12 साल सिर्फ मरम्मत में लगेंगे, US से लड़ते हुए ईरान को हुआ भारी नुकसान

तेहरान 

अमेरिका और इजरायल के साथ हुए युद्ध से हुए नुकसान से उबरने में ईरान को 10 साल से ज्यादा का समय लगेगा। खबर है कि ईरान के सेंट्रल बैंक ने इससे जुड़ी जानकारियां सरकार के सामने रख दी हैं। साथ ही अर्थव्यवस्था को संभालने की अपील की है। कहा जा रहा है कि ईरान की अहम रिफाइनरी समेत कई जगहों को खासा नुकसान हुआ है। साथ ही मुल्क में तेजी से महंगाई बढ़ने की भी आशंका जताई जा रही है।

ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की पहले से ही नाजुक अर्थव्यवस्था को 40 दिनों के युद्ध के दौरान जमकर नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान को भेजे गए एक आकलन में वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया है कि इस नुकसान को ठीक करने में 12 साल तक का समय लग सकता है।

कितना हुआ नुकसान, महंगाई होने वाली है
युद्ध के दौरान कई बड़े एयरपोर्ट्स को नुकसान पहुंचा। जबकि, तेल ठिकानों, रिफाइनरीज और पेट्रोकेमिकल संस्थानों को भी निशाना बनाया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने चेताया है कि उत्पादन क्षमता को हुए नुकसान के चलते आने वाले महीनों में महंगाई तेजी से बढ़ सकती है। राष्ट्रपति को भेजे गए आकलन में बताया गया है कि औद्योगिक इनपुट सप्लाई ऐसे ही कम बनी रही तो महंगाई में 180 प्रतिशत का इजाफा हो सकता है।

अमेरिका से सुलह की सलाह
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि सेंट्रल बैंक के गवर्नर अब्दुल नसीर हेम्मती ने राष्ट्रपति से अर्थव्यवस्था को स्थिर करने की अपील की है। साथ ही उन्होंने इंटरनेट सुविधा को पूरी तरह से बहाल करने और अमेरिका के साथ समझौता करने की सलाह भी दी है।

इंटरनेट ने दिया बड़ा झटका
युद्ध के दौरान ईरान में लंबे समय तक इंटरनेट बंद रहा था। कहा जा रहा था कि इंटरनेट बंद करने का फैसला साइबर अटैक से बचने के लिए लिया गया था। अब ईरान की डिजिटल इकोनॉमी मुल्क की जीडीपी का 5-6 प्रतिशत है। अब ऐसे में इंटरनेट के बंद होने के चलते पेमेंट सिस्टम, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स ठप हो गए थे।

क्यों नहीं हो पाया समझौता
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने विफल शांति वार्ता के बाद सोमवार को कहा कि लंबी बैठक से कोई सबक नहीं सीखा गया। समझौते के करीब पहुंचने के बावजूद वार्ता विफल हो गई। एक्स पर पोस्ट में उन्होंने लिखा कि ईरान ने पूरी निष्ठा से इस बैठक में भाग लिया लेकिन अमेरिका की मांगे बढ़ती मांगों, लक्ष्य और नाकेबंदी के चलते ये वार्ता टूट गई।

दूसरे दौर की बातचीत की कोशिश
भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने सोमवार को कहा है कि अमेरिका कोई गैर कानूनी मांग न करे और तेहरान की शर्तों को माने, तो हम अमेरिका के साथ दूसरे दौर की वार्ता के लिए तैयार हैं।

भारत में ईरानी राजदूत ने आरोप लगाया कि वार्ता के दौरान अमेरिकी पक्ष ने गैरकानूनी मांगें रखीं, जिसके कारण बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकल सका। अमेरिका कीी नाकेबंदी के सवाल पर उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान की क्षमताओं से भली-भांति परिचित है। ये पता होना चाहिए कि होर्मुज ईरान के जल क्षेत्र में आता है। पश्चिम एशिया संकट पर उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में ईरान और भारत का साझा भविष्य जुड़ा है।

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