चंडीगढ़
पंजाब के 82.68 लाख बैंक खातों में 3111 करोड़ रुपये ऐसी रकम है, जिसके असली हकदार या तो खातों से दूर हो चुके हैं या फिर उन्हें अपनी जमा राशि की याद ही नहीं रही। लंबे समय तक लेन-देन नहीं होने के कारण इनमें से बड़ी संख्या में खाते निष्क्रिय हो गए और नियमों के तहत बैंकों ने जमा रकम रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के डिपॉजिटर एंड अवेयरनेस फंड (डीईए) में ट्रांसफर कर दी गई।
हैरानी की बात यह है कि बैंकों की तमाम कोशिशों के बावजूद महज 0.48 फीसदी खाताधारकों तक ही पहुंच बनाई जा सकी और उनकी रकम लौटाई गई। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की हालिया बैठक में पेश रिपोर्ट ने बैंक खातों में जमा इस लावारिस धन की तस्वीर सामने रखी है।
रिपोर्ट के अनुसार बैंकों की तरफ से विशेष अभियान के तहत 39,918 बैंक खातों में 130 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है। पंजाब सरकार ने ओडिशा की तर्ज पर सिंगल नोडल अकाउंट तैयार किया है ताकि खातों में जमा राशि के भुगतान में किसी भी तरह की देरी न हो लेकिन बावजूद इसके अधिकतर बैंक इस खाते में राशि जमा नहीं करवा रहे हैं। जानकारी के अनुसार अधिकतर खाते ऐसी परिस्थितियों में निष्क्रिय हुए जब खाताधारक स्थानांतरित हो गए या फिर उनका बैंक बदल गया। समिति के अनुसार बैंक खाताधारकों को ढूंढ रहे हैं जिसके लिए लगातार बैंकों को उचित दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं।
इस तरह निष्क्रिय हो जाता है खाता
जब किसी खाते में दो साल से ज्यादा कोई लेनदेन या गतिविधि नहीं होती है तो उसे निष्क्रिय कर दिया जाता है। वहीं अगर खाता 10 साल से ज्यादा समय तक निष्क्रिय रहता है तो बैंक उस खाते की राशि को आरबीआई के विशेष फंड में जमा करवा देता है।
2.49 लाख खाते निष्क्रिय
रिपोर्ट के अनुसार विभिन्न बैंकों में इस समय 2.49 लाख बचत खाते निष्क्रिय हैं जिनमें करोड़ों रुपये जमा हैं। इसी तरह प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत खुले 33.50 लाख खाते निष्क्रिय हो गए हैं और इनमें 435 करोड़ रुपये जमा हैं। इनमें ज्यादातर ऐसे खाते शामिल हैं जिन्हें लोगों ने न तो अपडेट करवाया और न ही पिछले काफी समय से लेन-देन किया है जिस कारण यह निष्क्रिय हो रहे हैं।
निष्क्रिय होने से बचाने के लिए यह सावधानी जरूरी
अपने खाते में कुछ महीनों में एक बार लेन-देन जरूर करें।
नियमित रूप से अपने सभी बैंक खातों की समीक्षा करें, उपयोग में नहीं आने वाले खाते बंद कर दें
बैंकों में संपर्क के लिए अपनी नवीनतम जानकारी अपडेट करवाएं।
पासबुक, नेट बैंकिंग से समय-समय पर खाता जांचें
बैंक के किसी भी अलर्ट और नोटिस को अनदेखा न करें।









