हिमाचल में पंचायत-निकाय चुनाव टालना अब नामुमकिन, सुप्रीम कोर्ट ने तय की सख्त डेडलाइन

हिमाचल
सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश सरकार को आंशिक राहत देते हुए राज्य में पंचायतीराज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव कराने की अंतिम समय-सीमा 31 मई 2026 तय कर दी है। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि संशोधित कार्यक्रम के अनुसार पूरी चुनाव प्रक्रिया हर हाल में 31 मई तक पूरी की जाए और इसमें किसी तरह की अनिश्चित देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी। इसमें 30 अप्रैल 2026 तक चुनाव संपन्न कराने की समय-सीमा तय की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए चुनाव की अंतिम तारीख 31 मई कर दी, लेकिन यह भी साफ किया कि आरक्षण रोस्टर 31 मार्च 2026 तक हर हाल में अंतिम रूप देकर लागू किया जाए। अदालत ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अनिश्चित काल तक टाला नहीं जा सकता और प्रशासनिक कठिनाइयों के बावजूद तय समय-सीमा के भीतर चुनाव कराना राज्य की जिम्मेदारी है।

राज्य सरकार ने क्या दलील दीं?
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने दलील दी कि इस बार कड़ी सर्दी, भारी बर्फबारी, कई क्षेत्रों में सड़क संपर्क टूटने और दूरदराज जनजातीय इलाकों में आवागमन बाधित रहने के कारण जमीनी स्तर पर चुनाव की तैयारियां समय पर पूरी करना मुश्किल हो रहा था। सरकार ने यह भी कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा तय समय-सीमा में आरक्षण की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध नहीं था।

राज्य सरकार ने यह भी प्रश्न उठाया कि आपदा जैसी परिस्थितियों में आपदा प्रबंधन कानून के प्रावधानों के तहत चुनाव प्रक्रिया को सीमित अवधि के लिए स्थगित करने की कितनी अनुमति है। हालांकि अदालत ने राज्य की दलीलों को सीमित रूप से स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि संवैधानिक संस्थाओं के चुनाव तय समय के भीतर कराना अनिवार्य है और इन्हें अनिश्चित काल तक टालना उचित नहीं है।अदालत के इस आदेश के बाद अब ध्यान राज्य निर्वाचन आयोग पर रहेगा, जिसे संशोधित कार्यक्रम के अनुसार 31 मार्च तक आरक्षण प्रक्रिया पूरी करनी होगी और 31 मई 2026 तक पंचायत और नगर निकाय चुनाव संपन्न कराने होंगे।

जिम्मेदारी प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपी
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल 31 जनवरी 2026 को समाप्त हो चुका है। इसके बाद प्रदेश की ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों की जिम्मेदारी अस्थायी रूप से प्रशासनिक अधिकारियों को सौंप दी गई है। राज्य सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी थी। इसके अनुसार एक फरवरी से पंचायतों की सभी शक्तियां प्रशासकों के पास हैं।

कार्यकाल पूरा हो चुका है
सरकार की अधिसूचना के अनुसार अधिकांश पंचायतीराज संस्थाओं का कार्यकाल पूरा हो गया है, हालांकि लाहौल-स्पीति जिले के केलांग उपमंडल की पंचायतों, चंबा जिले के पांगी उपमंडल की पंचायतों और कुल्लू जिले की चार ग्राम पंचायतों को फिलहाल इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है। समय पर चुनाव न हो पाने के कारण यह अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था लागू की गई है।

समितियों का गठन किया गया है
राज्य सरकार ने पंचायतों के संचालन के लिए समितियों का गठन किया है। इनमें ग्राम पंचायत स्तर पर खंड विकास अधिकारी को अध्यक्ष और पंचायत सचिव को सदस्य सचिव बनाया गया है। पंचायत समितियों और जिला परिषदों में भी संबंधित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को अध्यक्ष और अन्य अधिकारियों को सदस्य और सदस्य सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे प्रशासनिक और वित्तीय कार्य बिना बाधा जारी रह सकें।

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