सिंहस्थ की कमान जगदीश अग्रवाल को, कुंभ 2016 के अनुभव से उज्जैन में तैयारियों को मिलेगी रफ्तार

उज्जैन
 आगामी महापर्व सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर मध्य प्रदेश सरकार ने अब एक महत्वपूर्ण राजनीतिक-प्रशासनिक कड़ी जोड़ दी है. राज्य शासन ने देर शाम आदेश जारी कर भाजपा के वरिष्ठ नेता और उज्जैन विकास प्राधिकरण (UDA) के पूर्व अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल को सिंहस्थ मेला प्राधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किया है. यह आदेश नगरीय विकास एवं आवास विभाग की ओर से जारी किया गया है. शासन ने यह नियुक्ति मध्य भारत सिंहस्थ मेला अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के तहत की है। 

2016 में UDA की कमान, अब सिंहस्थ की जिम्मेदारी
नव नियुक्त जगदीश अग्रवाल का सिंहस्थ और उज्जैन के विकास से जुड़ाव नया नहीं है. सिंहस्थ 2016 के दौरान सरकारी दस्तावेजों और समीक्षा बैठकों में वे उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे. उसी दौर में दिवाकर नातू सिंहस्थ मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष और माखन सिंह सिंहस्थ केंद्रीय समिति के अध्यक्ष थे. यानी 2016 के सिंहस्थ में विकास प्राधिकरण, मेला प्राधिकरण और केंद्रीय समिति तीनों स्तरों पर अलग-अलग संस्थागत भूमिकाएं सक्रिय थीं. अब 2028 के सिंहस्थ में जगदीश अग्रवाल को मेला प्राधिकरण की अध्यक्षीय जिम्मेदारी मिलना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वे पहले ही उज्जैन के विकास और सिंहस्थ से जुड़े कामकाज का अनुभव हासिल कर चुके हैं। 

प्रशासन पहले से मैदान में, अब प्राधिकरण भी
सिंहस्थ 2028 की तैयारियां प्रशासनिक स्तर पर पहले से जारी हैं. संभागायुक्त और सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह की निगरानी में अलग-अलग विभागों के साथ बैठकें, अधोसंरचना विकास, यातायात व्यवस्था, श्रद्धालु सुविधाओं और आयोजन से जुड़ी योजनाओं पर काम चल रहा है. अब मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल की नियुक्ति के बाद तैयारियों को एक और महत्वपूर्ण संस्थागत आधार मिला है. इससे सरकार, प्रशासन, स्थानीय निकायों और विभिन्न विकास एजेंसियों के बीच नीति, समन्वय और क्रियान्वयन की प्रक्रिया को गति देने की चुनौती और जिम्मेदारी प्राधिकरण के सामने होगी। 

सिर्फ सिंहस्थ नहीं, उज्जैन के भविष्य की भी तैयारी
सिंहस्थ 2028 को इस बार केवल एक धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं माना जा रहा है. सरकार की योजनाओं में उज्जैन की सड़क, यातायात, पुल, जल व्यवस्था, स्वच्छता, स्वास्थ्य, पार्किंग, सुरक्षा और श्रद्धालु सुविधाओं से जुड़ी स्थायी अधोसंरचना को भी प्रमुखता दी जा रही है. सिंहस्थ के लिए तैयार होने वाला इंफ्रास्ट्रक्चर आने वाले वर्षों में उज्जैन की बढ़ती आबादी, पर्यटन और धार्मिक यात्राओं की जरूरतों को भी पूरा करेगा। 

ऐसे में मेला प्राधिकरण की भूमिका केवल आयोजन के दौरान व्यवस्थाएं संभालने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि उससे पहले होने वाले बड़े विकास कार्यों के बीच समन्वय स्थापित करना भी अहम होगा. महाकाल की नगरी में अब चुनौती सिर्फ इतना नहीं कि सिंहस्थ भव्य हो बल्कि यह है कि 2028 का सिंहस्थ उज्जैन को ऐसी स्थाई सुविधाएं देकर जाए, जिनका लाभ महापर्व के बाद भी शहर और श्रद्धालुओं को मिलता रहे। 

ऐसा रहा जगदीश अग्रवाल का करियर
जगदीश अग्रवाल ने छात्र राजनीति से राजनीति की शुरुआत की. 1973 में माधव साइंस कॉलेज में ABVP के बैनर तले छात्रसंघ के अध्यक्ष बने. मीसाबंदी रहते हुए 17 महीने जेल में रहे. उज्जैन नगर अध्यक्ष, जिला महामंत्री, विकास प्राधिकरण अध्यक्ष रहे. वर्तमान में 2010 से प्रदेश वर्किंग कमिटी के सदस्य हैं. आपको बता दें कि साल 2004 के सिंहस्थ को लेकर सिंहस्थ मेला प्राधिकरण का गठन तत्कालीन मुख्यमंत्री उमा भारती ने किया था और सिंहस्थ के बाद 2005 में उज्जैन निवासी दिवाकर नातू को अध्यक्ष बनाया था, जो 2018 तक पद पर रहे। 

Recent Post

Live Cricket Update

You May Like This

error: Content is protected !!

4th piller को सपोर्ट करने के लिए आप Gpay - 7587428786