बिहार में बदल रही जेलों की तस्वीर, देश में शिक्षा के मामले में बना नंबर वन

पटना.

जेल अब केवल सजा काटने की जगह नहीं रह गई है, बल्कि नई शुरुआत का दरवाजा बन रही है. 2025 में बिहार के जेलों ने शिक्षा और पुनर्वास के क्षेत्र में ऐसा रिकॉर्ड बनाया है, जिसने उसे पूरे देश में सर्वोच्च स्थान पर पहुंचा दिया है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग के माध्यम से 10वीं में 1256 और 12वीं में 183 बंदियों का नामांकन कराया गया है.

देश में नंबर वन बिहार
यह आंकड़ा देश में सबसे अधिक है और इसने बिहार की जेलों को सुधारात्मक मॉडल के रूप में स्थापित कर दिया है. उच्च शिक्षा के मोर्चे पर भी राज्य आगे है. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के माध्यम से 1565 बंदियों का नामांकन कराया गया है, जबकि 2025 में ही 1354 बंदियों को उच्च शिक्षा से जोड़ा गया है. जॉब ओरिएंटेड ट्रेनिंग पर भी जोर दिया गया है.

कैदियों को क्या मिलेगा फायदा?
2025-26 में 3902 सजायाफ्ता और विचाराधीन बंदियों को अलग-अलग ट्रेंडों में स्किल ट्रेनिंग दिया गया. कंप्यूटर शिक्षा के क्षेत्र में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और अन्य एजेंसियों के माध्यम से 1443 बंदियों को प्रशिक्षित किया गया. इसका सीधा फायदा यह होगा कि रिहाई के बाद उन्हें रोजगार के अवसर मिलेंगे और दोबारा अपराध की संभावना घटेगी.

आर्ट ऑफ लिविंग के साथ समझौता
जानकारी के मुताबिक, राज्य की सभी 59 जेलों में मानसिक और शारीरिक संतुलन के लिए आर्ट ऑफ लिविंग के साथ पांच सालों का समझौता किया गया है. दूसरी ओर अपराध पीड़ित कल्याण न्यास के माध्यम से 2025 में पीड़ित परिवारों को दो करोड़ 73 लाख नौ हजार 590 रुपए की सहायता राशि देने की प्रक्रिया चल रही है.

वीरान पहाड़ों पर बनाए जायेंगे जेल
इससे पहले बजट सत्र के दौरान गंभीर श्रेणी के अपराधियों के लिए वीरान पहाड़ पर जेल बनाने का ऐलान किया गया था. गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने खुद ही इसे लेकर ऐलान किया था. सम्राट चौधरी के मुताबिक, अपराधियों के लिए हाई सिक्योरिटी जेल पहाड़ पर बनेंगे, जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं होगा. यहां आने-जाने के लिए सिर्फ एक ही रास्ता होगा और इस रास्ते में चप्पे-चप्पे पर पैनी नजर रखी जाएगी.

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