हरियाणा में एनीमिया पर काबू: पहली तिमाही में देश में दूसरा स्थान, 3 महीने पहले था 11वां

चंडीगढ़ 
हरियाणा अपनी
दशकों पुरानी लोगों में एनीमिया की कमी की समस्या से दूर हो रहा है। राज्य ने साल की पहली तिमाही में इस मामले में सुधार दर्ज किया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की नई रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष की पहली तिमाही में हरियाणा एनीमिया उन्मूलन में हुआ खुलासा। 

रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा 59 महीने तक की आयु के 77 % बच्चों तथा पांच से नौ वर्ष की आयु के 95% बच्चों की जरूरतों को पूरा करने में सफल रहा। राज्य ने 'किशोरों' की श्रेणी के 95% व्यक्तियों और 93% लोगों को भी कवर किया है।

एनीमिया से निपटने के लिए हरियाणा सरकार की ओर से लाभार्थियों के लिए रोग निरोधी आयरन-फोलिक एसिड (IFA), आयरन से खाद्य पदार्थों का सुदृढ़ीकरण, समुदायों और स्कूलों में एनीमिया की जांच और उपचार; मलेरिया और फ्लोरोसिस जैसे गैर-पोषण संबंधी कारणों का समाधान; और अटल (संपूर्ण एनीमिया सीमा सुनिश्चित करना) अभियान के लागू किया। इसके अलावा अभियान के तहत लाभार्थी ट्रैकिंग और डेटा विश्लेषण के लिए एक आईटी प्लेटफॉर्म का भी उपयोग किया गया है।

हरियाणा में सबसे अधिक पीड़ित

एनीमिया मामलों में देशभर में हरियाणा 11वें और चंडीगढ़ 12वें नंबर पर हैं, जहां 15 से 49 वर्ष की महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। तीन महीने पहले की एक रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा में स्थिति चंडीगढ़ से अधिक खराब है, जहां 60.4 फीसद महिलाएं एनीमिया से पीड़ित है।

पंजाब में यह दर 58.7 और हिमाचल में यह दर 53.0 फीसद है। वहीं, हरियाणा प्रदेश में एनीमिया से ग्रसित महिलाओं की संख्या पंजाब से 3.2 और हिमाचल से 7.5 प्रतिशत ज्यादा है।

क्या बोले अधिकारी…

हरियाणा एनएचएम निदेशक डॉ. वीरेंद्र यादव ने बताया, हम '6x6x6' एप्रोच को लागू करने में सफल रहे, जिससे हमारे प्रदर्शन में सुधार हुआ। हमने छह संस्थागत तंत्रों के माध्यम से छह हस्तक्षेपों के साथ छह आयु समूहों को लक्षित किया।

हम समझते हैं कि स्तनपान कराने वाली माताओं को शामिल करना एक चुनौती है जिसका समाधान किया जाना आवश्यक है। हम इस चुनौती से पार पाने और हरियाणा को सौ प्रतिशत एनीमिया मुक्त बनाने की पहल पर काम कर रहे हैं।

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