दुर्ग.
फर्जी दस्तावेजों के जरिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेशित 23 बच्चों का एडमिशन निरस्त कर दिया गया है। ये वे बच्चे हैं, जिनका एडमिशन आरटीई के तहत शैक्षणिक सत्र 2025-26 में निजी स्कूलों के केजी -1 में हुआ था। इनमें सर्वाधिक 9 बच्चे डीपीएस रिसाली के हैं। बताया जा रहा है कि एडमिशन को लेकर शिकायत हुई थी।
यह शिकायत संबंधित नगरीय निकाय तथा संयुक्त संचालक कार्यालय शिक्षा संभाग दुर्ग को गई थी। इस पर जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा के मार्गदर्शन में जांच कराई गई। जांच के बाद 19 मार्च को इन सभी 23 बच्चों के एडमिशन को निरस्त करने का निर्णय लिया गया। वहीं 18 बच्चों के दस्तावेज सही पाए गए। इनको लेकर की गई शिकायत निराधार पाई गई।
दुर्ग जिले के बड़े जिी स्कूलों में एडमिशन के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। यहां तक कि एडमिशन के लिए जरूरी दस्तावेजों में छेड़छाड़ करने से नहीं चूकते। हो सकता है कि फर्जी दस्तावेज बनाने कोई गिरोह सक्रिय हो । तभी तो बीपीएल राशन कार्ड फर्जी होने के कई मामले सामने आए हैं। इस वजह से बच्चों का एडमिशन भी निरस्त हुआ है। सबसे बड़ी परेशानी उन बच्चों का है, जो साल भर की पढ़ाई कर लिए रहते हैं। उसके बाद उन्हें उस स्कूल से बेदखल किया जाता है। हालांकि जिला शिक्षा विभाग ऐसे बच्चों को स्वामी आत्मानंद तथा अनुदान प्राप्त स्कूलों में प्रवेश के लिए अवसर प्रदान करता है, ताकि बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो। उनकी शिक्षा को जारी रखने विभाग हरसंभव प्रयास करता है।
पूर्व में 22 बच्चों का प्रवेश रिजेक्ट
जिला शिक्षा विभाग द्वारा पिछले वर्ष दिसंबर माह में 13 बच्चों का एडमिशन रिजेक्ट किया गया था। इस आशय का आदेश 2 दिसंबर 2025 को जारी किया गया। इन 13 बच्चों में सर्वाधिक 5 बच्चे माइलस्टोन स्कूल के थे। शेष बच्चों में शंकराचार्य स्कूल हुडको 4, केपीएस नेहरूनगर तथा डीएवी हुडको के 2-2 बच्चे शामिल थे। इसके पहले 12 नवंबर 2025 को 9 बच्चों का एडमिशन निरस्त किया गया था। ये सभी माइलस्टोन स्कूल के बताए गए।









