करनाल.
अमेरिका-ईरान के बीच जारी युद्ध के चावल उद्योग प्रभावित चल रहा है। खासकर हरियाणा के चावल निर्यातक इस स्थिति से सीधे प्रभावित हुए हैं, क्योंकि खाड़ी देशों में उनकी बड़ी हिस्सेदारी है। मौजूदा हालात में निर्यात की रफ्तार धीमी पड़ी है। माल पोर्ट और गोदामों में अटका है, जबकि कई खेप विदेशों के रास्ते में फंस गई हैं। इससे निर्यातकों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है।
इसी मद्देनजर केंद्र सरकार ने युद्ध से प्रभावित चल रहे निर्यातकों को राहत देने के उद्देश्य से 497 करोड़ रुपये की योजना लागू की है। इससे हरियाणा के निर्यातकों को करीब 50 से 60 करोड़ रुपये तक की राहत मिलने की संभावना है। हरियाणा देश के प्रमुख चावल निर्यातक राज्यों में शामिल है। भारत के कुल चावल निर्यात में खाड़ी देशों के लिए लगभग 40 प्रतिशत योगदान हरियाणा के निर्यातकों का है। ऐसे में अमेरिका-ईरान तनाव के कारण समुद्री मार्गों में बाधा आने से निर्यात प्रभावित होना स्वाभाविक है।
कई शिपमेंट समय पर गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रही हैं, जिससे अतिरिक्त शुल्क और देरी की समस्या सामने आई है। सरकार की राहत योजना के तहत निर्यातकों को विभिन्न प्रकार के शुल्कों से छूट दी जा रही है। कांडला पोर्ट पर डिटेंशन शुल्क माफ कर दिया गया है, जहां बड़ी मात्रा में चावल रुका हुआ है। इसके अलावा, जो माल विदेशी पोर्ट पर फंसा है या समुद्र में ट्रांजिट के दौरान है, उस पर लगने वाले शिपिंग लाइन के अतिरिक्त चार्ज और डैमरेज में भी राहत दी जा रही है।
एक्सपोर्टर एसोसिएशन ने की सरकार के कदम की सराहना
राइस एक्सपोर्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश गोयल ने बताया कि सरकार के इस कदम से निर्यातकों को बड़ी राहत मिलेगी। हरियाणा के निर्यातकों को करीब 60 करोड़ रुपये तक की राहत मिल सकती है। मौजूदा हालात में व्यापार पूरी तरह ठप नहीं हुआ है, लेकिन बाधित जरूर हुआ है। ऐसे में यह आर्थिक सहायता उद्योग को संभालने में मदद करेगी। यदि स्थिति जल्द सामान्य होती है तो निर्यात फिर से गति पकड़ सकता है। फिलहाल सरकार के हस्तक्षेप से उद्योग को राहत मिली है और व्यापार को स्थिर रखने में सहायता मिल रही है। हालांकि पहले की तुलना में स्थिति संभली है।









