पंजाब में बढ़ी चिंता: कुष्ठ रोग के 352 एक्टिव केस, बच्चों में लक्षणों ने बढ़ाया खतरा

चंडीगढ़.

राज्य सरकार ने वर्ष 2027 तक राज्य में कुष्ठ रोग (लेप्रोसी) के संक्रमण को पूरी तरह रोकने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है, लेकिन अब तक केवल 23 में से 8 जिले ही इंटरप्शन आफ ट्रांसमिशन का दर्जा हासिल कर पाए हैं। यह स्थिति जहां एक ओर प्रगति को दर्शाती है, वहीं दूसरी ओर अभी लंबा रास्ता तय किए जाने की जरूरत भी बताती है।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में इस समय कुल 352 कुष्ठ रोगी हैं। इनमें 341 मल्टीबैसिलरी और 11 पासीबैसिलरी केस शामिल हैं। इसके अलावा 4 ग्रेड- 2 विकलांगता के मामले सामने आए हैं और 5 बच्चे भी मल्टीबैसिलरी श्रेणी में पाए गए हैं, जो यह संकेत देते हैं कि राज्य के कुछ इलाकों में संक्रमण अभी भी जारी है और समय पर पहचान नहीं हो पा रही। जिन 8 जिलों ने संक्रमण की कड़ी तोड़ने में सफलता हासिल की है, उनमें फाजिल्का, फिरोजपुर, कपूरथला, मानसा, मुक्तसर, पठानकोट, रूपनगर (रोपड़) और संगरूर शामिल हैं।

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि कुष्ठ रोग उन्मूलन केवल मामलों की संख्या घटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ना, विकलांगता को रोकना और समाज में फैले कलंक को खत्म करना भी उतना ही जरूरी है। ग्रेड-2 विकलांगता और बच्चों में पाए गए मामलों को देर से पहचान और जागरूकता की कमी का संकेत माना जा रहा है। हाल ही में आयोजित सिविल सर्जनों की बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने सुझाव दिया कि 2027 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए साल में दो बार चलने वाले केस डिटेक्शन अभियानों को और तेज किया जाए। साथ ही संवेदनशील जिलों के लिए अलग रणनीति बनाई जाए, ग्रेड-2 मामलों का अनिवार्य आडिट किया जाए और संदिग्ध मरीजों की जांच को स्वास्थ्य केंद्रों पर मजबूत किया जाए।

राज्य को यह भी सलाह दी गई है कि कुष्ठ रोग को नोटिफाएबल डिजीज घोषित किया जाए ताकि हर केस की रिपोर्टिंग अनिवार्य हो सके। निजी डाक्टरों को भी निर्देश दिए जाएंगे कि वे सभी मामलों की जानकारी जिला कुष्ठ रोग अधिकारियों को दें। आशा वर्करों की ट्रेनिंग मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है ताकि वे शुरुआती लक्षण जैसे अंगों में कमजोरी या चलने-फिरने में दिक्कत को पहचान सकें। स्वास्थ्य विभाग ने लुधियाना, मोहाली, जालंधर और अमृतसर जैसे हाई-प्रायोरिटी जिलों में विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। यहां संक्रमण की पहचान कर उसकी श्रृंखला तोड़ने पर फोकस रहेगा।

पंजाब में हर साल फरवरी और अक्टूबर में लेप्रोसी केस डिटेक्शन कैंपेन चलाया जाता है, जिसमें 14 दिन तक घर-घर जाकर मरीजों की पहचान की जाती है। इसके अलावा स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान भी हर साल 30 अक्टूबर से शुरू किया जाता है, ताकि लोगों में जागरूकता बढ़े और बीमारी को समय रहते रोका जा सके।

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