ट्रंप के आगे घुटने न टेंके मोदी, पूर्व US मंत्री कर्ट कैंपबेल ने अपने ही राष्ट्रपति को लताड़ा

नई दिल्ली

अमेरिका के पूर्व उप विदेश मंत्री कर्ट कैंपबेल ने भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ की कड़ी आलोचना की है। कैंपबेल ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप का यह कदम भारत-अमेरिका संबंधों को गंभीर खतरे में डाल रहा है, जो 21वीं सदी में अमेरिका के लिए सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सलाह दी कि वे ट्रंप के दबाव में नहीं झुकें। राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर रूस से तेल खरीदने को लेकर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लागू किया, जिससे भारत पर कुल टैरिफ 50 प्रतिशत हो गया। यह टैरिफ 27 अगस्त से प्रभावी होगा।
कैंपबेल की चेतावनी: भारत रूस से संबंध नहीं तोड़ेगा

सीएनबीसी इंटरनेशनल को दिए एक इंटरव्यू में कैंपबेल ने कहा, "21वीं सदी में अमेरिका का सबसे महत्वपूर्ण रिश्ता भारत के साथ है, और यह अब खतरे में है। जिस तरह से राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत और पीएम मोदी के बारे में बात की है, उसने भारतीय सरकार को मुश्किल स्थिति में डाल दिया है।" उन्होंने भारत को सलाह दी कि वह ट्रंप के दबाव में नहीं झुके। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी को राष्ट्रपति ट्रंप के आगे घुटने नहीं टेकने चाहिए।" कैंपबेल ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका भारत पर दबाव डालता है कि वह रूस से संबंध तोड़ दे, तो भारतीय रणनीतिकार ठीक इसके उलट करेंगे। उन्होंने कहा, "भारत को रूस के साथ संबंध तोड़ने के लिए कहना उलटा पड़ सकता है।"
अमेरिका में द्विपक्षीय चिंता

ट्रंप के इस फैसले ने अमेरिका में भी द्विपक्षीय चिंता को जन्म दिया है। पूर्व उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने टैरिफ की आलोचना करते हुए कहा कि यह अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं पर बोझ डालता है। उन्होंने मुक्त व्यापार की वकालत की और कहा, "अमेरिकी कंपनियां और उपभोक्ता ही टैरिफ की कीमत चुकाते हैं।" इसके अलावा, डेमोक्रेट सीनेटर ग्रेगरी मीक्स ने भी चेतावनी दी कि ट्रंप का यह "टैरिफ तंत्र" भारत-अमेरिका साझेदारी को नुकसान पहुंचा सकता है।
भारत की स्थिति और पीएम मोदी का रुख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को दिल्ली में एमएस स्वामीनाथन शताब्दी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए एक मजबूत संदेश दिया। उन्होंने कहा, "हमारे लिए किसानों का हित सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत अपने किसानों, मछुआरों और डेयरी क्षेत्र के हितों से कभी समझौता नहीं करेगा। मुझे पता है कि इसके लिए हमें भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है, लेकिन मैं इसके लिए तैयार हूं। भारत तैयार है।" यह बयान ट्रंप के टैरिफ के जवाब में देखा जा रहा है, जिसमें भारत ने साफ कर दिया कि वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।

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