पूर्व मंत्री मनजीत मन्ना भगौड़ा घोषित, मारपीट मामले में कोर्ट का सख्त फैसला

चंडीगढ़.

अकाली-भाजपा सरकार के दौरान विधायक व मंत्री रह चुके मनजीत सिंह मन्ना और उनके भाई रणजीत सिंह को भगौड़ा घोषित कर दिया गया है। यह फैसला 2015 के एक मारपीट मामले में अदालत में पेश न होने के कारण आया। पीड़ित पूरन सिंह ने राजनीतिक प्रभाव के बावजूद न्याय के लिए लंबी लड़ाई लड़ी, जिसके बाद अदालत ने यह सख्त कदम उठाया।

जानकारी के मुताबिक, 18 सितंबर 2015 को अकाली सरकार के दौरान एक नॉन-कस्टोडियल केस में विवाद होने के बाद, उस समय के अकाली विधायक मनजीत सिंह मन्ना और उनके भाई रणजीत सिंह ने अपने समर्थकों संग अपनी ही पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता पूरन सिंह को बुरी तरह पीटा था। आरोप यह भी लगे थे कि उन्होंने पीड़ित पर तेजधार हथियारों से हमला किया था और उसकी पगड़ी उतार दी थी। इसके बाद विधायक और उसके साथियों के अत्याचार का शिकार हुए पूरन सिंह के बेटे ने इस घटना की जानकारी थाने में दी। उन्होंने मारपीट के बारे में मेडिकल जांच करवाने की मांग की, लेकिन उस समय पुलिस ने पूरन सिंह की एक नहीं सुनी। पीड़ित के बेटे ने इस बारे में पंजाब पुलिस के हेल्पलाइन नंबर 181 पर भी शिकायत दी, जिसका नंबर एएमआर-आरआर 814229 तारीख 18 सितंबर 2015 है।

हरदीप सिंह ने पूरन सिंह को गुरु नानक देव अस्पताल अमृतसर में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज हुआ और डॉक्टर ने पूरन सिंह की मेडिकल रिपोर्ट बनाकर उसे थाना खलचिया भेज दिया। पीड़ित ने इस मामले की जानकारी पुलिस के बड़े अधिकारियों को दी, लेकिन आरोपियों के राजनीतिक अप्रोच के कारण पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की। इसके बाद पीड़ित पूरन सिंह ने वकील वीके जसवाल के जरिए ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट, बाबा बकाला साहिब की अदालत में 156 (3) सीआरपीसी के तहत शिकायत दी, जिसमें थाना खलचिया को आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश देने की गुहार लगाई गई, लेकिन जज ने इस शिकायत को केस में बदल दिया।

इस केस में जज ने शिकायतकर्ता, मौके पर मौजूद गवाहों, मेडिकल रिपोर्ट के बारे में डॉक्टरों और पुलिस को दी गई शिकायत के बारे में सरकारी गवाहों समेत कुल 9 गवाहों के बयान दर्ज किए और वकील वीके जसवाल की दलीलों से सहमत हुए। इस बीच रंजीवपाल सिंह चीमा, ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट, बाबा बकाला साहिब ने 12 जुलाई 2019 को सभी आरोपियों को धारा 326,324,323,341,148,149 के तहत समन जारी किए और सभी आरोपियों को 8 अगस्त 2019 को अदालत में पेश होने का आदेश दिया।

इस केस में मनजीत सिंह मन्ना के पर्सनल असिस्टेंट हरप्रीत सिंह और बलदेव सिंह के वकील मनिंदरजीत सिंह गहरी खुद पेश हुए, लेकिन बाकी आरोपियों ने केस को आज तक पेंडिंग रखा और कोर्ट के आदेशों को नजरअंदाज़ करते हुए कोर्ट में पेश नहीं हुए। इस पर जज रमनदीप कौर ज्यूडिशियल, मजिस्ट्रेट बाबा बकाला ने 29 जुलाई 2025 को आरोपी पूर्व विधायक मनजीत सिंह मन्ना, उसके भाई रणजीत सिंह और एक साथी हरजीत सिंह के लिए पुलिस को अरेस्ट वारंट जारी किए और उन्हें 12 जून 2025 को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया।

लेकिन मनजीत सिंह मन्ना और उसका भाई हरजीत सिंह जानबूझकर कोर्ट में पेश नहीं हुए, जिस पर जज रमनदीप कौर ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट जूनियर डिवीज़न बाबा बकाला ने 31 जनवरी 2026 को उन्हें भगौड़ा घोषित कर दिया और इस बारे में थाना मुखी खिलचिया को भी सूचित कर दिया गया है। जज ने बाकी आरोपियों के खिलाफ गवाही के लिए 16 फरवरी की तारीख तय की है।

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