पाम संडे पर प्रार्थना और जुलूस, देश-विदेश में शांति की कामना

भोपाल.
पाम संडे के अवसर पर ईसाई समाज में विशेष उत्साह देखने को मिला। इस दिन को प्रभु यीशु मसीह के यरुशलम प्रवेश की स्मृति में मनाया गया, जहां लोगों ने एक स्वर में खुद को प्रभु का सेवक बताते हुए सामूहिक प्रार्थना की। पूरे समुदाय ने देश-विदेश में शांति, स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए प्रार्थना करते हुए एकजुटता का संदेश दिया।

खजूर की डालियों के साथ निकली रैली
इस अवसर पर बेथलम चर्च बरखेड़ी फाटक से चर्च तक एक भव्य रैली निकाली गई। श्रद्धालुओं ने हाथों में खजूर की डालियां थामकर प्रभु यीशु के स्वागत की परंपरा को जीवंत किया। रैली के दौरान भक्ति गीतों और ‘होस्ना’ के नारों से वातावरण भक्तिमय हो गया। इस आयोजन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया, जिससे समाज में जागरूकता फैलाने का प्रयास किया गया।

प्रभु यीशु के संदेश का स्मरण
कार्यक्रम के दौरान विशेष प्रार्थना सभा आयोजित की गई, जिसमें पास्टर धूलिया ने प्रभु का वचन सुनाया। उन्होंने बताया कि लगभग 2000 वर्ष पहले इसी दिन प्रभु यीशु ने यरुशलम में प्रवेश किया था, जहां लोगों ने खजूर की डालियां बिछाकर उनका स्वागत किया था। यह दिन विनम्रता, प्रेम और सेवा के भाव को याद करने का प्रतीक है।

बच्चों ने प्रस्तुत की विशेष प्रस्तुति
चर्च में बच्चों द्वारा प्रभु यीशु मसीह के जीवन से जुड़े प्रसंगों पर आधारित प्रस्तुतियां दी गईं। इस दौरान ‘होस्ना’ के जयकारों के साथ वातावरण और अधिक श्रद्धामय हो गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और सभी ने मिलकर एकता और भाईचारे का संदेश दिया।

शांति और एकता के लिए सामूहिक प्रार्थना
भोपाल के विभिन्न गिरजाघरों में भी इसी तरह के आयोजन किए गए, जहां बड़ी संख्या में ईसाई समाज के लोग एकत्रित हुए। सभी ने मिलकर विश्व में चल रहे संघर्षों के समाप्त होने और समाज में प्रेम, शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए प्रार्थना की। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि सामाजिक एकता और सकारात्मक संदेश देने का माध्यम भी बना।

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