पत्नी के प्रति क्रूरता का सीधा सबूत नहीं है दूसरी महिला से संबंध, हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी

 चेन्नई
 मद्रास हाई कोर्ट ने वैवाहिक संबंधों और कानूनी प्रावधानों से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए अहम टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल पति का किसी अन्य महिला के साथ संबंध होना ही पत्नी के प्रति क्रूरता का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं माना जा सकता।

न्यायमूर्ति सुंदर मोहन की पीठ ने कहा कि आईपीसी की धारा 498ए और वर्तमान भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 85 एवं 86 के तहत अपराध सिद्ध करने के लिए अभियोजन पक्ष को केवल विवाहेतर संबंधों से आगे बढ़कर ठोस साक्ष्य पेश करने होंगे।

सुप्रीम कोर्ट की नजीर का उल्लेख
अदालत ने अपने इस फैसले में सुप्रीम को
र्ट के ऐतिहासिक निर्णय ‘पिनाकिन महीपतराय रावल बनाम गुजरात राज्य’ का हवाला दिया। इसके साथ ही पीठ ने मृतका के भाई द्वारा निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दाखिल की गई अपील को निरस्त कर दिया।

क्या था पूरा मामला?
इस केस में एक महिला ने अपने डेढ़ वर्षीय शिशु के साथ जान दे दी थी। मृतका के परिजनों का आरोप था कि पति के अन्य महिला से संबंध और दहेज उत्पीड़न के कारण उसने यह कदम उठाया। हालांकि, अप्रैल 2018 में महिला के दहेज प्रताड़ना और अवैध संबंधों के आरोपों में पर्याप्त आधार न पाकर कोर्ट ने पति को दोषमुक्त कर दिया था। निचली अदालत ने पाया कि क्रूरता साबित करने के लिए अभियोजन के पास आवश्यक साक्ष्य नहीं थे।

हाईकोर्ट ने बरकरार रखा फैसला
राज्य सरकार द्वारा इस फैसले को चुनौती न दिए जाने पर मृतका के भाई ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले की समीक्षा करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के स्वतंत्र मूल्यांकन से यह स्पष्ट है कि अभियोजन पक्ष अपने आरोपों को सिद्ध करने में विफल रहा।

अदालत ने पुनः रेखांकित किया कि बिना किसी अतिरिक्त साक्ष्य या उत्पीड़न के सीधे प्रमाण के, केवल किसी अन्य महिला से संबंध होने के आधार पर पति को पत्नी के प्रति क्रूरता का दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

Recent Post

Live Cricket Update

You May Like This

error: Content is protected !!

4th piller को सपोर्ट करने के लिए आप Gpay - 7587428786