पंजाब में आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी राहत, हाई कोर्ट ने रेगुलर करने के दिए आदेश

चंडीगढ़.

पंजाब में सालों से आउटसोर्स बेसिस पर काम कर रहे चौकीदारों को बड़ी राहत देते हुए पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को उन्हें रेगुलर करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि लंबे समय से लगातार सर्विस के बावजूद कर्मचारियों को अस्थायी दर्जे पर रखना अनुचित लेबर प्रथा है और यह संविधान के बराबरी के सिद्धांत के खिलाफ है।

जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने मनक सिंह और अन्य समेत कई पटीशनों पर एक साथ सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि 15 अक्टूबर, 2020 के ऑर्डर के जरिए कर्मचारियों को रेगुलर करने की मांग को खारिज करना कानून की नजर में टिकने लायक नहीं है। आखिरी ऑर्डर में कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित डिपार्टमेंट को ऑर्डर की कॉपी मिलने के 6 हफ्ते के अंदर सभी पटीशनर्स को रेगुलर करने का निर्देश दिया। अगर तय समय में ऑर्डर का पालन नहीं किया जाता है, तो कर्मचारी अपने आप रेगुलर माने जाएंगे।

कोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों के पिछले सर्विस पीरियड को भी गणना में शामिल किया जाए और उन्हें सभी संबंधित सर्विस लाभ दिए जाएं। यह फैसला राज्य में आउटसोर्स और अस्थायी कर्मचारियों के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे ऐसे ही हालात में काम कर रहे दूसरे कर्मचारियों को भी कानूनी राहत मिलने का रास्ता खुल सकता है। पटीशनर्स ने कोर्ट को बताया कि वे 2008 से अलग-अलग डिपार्टमेंट्स में चौकीदार के तौर पर काम कर रहे हैं और असली कंट्रोल डिपार्टमेंट के पास है, जबकि उन्हें एक ठेकेदार जरिए नियुक्त दिखाया गया है। उन्होंने बराबर काम के लिए बराबर सैलरी, मिनिमम उजरत और नियमत करने की मांग करते हुए कहा कि उनसे भी उतना ही काम लिया जाता है जितना रेगुलर कर्मचारियों से लिया जाता है।

डिपार्टमेंट कॉन्ट्रैक्टर को हर कर्मचारी के हिसाब से करीब 14,000 रुपये देता था लेकिन कर्मचारियों को इससे बहुत कम सैलरी मिलती थी, जिससे वे कम से कम तनख्वाह से भी नीचे रह गए थे। इस स्थिति को गलत बताते हुए कोर्ट ने बराबर काम के लिए 'बराबर काम के लिए बराबर सैलरी' पर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का ज़िक्र किया और कहा कि एक आदर्श नियोक्ता के तौर पर राज्य कर्मचारियों के अधिकारों को नजरअंदाज नहीं कर सकता। हाई कोर्ट ने कहा कि जब कर्मचारी लंबे समय से लगातार सर्विस दे रहे हैं और उनका काम स्थायी है, तो उन्हें बस आउटसोर्स करना या अस्थायी कैटेगरी में रखना संविधान के अनुछेद 14, 16 और 21 की भावना के खिलाफ है। कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकारी डिपार्टमेंट सालों तक अस्थायी लेबर लेने के बाद उन्हें रेगुलर करने से मना नहीं कर सकते हैं। 

Recent Post

Live Cricket Update

You May Like This

error: Content is protected !!

4th piller को सपोर्ट करने के लिए आप Gpay - 7587428786