स्मार्ट मीटर से बिल कम करना अपने हाथ में है, गुना के घरेलू स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं ने बताए फायदे

भोपाल

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की पहल पर पूरे कंपनी कार्यक्षेत्र के 16 जिलों में घरेलू स्मार्ट मीटर लगाने का काम तीव्र गतिसे चल रहा है। गुना वृत्त में लगभग तीन माह पहले लगाए जा चुके स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं से बातचीत में अनेक सकारात्मक पहलू सामने आए है। अधिकतर उपभोक्ताओं ने फायदा होने की बात कही है। गुना शहर के उपभोक्ता श्री विष्णु धाकड़ ने बताया कि उनके यहां दो महीने पहले स्मार्ट मीटर लगा था, शुरू में उन्हें डर था कि कहीं स्मार्ट मीटर से बिल तो अधिक नहीं आएगा लेकिन जैसे ही अगले महीने बिल आया तो देखा कि कहीं कोई ऐसी गड़बड़ी नहीं आई। इस महीने 80 रुपये बिल आया है, जिसे जमा भी कर दिया है।

इसी तरह एक और उपभोक्ता श्री देवीदयाल ने बताया कि उनके यहां उनकी सहमति से स्मार्ट मीटर लगाया गया है। उन्होंने बताया कि इस महीने उनका बिल कम ही आया है। मीटर से किसी तरह की कोई परेशानी नहीं है, बल्कि अब तो एप के माध्मय से हम अपने घर के बिजली उपयोग को भी नियंत्रित करना सीख गए हैं, क्योंकि उपकरणों  पर नियंत्रण करने से बिल में काफी कमी आई है।

इसी तरह गुना के ही उपभोक्ता श्री अक्षय कुमार ने बताया कि स्मार्ट मीटर से कहीं कोई गलत बिल नहीं आया, हमारा बिल 550 रुपये आया है। रीडिंग लेने में कोई गड़बड़ी नहीं है, बल्कि अब तो अपने आप दूरसंचार प्रणाली से रीडिंग हो रही है और निर्धारित तिथि को सही रीडिंग का बिल मोबाइल पर दिया जा रहा है। उन्होंने भी कहा कि अब तो बिल कम करना अपने हाथ में है।

दिन के टैरिफ में 20 प्रतिशत की छूट

स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं जिसमें सार्वजनिक जल कार्य, स्ट्रीट लाइट और एलटी औद्योगिक उपभोक्ता शामिल हैं, के लिए ऑफ पीक/ सौर समय सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक की अवधि के दौरान उपभोग की गई ऊर्जा के लिए ऊर्जा प्रभार की सामान्य दर पर 20 प्रतिशत की छूट प्रदान की जा रही है। यह छूट 10 किलोवाट तक स्वीकृत लोड / अनुबंध मांग वाले उपभोक्ताओं को मिल रही है।

घरेलू स्मार्ट मीटर के फायदे

1. ऊर्जा की खपत को ट्रैक करने और ऊर्जा की बचत करने में मदद करता है।

2. बिजली की खपत को सटीक रूप से मापता है, जिससे बिल में कोई गलती नहीं होती।

3. एप के जरिए मोबाइल पर रियल-टाइम डेटा देखकर ऊर्जा की खपत को नियंत्रित कर सकते हैं।

4. ऊर्जा की गुणवत्ता के बारे में जानकारी मिलती है, ताकि ऊर्जा की खपत को बेहतर बना सकते हैं।

5. ऊर्जा की खपत को कम करने से पर्यावरण पर पड़ने वाला प्रभाव कम होता है।

 

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