कैथल के लांस नायक नरेंद्र सिंधू को मरणोपरांत शौर्य चक्र, आतंकियों से मुठभेड़ में हुए थे बलिदान

 कैथल
 गांव रोहेड़ा निवासी लांस नायक नरेंद्र सिंधू को मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया है। स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी से उन्हें यह सम्मान दिया गया।

बलिदानी के सम्मान में गांव के युवाओं ने यात्रा निकाली और उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर नमन किया। नरेंद्र राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात थे। सितंबर 2025 में श्रीनगर के गुडडर के जंगलों में सर्च अभियान के दौरान लांस नायक नरेंद्र सिंधू (28) बलिदान हो गए थे।
लश्कर के दो आतंकी किए थे ढेर

उनके साथ हुई मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकी भी मारे गए थे। एक आतंकी को घायल करने के बाद ढेर किया गया था। भारी गोलीबारी और विषम परिस्थितियों के बावजूद नरेंद्र ने संयम व सूझबूझ का परिचय दिया।

उन्होंने घेराबंदी के अंदर मौजूद साथी जवानों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा। नजदीक से संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर उन्होंने नियमों के अनुसार निडरता से आतंकवादी को ललकारा।

आतंकी की भीषण गोलीबारी में वह गंभीर घायल हो गए। इसके बावजूद उन्होंने धैर्य नहीं खोया और अपनी पोजीशन बदलकर सटीक जवाबी कार्रवाई करते हुए आतंकी को मार गिराया। बाद में उसकी पहचान कैटेगरी-ए के दुर्दांत आतंकी के रूप में हुई।

गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे नरेंद्र
गंभीर रूप से घायल नरेंद्र को उपचार के लिए निकाला गया, लेकिन देश की रक्षा करते हुए उन्होंने वीरगति प्राप्त की। उनकी असाधारण बहादुरी, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान को देख उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र देने का फैसला लिया।

स्वजन के अनुसार नरेंद्र शहादत से नौ साल पहले सेना में भर्ती हुए थे और चार साल पहले श्रीनगर में उनकी पोस्टिंग हुई थी। वह अविवाहित थे और परिवार उनकी शादी की तैयारी कर रहा था।

ट्रांसफर के बाद थी शादी की योजना
जम्मू-कश्मीर से ट्रांसफर के बाद उनकी शादी की योजना थी। पिता दलबीर सिंधू ने कहा कि बेटे के देश के लिए बलिदान पर उन्हें गर्व है। उनका छोटा बेटा अब परिवार संभाल रहा है। उसे प्रदेश सरकार में जल्द क्लर्क के पद पर ज्वाइन करवाया जाएगा।

शौर्य चक्र मिलने पर प्रदेश सरकार 31 लाख रुपये देती है, जबकि केंद्र और सेना से अलग लाभ मिलते हैं। परिवार ने प्रदेश सरकार से गांव में शहीद के नाम पर द्वार बनाने और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का नाम उनके नाम पर रखने की घोषणा को जल्द पूरा करने की मांग की है। कैथल डीसी अपराजिता ने भी शहीद को नमन किया।

 

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