अनिल विज की सेहत में लगातार हो रहा सुधार, परिस्थितियों में मजबूत होना बनी राजनीतिक पहचान

चंडीगढ़.

विपरीत परिस्थितियों से निकलकर और मजबूत होकर सामने आना—यही अनिल विज की राजनीतिक यात्रा की पहचान रहा है।  हरियाणा की राजनीति में कुछ नाम ऐसे हैं जो केवल पद से नहीं, बल्कि अपने जुझारू स्वभाव और निरंतर सक्रियता से पहचाने जाते हैं। अनिल विज उन्हीं नेताओं में से एक हैं। वर्तमान में दोनों टांगों में फ्रैक्चर के कारण विश्राम पर होने के बावजूद उनका राजनीतिक और प्रशासनिक संकल्प चर्चा का विषय बना हुआ है। अतीत गवाह है कि विपरीत परिस्थितियाँ उन्हें रोक नहीं पाईं, बल्कि हर चुनौती के बाद वे और अधिक दृढ़ होकर उभरे हैं।

कोरोना काल: नेतृत्व की कठिन परीक्षा
कोविड-19 महामारी आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े स्वास्थ्य संकटों में से एक मानी जाएगी। जब पूरा देश भय, अनिश्चितता और संसाधनों की कमी से जूझ रहा था, तब हरियाणा में स्वास्थ्य विभाग की कमान अनिल विज के हाथों में थी। यह वह समय था जब एक-एक निर्णय हजारों लोगों के जीवन से जुड़ा था। महामारी की पहली और दूसरी लहर के दौरान अस्पतालों में बेड, ऑक्सीजन और दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती थी। संसाधनों की सीमाएँ, तेजी से बढ़ते संक्रमण और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति तंत्र की बाधाओं ने परिस्थितियों को और जटिल बना दिया। विपक्ष और सामाजिक संगठनों की ओर से सवाल भी उठे, लेकिन स्वास्थ्य तंत्र को संभालना अपने आप में बड़ी परीक्षा थी।
स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझने के बावजूद अनिल विज ने सक्रिय प्रशासनिक भूमिका निभाई। उपचार के दौरान भी वे विभागीय बैठकों की निगरानी करते रहे और स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने के निर्देश देते रहे। ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहते हुए सचिवालय पहुंचकर समीक्षा बैठकें करने की उनकी छवि ने समर्थकों के बीच उन्हें “कर्तव्यपथ का योद्धा” बना दिया।

ऑक्सीजन संकट से मुकाबला
दूसरी लहर के दौरान देश के कई हिस्सों में ऑक्सीजन की कमी गंभीर समस्या बन गई थी। हरियाणा में ऑक्सीजन आपूर्ति की नियमित समीक्षा, नए ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना और अस्पतालों में पाइपलाइन व्यवस्था को सुदृढ़ करने के प्रयास किए गए। जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष स्थापित कर आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी बढ़ाई गई। संकट की इस घड़ी में त्वरित निर्णय और समन्वयात्मक प्रशासनिक कार्रवाई पर विशेष जोर रहा।

सात बार विधायक: स्थायी जनविश्वास का प्रमाण
अंबाला छावनी विधानसभा क्षेत्र से सात बार विधायक चुना जाना उनके लंबे राजनीतिक सफर और मजबूत जनाधार का प्रमाण है। छात्र राजनीति से शुरू हुआ उनका सार्वजनिक जीवन राज्य के वरिष्ठ नेताओं की श्रेणी तक पहुंचा। 1996 में पहली बार विधानसभा पहुंचने के बाद क्षेत्रीय समस्याओं—सड़क, पेयजल, सीवरेज और शहरी विकास—को प्रमुखता से उठाया। 2000 में पुनः जीत ने उनके जनाधार को और विस्तृत किया।
2014 में सत्ता परिवर्तन के बाद मंत्री के रूप में स्वास्थ्य, खेल और शहरी स्थानीय निकाय जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। अस्पतालों के उन्नयन, खेल अधोसंरचना और नगर निकायों में सुधार की दिशा में पहलें की गईं। 2019 के बाद गृह और स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विभागों की जिम्मेदारी उनके पास रही। महामारी के कठिन दौर में प्रशासनिक सक्रियता और संसाधनों की व्यवस्था पर उनका विशेष ध्यान रहा।

स्पष्टवादिता और प्रशासनिक शैली
अनिल विज की सबसे बड़ी पहचान उनकी स्पष्टवादिता है। वे राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर बोलते हैं—चाहे वह विपक्ष पर टिप्पणी हो या प्रशासनिक निर्णयों की घोषणा। उनकी कार्यशैली में सीधा संवाद, त्वरित निर्णय लेने की प्रवृत्ति, विभागीय जवाबदेही पर जोर और सार्वजनिक मंचों पर स्पष्ट रुख शामिल रहा है। समर्थक उन्हें जुझारू और निर्भीक नेता मानते हैं, जबकि आलोचक उनकी तीखी बयानबाजी को विवादास्पद बताते हैं। परंतु यह निर्विवाद है कि वे हरियाणा की राजनीति के प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते हैं।

संघर्ष से सशक्त नेतृत्व
वर्तमान में स्वास्थ्यगत कारणों से विश्राम पर होने के बावजूद उनके समर्थकों का मानना है कि यह दौर भी अस्थायी है। अतीत में भी स्वास्थ्य चुनौतियों और राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बीच उन्होंने सक्रियता बनाए रखी है। नेतृत्व की असली परीक्षा संकट के समय होती है। कोरोना काल से लेकर वर्तमान परिस्थितियों तक, उनका सार्वजनिक जीवन इस बात का उदाहरण प्रस्तुत करता है कि चुनौतियाँ यदि दृढ़ इच्छाशक्ति से टकराएँ तो वे बाधा नहीं, बल्कि नई शक्ति का स्रोत बन जाती हैं। विपरीत परिस्थितियों से निकलकर और मजबूत होकर सामने आना—यही अनिल विज की राजनीतिक यात्रा की पहचान रही है।

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