बिहार सरकार का बड़ा फैसल,अब मंत्रियों और अधिकारियों के बच्चे भी सरकारी स्कूल में पढ़ेंगे

पटना

 बिहार में मंत्रियों और अधिकारियों के बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ेंगे। इसे लेकर राज्य सरकार जल्द ही ठोस कदम उठा सकती है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को विधानसभा में विश्वास मत प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सरकार की प्राथमिकताओं का जिक्र किया।

सीएम सम्राट चौधरी का स्पष्ट कहना था कि राज्य में शिक्षा की ऐसी व्यवस्था की जाएगी, जिससे मंत्री और अधिकारी के बच्चे भी सरकारी स्कूल में पढ़ने को बाध्य हो। इसी दिशा में जुलाई में राज्य के 209 प्रखंडों में डिग्री कॉलेज को चालू कर दिया जाएगा। इसके साथ ही स्कूल और कॉलेज में छात्राओं की सुरक्षा के लिए पुलिस दीदी की तैनाती की जाएगी।

नवंबर में पांच लाख करोड़ रुपये का निवेश
विधानसभा में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कई घोषणाएं की। उन्होंने बताया कि एनडीए सरकार के एक वर्ष पूरे होने पर नवंबर में पांच लाख करोड़ रुपये का निवेश होगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछली सरकार के कार्यकाल में 1.36 लाख करोड़ रुपये के बिहार में निवेश हुए। लेकिन, सरकार की उपलब्धियों को जिस तरह जनता के बीच पहुंचाना चाहिए था नहीं पहुंचा पाई। मेरी सरकार की प्राथमिकता रोजगार, कारोबार बढ़ावा देना और प्रवासन रोकना है।

प्रखंड,अंचल और थानों पर सीएमओ की सीधी नजर
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ओर से जन समस्याओं के निदान के लिए प्रखंड, अंचल और थानों पर मुख्यमंत्री सचिवालय (सीएमओ) के माध्यम से सीधी नजर रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौत पर बीमा कंपनियों की ओर से परिजनों को चार लाख और राज्य सरकार की ओर से भी चार लाख दिए जाएंगे।

घोषणाओं को लागू करने के लिए ठोस कदम
सीएम सम्राट चौधरी की ओर से शिक्षा, निवेश और जन समस्याओं के निदान को लेकर विधानसभा में जो ऐलान किया है, इसे प्रभावी बनाने के लिए सम्राट चौधरी जल्द की कोई ठोस निर्णय ले सकते हैं। इसके अलावा स्वच्छ प्रशासन और कानून-व्यवस्था की स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए भी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी कई बड़े फैसले ले सकते हैं।

कैबिनेट विस्तार के बाद सख्त फैसला
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूर्व की नीतीश सरकार में भी कई सख्त फैसला लेकर सभी को चौंकाने का काम किया। अब राज्य की बागडोर संभालने के बाद उनकी ओर से कई महत्वपूर्ण फैसला लिए जाने की संभावना है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कैबिनेट विस्तार के बाद ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सभी को विश्वास में लेकर सख्त फैसला लेंगे, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो और युवाओं को रोजगार मिल सके।

 

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