पटना.
बिहार के नए राज्यपाल के रूप में Syed Ata Hasnain ने शनिवार को शपथ ली। वे राज्य के 43वें राज्यपाल बने हैं। पटना के लोक भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री Nitish Kumar और दोनों उपमुख्यमंत्री भी मौजूद रहे। पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश K. Vinod Chandran ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। समारोह में कई मंत्री, अधिकारी और गणमान्य लोग भी शामिल हुए।
चार दशक का सैन्य अनुभव
सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों में गिने जाते हैं। उन्होंने करीब 40 वर्षों तक सेना में सेवा दी है और कई अहम जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। अपने सैन्य करियर के दौरान वे खास तौर पर रणनीतिक नेतृत्व और सुरक्षा मामलों की गहरी समझ के लिए जाने जाते रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर में निभाई अहम भूमिका
अपने लंबे सैन्य कार्यकाल में उन्होंने जम्मू-कश्मीर में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। उनके नेतृत्व में सेना ने सुरक्षा के साथ-साथ सामाजिक पहल भी शुरू की। इन पहलों में युवाओं को शिक्षा, खेल और रोजगार से जोड़ने के प्रयास शामिल रहे, जिससे उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश की गई।
सेना के बाद भी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ाव
सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद भी हसनैन राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक मामलों से जुड़े रहे। उन्हें National Disaster Management Authority का सदस्य बनाया गया। इस दौरान उन्होंने आपदा प्रबंधन से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णयों में योगदान दिया और नीति निर्माण में भूमिका निभाई। राज्यपाल पद पर नई जिम्मेदारी अब बिहार के राज्यपाल के रूप में उनके सामने संवैधानिक जिम्मेदारियों का महत्वपूर्ण दायित्व है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि उनका अनुभव राज्य के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
मुस्लिम समुदाय से फिर राज्यपाल
इससे पहले 25 दिसंबर 2024 को Arif Mohammad Khan को बिहार का राज्यपाल बनाया गया था। उनके रूप में राज्य को 26 साल बाद मुस्लिम समुदाय से राज्यपाल मिला था। इससे पहले A. R. Kidwai 1998 तक बिहार के राज्यपाल रहे थे। अब सैयद अता हसनैन के राज्यपाल बनने से एक बार फिर मुस्लिम समुदाय से यह पद सुर्खियों में है।









