वयं सहायता समूह की महिला का 12वीं पास होना जरूरी
- जितनी बिल वसूली, उतनी ही राशि विभाग पंचायत खाते में डालेगा
सलाहकार अधिकारी अशोक भाटी ने कहा कि सरकार गांवों में पेयजल व्यवस्था को केवल सरकारी तंत्र पर निर्भर नहीं रखना चाहती। इसी सोच के तहत पंचायत आधारित मॉडल तैयार किया गया है। पंचायतें अपने स्तर पर बेहतर निगरानी कर सकती हैं। महिलाओं की भागीदारी से बिल वसूली, गुणवत्ता जांच और डिजिटल रिकार्ड व्यवस्था मजबूत होगी।









