ट्रंप का चीन पर बदला रुख, कभी खतरा बताया था अब जिनपिंग को कहा ‘बड़ा सज्जन’

वाशिंगटन
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कभी चीन को अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बताते थे। उनका कहना था कि बीजिंग ने अमेरिकी कारखानों को कमजोर किया और मध्यम वर्ग को नुकसान पहुंचाया। इसी सख्त रुख के साथ वह करीब एक दशक पहले व्हाइट हाउस पहुंचे थे। लेकिन अब ट्रंप का चीन और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के प्रति रवैया काफी नरम नजर आ रहा है। जिनपिंग 24 सितंबर को अमेरिका की यात्रा पर पहुंचेंगे और ट्रंप उनके सम्मान में राजकीय डिनर देंगे। ट्रंप ने हाल में जिनपिंग को ‘बड़ा सज्जन’ बताया और कहा कि दोनों के रिश्ते बहुत अच्छे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से जुड़े कई मुद्दों पर पहले जैसा कड़ा रुख नहीं अपनाया है। ईरान को चीन की ओर से कथित तौर पर सैटेलाइट तस्वीरें दिए जाने की खबरों पर भी उन्होंने कहा कि शी जिनपिंग ने सही बर्ताव किया है। 2020 में ट्रंप ने चीन पर अमेरिकी मतदाता रिकॉर्ड तक पहुंच बनाने का आरोप लगाया था, लेकिन अब उन्होंने जवाबी कार्रवाई को लेकर भी सावधानी दिखाई है। इस बीच चीन विनिर्माण के साथ AI और इलेक्ट्रिक गाड़ियों जैसी नई तकनीकों में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। इससे अमेरिका समेत कई औद्योगिक देशों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ी है।

चीन पर भारी टैरिफ का क्या निकला नतीजा
डोनाल्ड ट्रंप ने चीन का रुख बदलने के लिए भारी टैरिफ और तकनीकी पाबंदियों का सहारा लिया था, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार इससे बेहतर नतीजे नहीं मिले। चीन ने इलेक्ट्रॉनिक सामान में इस्तेमाल होने वाले दुर्लभ खनिजों पर अपनी मजबूत पकड़ का इस्तेमाल करते हुए दबाव बनाया और दूसरे बाजारों में भी सामान की बिक्री बढ़ाई। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के सीनियर सलाहकार माइकल कोवरिग के मुताबिक, ट्रंप का शुरुआती तरीका सफल नहीं हुआ और दबाव की लड़ाई में जिनपिंग को बढ़त मिली। ट्रंप के कदमों से अमेरिका के पुराने सहयोगियों के साथ रिश्तों पर असर पड़ा है।

AI पावर और सैन्य क्षमता बढ़ा रहा बीजिंग
इसके बावजूद, दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी लड़ाई खत्म नहीं हुई है। चीन AI और सैन्य क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा है, जबकि ट्रंप प्रशासन दुर्लभ खनिजों के लिए साझेदारी और अमेरिका में एआई के विकास पर जोर दे रहा है। चीन पर अमेरिकी AI मॉडलों से अपनी कंपनियों को ट्रेनिंग देने के आरोप भी हैं। अमेरिकी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने कहा कि चीन को केवल एआई के मामले में खराब कहना सही नहीं है। इसे बड़े पैमाने पर देखने की जरूरत है।

अमेरिका-चीन के रिश्ते में तनाव
राष्ट्रपति ट्रंप के पहले कार्यकाल (2017-21) में भी अमेरिका-चीन रिश्तों में बड़ा तनाव देखने को मिला था। 2018 में ट्रंप प्रशासन ने चीनी सामान पर भारी टैरिफ लगाकर व्यापार युद्ध शुरू किया, जिसके जवाब में चीन ने भी अमेरिकी सामानों पर टैरिफ बढ़ाया। कोरोना महामारी, तकनीकी प्रतिस्पर्धा, हांगकांग और शिनजियांग जैसे मुद्दों पर भी दोनों देशों के बीच मतभेद बढ़े। जो बाइडेन के कार्यकाल (2021-25) में रिश्तों में सुधार की सीमित कोशिशों के बावजूद रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जारी रही। बाइडेन ने ट्रंप के ज्यादातर टैरिफ बरकरार रखे और सेमीकंडक्टर समेत कई तकनीकों पर चीन के लिए निर्यात प्रतिबंध बढ़ाए। यानी दोनों कार्यकालों में चीन को लेकर अमेरिकी नीति सख्त रही।

Recent Post

Live Cricket Update

You May Like This

error: Content is protected !!

4th piller को सपोर्ट करने के लिए आप Gpay - 7587428786