लखनऊ कोर्ट का अहम फैसला: रोहिंग्या-बांग्लादेशी मानव तस्करी मामले में 9 दोषी, 7-8 साल की सजा

लखनऊ

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मानव तस्करी के एक बड़े मामले में अदालत ने फैसला सुनाया है. NIA और यूपी एटीएस से जुड़े इस केस में विशेष न्यायाधीश जैनेंद्र कुमार पांडेय की अदालत ने नौ लोगों को दोषी करार देते हुए उन्हें सजा सुनाई है। 

अदालत ने जिन्हें सजा सुनाई है, उनमें मोहम्मद नूर समेत रहमतुल्ला, शबीउररहमान, इस्माइल, अब्दुल शकूर, आले मियां, मोहम्मद रफीक, बप्पन और मोहम्मद हुसैन शामिल हैं. इन सभी को मानव तस्करी का दोषी पाया गया है. इनमें से मोहम्मद नूर सहित कई को 8 साल की सजा सुनाई गई, जबकि अन्य को 7 साल की कैद हुई है. सभी दोषियों पर अलग-अलग राशि का जुर्माना भी लगाया गया है। 

जांच एजेंसियों के अनुसार, यह एक अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी गिरोह था, जो भारत-बांग्लादेश बॉर्डर के जरिए रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को अवैध रूप से भारत में एंट्री दिलाता था. इस गैंग का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था और यह लंबे समय से एक्टिव था। 

गैंग का तरीका बेहद संगठित और सुनियोजित था. महिलाओं को शादी का झांसा देकर उन्हें बेच दिया जाता था, जबकि पुरुषों और बच्चों को फैक्ट्रियों में काम दिलाने के नाम पर शोषण का शिकार बनाया जाता था. इस तरह यह गिरोह मानव तस्करी कर रहा था। 

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब यूपी एटीएस ने मोहम्मद नूर को सर्विलांस पर लिया. इसके बाद 26 जुलाई 2021 को उसे गाजियाबाद रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया. उसकी गिरफ्तारी के बाद कई पीड़ितों को मुक्त कराया गया और गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंच बनाई गई। 

जांच के दौरान दिल्ली समेत अन्य स्थानों पर छापेमारी की गई और गैंग के बाकी सदस्यों को भी गिरफ्तार किया गया. पूछताछ में यह भी सामने आया कि त्रिपुरा बॉर्डर के जरिए पैसों लेकर अवैध तरीके से घुसपैठ कराई जाती थी, जिसके बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में भेज दिया जाता था. इस पूरे ऑपरेशन के जरिए सुरक्षा एजेंसियों ने एक नेटवर्क का पर्दाफाश किया। 

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