चंडीगढ़ में अलग विधानसभा प्रस्ताव ठंडे बस्ते में, केंद्र के फैसले से Haryana को बड़ा झटका

चंडीगढ़ 
चंडीगढ़ में हरियाणा की अलग विधानसभा बनाने का मामला आखिरकार बंद हो गया है। केंद्र ने हरियाणा को बड़ा झटका दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हरियाणा सरकार के प्रस्ताव पर साफ इनकार कर दिया है। वहीं मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को सुझाव दिया है कि इस मुद्दे पर अब आगे कोई कदम न बढ़ाया जाए। यह फैसला ऐसे समय आया है जब केंद्र ने हाल ही में चंडीगढ़ को स्वतंत्र यूनियन टेरिटरी घोषित करने वाला 131वां शोध बिल वापस लिया था। इसे पंजाब के पक्ष में केंद्र का दूसरा बड़ा कदम माना जा रहा है। वहीं पंजाब के पूर्व मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने भी केंद्र के फैसले का स्वागत करते हुए कहा—“चंडीगढ़ पंजाब का है… यहां किसी और का दावा नहीं माना जा सकता।”

बता दें कि 2022 में जयपुर में हुई नॉर्दर्न ज़ोनल काउंसिल की बैठक में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हरियाणा को नई विधानसभा के लिए जमीन देने की घोषणा की थी। तो वहीं 2023 में UT प्रशासन ने IT पार्क के पास लगभग 10 एकड़ जमीन भी चिन्हित कर दी थी, जिसकी कीमत करीब 640 करोड़ रुपए बताई गई। इसके बदले हरियाणा ने पंचकूला में 12 एकड़ जमीन देने का प्रस्ताव दिया, लेकिन जनवरी 2024 में UT प्रशासन ने सर्वे के बाद इसे खारिज कर दिया। रिपोर्ट में जमीन को नीचा इलाका बताया गया, जहां बीच से नाला गुजरता है और कनेक्टिविटी भी कमजोर है। लंबी चर्चा के बाद केंद्र ने साफ कर दिया कि मामले को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा और मंत्रालय इसमें रुचि नहीं रखता।

गौरतलब है कि जैसे ही हरियाणा का प्रस्ताव आगे बढ़ा था, पंजाब सरकार ने खुलकर इसका विरोध किया। AAP विधायक गुरलाल घनौर ने कहा, “चंडीगढ़ पंजाब की राजधानी है, नई विधानसभा के निर्माण की कोई अनुमति नहीं दी जाएगी।”  

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