Raipur/Chhattisgarh ✍️अब्दुल शेख करीम…
रायपुर। छत्तीसगढ़ में नर्सिंग शिक्षा के क्षेत्र में पिछले 3 वर्षों से चल रहा अनियमितताओं का खेल अब एक बड़े घोटाले का रूप लेता दिखाई दे रहा है। राज्य में इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC), नई दिल्ली द्वारा केवल 3800 सीटों को मान्यता प्राप्त है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि स्टेट नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल (SNRC) ने नियमों की खुली अनदेखी करते हुए 7216 सीटों को मान्यता दे रखी है।
यानि 3416 सीटें ऐसी हैं, जिन पर पढ़ रहे हजारों छात्र-छात्राएं भविष्य के गंभीर संकट की ओर बढ़ चुके हैं।
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INC मान्यता के बिना कॉलेजों की बाढ़ – स्टेट काउंसिल और विश्वविद्यालय की गलत शह ?
राज्य के दर्जनों नर्सिंग कॉलेज—जिन्हें केवल राज्य स्तर की अनुमति है—
बिना INC Suitability के ही ANM, GNM और BSc Nursing में प्रवेश दे रहे हैं।
ऐसे संस्थानों से पास होकर निकलने वाले विद्यार्थियों की डिग्री—
अन्य राज्यों में अवैध मानी जाएगी
शासकीय/अर्धशासकीय भर्ती में अमान्य मानी जाएगी
विदेशों में नर्सिंग लाइसेंस प्रक्रिया में पूर्णतः अस्वीकृत होगी
अर्थात् लाखों रुपए खर्च कर पढ़ने वाले विद्यार्थियों का भविष्य अंधकार में।

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आयुष विश्वविद्यालय के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में दर्जनभर कॉलेज पहुँचे
पिछले दो वर्षों से आयुष एवं स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय तथा SNRC सभी नर्सिंग कॉलेजों को स्पष्ट निर्देश दे रहे हैं कि—
> “अगले वर्ष की संबद्धता (Affiliation) के लिए INC Suitability अनिवार्य होगी।”
लेकिन, कई कॉलेज इस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट पहुँचे हैं, और मामला अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा में है।
पत्र में उठाया गया अहम सवाल:
> “यदि हाईकोर्ट ने कॉलेजों के खिलाफ फैसला दे दिया, तो इन कॉलेजों में पढ़ रहे हजारों विद्यार्थियों के भविष्य का जिम्मेदार कौन होगा?”

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आयुष विश्वविद्यालय पर भी उठ रहे सवाल – बिना INC मान्यता के कॉलेजों को संबद्धता क्यों?
पत्र में यह भी स्पष्ट आरोप है कि—
विश्वविद्यालय पिछले वर्षों से जानकारी होने के बावजूद
बिना INC मान्यता प्राप्त कॉलेजों को
लगातार संबद्धता दे रहा है
जिससे ऐसे कालेजों को “अनावश्यक शह” मिल रही है।
यह गंभीर सवाल खड़ा करता है:
> क्या विश्वविद्यालय अनजाने में या दबाव में ऐसे कॉलेजों को संरक्षण दे रहा है?
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अदालती फैसले से पहले प्रवेश देना — छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़
चूंकि हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन है, ऐसे में:
छात्रों को प्रवेश देना
फीस वसूलना
बैच चलाना
विश्वविद्यालय का उनके फॉर्म स्वीकार करना
सब जोखिम भरा और गैर-जिम्मेदाराना कदम माना जा रहा है।
पत्र में यह भी स्पष्ट कहा गया है कि—
> “हाईकोर्ट के परिणाम आने तक ऐसे कॉलेजों को संबद्धता प्रक्रिया से दूर रखा जाए।”
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नर्सिंग शिक्षा में अव्यवस्था की असल जड़ – बिना अस्पताल, बिना लैब, बिना भवन वाले कॉलेज
जांच का एक बड़ा पहलू यह भी है कि छत्तीसगढ़ में—
30–35 कॉलेज बिना स्वयं के भवन
3 एकड़ भूमि की अनिवार्य शर्त पूरी नहीं
क्लीनिकल फैसिलिटी के लिए अस्पताल बेड की कमी
लैब–लाइब्रेरी–खेल परिसर का अभाव
केवल नाम पर “नर्सिंग कॉलेज” चल रहे हैं
INC गाइडलाइन का पालन न होना भी स्पष्ट रूप से सामने आ गया है।
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INC की नई गाइडलाइन ने भी खोली पोल – Regular vs Irregular Batch
INC के हालिया आदेश (22 अक्टूबर 2025) के अनुसार—
Regular Batch
➤ 31 अक्टूबर 2025 तक प्रवेशित विद्यार्थी
Irregular Batch
➤ 1 नवंबर–30 नवंबर 2025 तक प्रवेशित विद्यार्थी
दोनों बैच की परीक्षा विश्वविद्यालय को अलग-अलग आयोजित करनी होगी।
इससे यह और स्पष्ट होता है कि—
नवंबर में किए जा रहे प्रवेश पूर्णतः असाधारण परिस्थितियों में अस्थायी रूप से स्वीकृत हैं, और इसका अनुचित लाभ कॉलेज नहीं उठा सकते।
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मंत्री को भी भ्रमित किए जाने का गंभीर आरोप
रिपोर्ट में यह भी शामिल किया गया है कि—
> 11 नवंबर को स्वास्थ्य मंत्री को दिया गया आवेदन
—PNT में 0 अंक लाने वाले छात्रों को भी प्रवेश दिलाने की प्रक्रिया शुरू कराने के लिए था।
लेकिन मंत्री को ये महत्वपूर्ण बातें छुपाई गईं–
1. कई कॉलेजों को INC मान्यता नहीं है
2. GNM से BSc में अपग्रेडेड कॉलेज हाईकोर्ट में लंबित हैं
3. नवंबर प्रवेश केवल Irregular Batch के लिए हैं
यह अत्यंत गंभीर स्थिति बनाती है कि—
> क्या मंत्री को अधूरी या गलत जानकारी देकर निर्णय प्रभावित किए जा रहे हैं?
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अब बड़ा सवाल – क्या विश्वविद्यालय और SNRC जिम्मेदारी लेंगे?
यदि हाईकोर्ट का फैसला—
❌ कॉलेजों के खिलाफ आता है
तो परिणाम:
विद्यार्थियों की डिग्री अवैध
भविष्य बर्बाद
लाखों रुपए डूबे
परिवारों का मानसिक-आर्थिक नुकसान
विश्वविद्यालय और SNRC की विश्वसनीयता पर तगड़ा झटका
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निष्कर्ष — “छात्रों के भविष्य का सवाल, इंतजार नहीं अपराध बन चुका है”
छत्तीसगढ़ का नर्सिंग सेक्टर
अव्यवस्था, भ्रष्टाचार, मिलीभगत और गलत आदेशों का जाल बन चुका है।
रिपोर्ट दर्शाती है कि—
INC और SNRC के आंकड़ों में भारी अंतर
बिना Suitability के कॉलेजों को बढ़ावा
संबंधित संस्थाओं की लापरवाही
विश्वविद्यालय द्वारा संदिग्ध संबद्धता
हाईकोर्ट में लंबित मामले
और मंत्रालय को गलत जानकारी देना
सब मिलकर छात्र भविष्य को दांव पर लगा चुके हैं।









