शिक्षा के मंदिरों से हो भारतीयता के भाव का उद्घोष : मंत्री परमार

भोपाल

उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा कि "विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक-2025" द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों को संचालित करने के लिए विभिन्न प्रकार की जटिल अनुमतियों को समाप्त करते हुए एक ऐसी व्यवस्था विकसित की जा रही है, जिसके द्वारा शैक्षणिक संस्थानों को ज्ञान के केन्द्र के रूप में स्थापित करने का अवसर मिलेगा तथा विभिन्न विसंगतियां भी समाप्त हो सकेंगी। "विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक-2025"; भारत की उच्च शिक्षा नियामक संरचना को आधुनिक एवं एकीकृत बनाने का समग्र प्रयास है।

मंत्री  परमार ने कहा कि यह विधेयक संसद में प्रस्तुत किया गया है। इस विधेयक के लिए देश भर के लोगों से सुझाव भी मांगे जा रहे हैं। मध्यप्रदेश से भी सुझाव जाने चाहिए, इसके लिए आवश्यक है कि सही परिप्रेक्ष्य में और सही तथ्यों के साथ, प्रदेश की बात संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) तक पहुँचे। मंत्री  परमार ने कहा कि यह विधेयक, शिक्षा की गुणवत्ता एवं प्रशासनिक समन्वय को सुदृढ़ करेगा। मंत्री  परमार शुक्रवार को भोपाल स्थित मध्यप्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के सभागार में, "विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक-2025" विषय पर आयोजित एक दिवसीय संविमर्श "आनन्दशाला" का शुभारम्भ कर, विधेयक की प्रासंगिकता के आलोक में अपने विचार साझा कर रहे थे।

मंत्री  परमार ने कहा कि शिक्षा के मंदिरों से भारतीयता के भाव का उद्घोष होना चाहिए। पराधीनता के पदचिन्हों को अंतिम विदाई देते हुए, हर क्षेत्र-हर विषय में भारतीय दृष्टि से समृद्ध विचार मंथन की आवश्यकता है। इसके लिए करोड़ों लोगों के सुझाव से सृजित राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया है। मंत्री  परमार ने कहा कि यह विधेयक, भारत के उच्च शिक्षा शासन प्रबंधन में महत्वपूर्ण संरचनात्मक सुधार के लिए एकीकृत संस्थागत ढांचे की स्थापना के लिए भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित है। भारतीय शिक्षण मंडल एवं मध्यप्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह आनंदशाला, विकसित भारत@2047 की संकल्पना सिद्धि के निमित्त, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुसरण में शैक्षणिक सरोकार की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस संविमर्श से प्राप्त होने वाला निष्कर्ष, भारत सरकार के उद्देश्यों की पूर्ति में सहायक सिद्ध होगा।

इस अवसर पर बीज वक्ता के रूप में  विश्वजीत पेंडसे, मप्र भोज मुक्त विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. डॉ. मिलिंद दांडेकर, कुलसचिव डॉ. सुशील मंडेरिया एवं प्रो. लक्ष्मीकांत त्रिपाठी सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरु, विविध शिक्षाविद् एवं अन्य विद्वतजन उपस्थित थे।

 

Recent Post

Live Cricket Update

You May Like This

error: Content is protected !!

4th piller को सपोर्ट करने के लिए आप Gpay - 7587428786